Thursday, August 20, 2026
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UP Sanskrit Board 2026: फर्जी शैक्षणिक अभिलेखों पर टॉपर रजनीश यादव की डिग्रियां रद्द, इनाम-टैबलेट वापस लेने की तैयारी

 प्रतापगढ़ 
उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 12वीं की परीक्षा के टॉपर रजनीश यादव की डिग्रियां निरस्त कर दी गई हैं. अब टॉपर बनने पर दी गई सम्मान राशि भी वापस ली जाएगी. दरअसल, प्रतापगढ़ के आसपुर देवसरा के बैजलपुर निवासी रजनीश ने संस्कृत बोर्ड की 12 वीं की परीक्षा में टॉप किया तो उसे एक लाख रुपये की सम्मान राशि, टैबलेट, मेडल और प्रशस्तिपत्र दिए गए थे. बाद में उसके पड़ोसी जगत प्रसाद ने शिकायत की तो जांच में उसके पूर्व के शैक्षिक अभिलेख फर्जी पाए गए और जन्मतिथि के साथ नाम में भी फेरबदल किया. ऐसे में अब प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने उसके पूर्व मध्यमा (हाई स्कूल) और उत्तर मध्यमा (इण्टरमीडिएट) के शैक्षिक डॉक्यूमेंट्स निरस्त कर दिया है. साथ ही पुरस्कार वापस लिए जाने के साथ सम्मान निधि राजस्व की भांति वसूल किए जाने का आदेश दिया है। 

फिलहाल, यूपी संस्कृत बोर्ड 2026 के प्रदेश टॉपर रजनीश यादव पर मुकदमा दर्ज हो गया है. टॉपर पर धोखाधड़ी, कूटरचना और जालसाजी की संगीन धाराओं में केस दर्ज हुआ है. वहीं, सरकार अब उससे लैपटॉप और एक लाख रुपए की धनराशि वापस के लिए आलाधिकारी को पत्र लिखा है. आरोप है कि नाम और जन्मतिथि में हेरफेर करके प्रवेश लेकर परीक्षा दी गई. टॉपर के पड़ोसी जगत प्रसाद की शिकायत पर आसपुर देवसरा थाने में एक्शन हुआ है. राम टहल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय यदुनाथपुर के छात्र ने 24 अप्रैल को घोषित रिजल्ट में 89.36 प्रतिशत अंकों के साथ प्रदेश टॉप किया था, जिसके बाद सीएम योगी ने भी उसे सम्मानित किया था. अब वही टॉपर कानूनी विवाद में घिर गया है। 

इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की 2026 की उत्तर मध्यमा यानि 12वीं की परीक्षा में प्रदेश में पहला स्थान हासिल करने वाले प्रतापगढ़ के छात्र रजनीश यादव की उपलब्धि पर अब सवाल खड़े हो गए हैं. किसान परिवार के इस छात्र की सफलता को संघर्ष की मिसाल बताया गया था, लेकिन अब उसी पर फर्जीवाड़े का आरोप है। 

रजनीश के पड़ोसी जगत प्रसाद ने पहले थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि छात्र के पूर्व शैक्षणिक अभिलेखों, राशन कार्ड और मतदाता सूची में उसका नाम अजय कुमार और जन्मतिथि 13 मई 1998 दर्ज थी. बाद में आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों में बदलाव कर रजनीश यादव नाम और जन्मतिथि 01 जुलाई 2010 दर्ज करा ली गई और इसी के आधार पर संस्कृत विद्यालय में प्रवेश लेकर 2026 की परीक्षा दी गई. जगत प्रसाद का आरोप है कि जमीनी रंजिश में साल 2020 में अजय कुमार उर्फ रजनीश पर उन्होंने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था, उस केस से बचने के लिए उसने अपना नाम और उम्र बदल ली। 

पट्टी सीओ ने बताया कि पड़ोसी की शिकायत पर धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. वहीं जब टीम रजनीश यादव के घर पहुंची तो घर पर मां और बहन मौजूद मिलीं, लेकिन दोनों ने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. घर पर रजनीश मौजूद नहीं था। 

गौरतलब है कि टॉप करने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंच पर रजनीश यादव को सम्मानित कर उसकी सराहना की थी. ऐसे में अब उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने उसके पूर्व मध्यमा और उत्तर मध्यमा के शैक्षिक अभिलेख निरस्त कर दिया है. साथ ही पुरस्कार वापस लिए जाने के साथ सम्मान निधि राजस्व की भांति वसूल किए जाने का आदेश दिया है। 

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