Wednesday, July 29, 2026
Google search engine
Homeराज्यमध्य प्रदेशUniform Civil Code: MP में लिव-इन पर नए नियम, हलाला पर कानूनी...

Uniform Civil Code: MP में लिव-इन पर नए नियम, हलाला पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान, 80% मुस्लिम महिलाओं ने जताया समर्थन

भोपाल
 मध्य प्रदेश में मंत्रिपरिषद ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक के प्रारूप को स्वीकृति दी। यूसीसी में यह प्रविधान किया गया है तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए हलाला जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।

इसे लेकर डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महिलाओं का सम्मान हमारे लिए सबसे पहले है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया को बताया कि राम हो या रहीम, सबके लिए एक विवाह-एक कानून अब मध्य प्रदेश में लागू होगा।

किसी को भी धर्म के आधार पर बहुविवाह की छूट नहीं मिलेगी। केवल तलाक कहने या अनौपचारिक पंचायत के निर्णय के आधार पर विवाह विच्छेद गैरकानूनी होगा। विवाह का समापन केवल कानून में बताए गए आधारों पर ही होगा।

लिव-इन को लेकर नए नियम
विधेयक में लिव-इन संबंध व विवाह को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रविधान प्रस्तावित किए गए हैं। मध्य प्रदेश में लिव-इन संबंध का पंजीयन करवाना अनिवार्य होगा। जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक माह के भीतर रजिस्ट्रार के पास लिव-इन संबंध की जानकारी देना कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा।

बिना पंजीयन लिव-इन में रहना अवैध होगा। ऐसे में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। इसके लिए पार्टनरों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन संबंध शुरू और खत्म होने की जानकारी उसके माता-पिता/अभिभावकों को भेजी जाएगी।

रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस थाने को भी भेजेगा। विवाहित व्यक्ति के लिव-इन में रहने पर पांच वर्ष की सजा का प्रविधान किया गया है। लिव-इन संबंधों से पैदा हुए बच्चे को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। विधेयक 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।

बता दें, विधेयक विधानसभा से पारित होने पर राज्यपाल की अनुमति से राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। उनकी अनुमति के बाद लागू होगा। बता दें, उत्तराखंड में यूसीसी लागू हो चुका है। गुजरात और असम में विधेयक पारित हो चुका है। इस तरह यूसीसी को कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ने वाला मध्य प्रदेश देश का चौथा राज्य है।

विवाह का पंजीयन सबके लिए अनिवार्य
यूसीसी के तहत विवाह का पंजीयन सबके लिए अनिवार्य होगा। संतान के आगे 'अवैध' जैसा शब्द नहीं होगा। विवाहित या अविवाहित माता-पिता के बच्चों, जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या एआरटी (असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलाजी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा होगा।

उत्तराधिकार कानून सभी के लिए समान होंगे। महिला या पुरुष का अधिकार कभी कम-ज्यादा नहीं बल्कि बराबर रहेगा। परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से आदिवासियों पर यह कानून लागू नहीं होगा। घुमंतु, अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासियों को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।

UCC के पक्ष में 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं
मध्य प्रदेश के हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हों या फिर अन्य वर्गों के लोग, सभी ने यूसीसी का समर्थन किया है। 80 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने समान कानून की बात कही। जबकि, 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने भी कहा कि यदि इससे हमारी बहन-बेटियां सुरक्षित होती हैं तो फिर यह हमारे लिए लागू होना चाहिए।

दरअसल, यूसीसी लागू करने के लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। इसने सभी जिलों में जन परामर्श किया, जिसमें 1,134 सुझाव मिले। सुझाव देने वाली 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं और 40 प्रतिशत पुरुष इसके समर्थन में हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments