Thursday, September 10, 2026
Google search engine
Homeअध्यात्मरणवीर सिंह ने मैसूर के चामुंडेश्वरी मंदिर में किए दर्शन, पूजा के...

रणवीर सिंह ने मैसूर के चामुंडेश्वरी मंदिर में किए दर्शन, पूजा के बाद चर्चा में आए

 बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह बीते मंगलवार (26 मार्च) को सुबह सुबह मैसूर में स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचे थे. जहां उन्होंने देवी चामुंडेश्वरी के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. खास बात यह थी कि माता के दर्शन उन्होंने आम भक्तों की तरह ही किए.

दरअसल, रणवीर सिंह इन दिनों कई विवादों और सुर्खियों से घिरे हुए हैं. फिल्म डॉन 3 को लेकर उनका फरहान अख्तर के साथ विवाद भी सामने आया है. इसी के बाद फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने उनके खिलाफ बैन लगाने का फैसला किया, जिससे मामला और गरमा गया.

वहीं, दूसरी ओर फिल्म कांतारा से जुड़ा मिमिक्री मामला उन्हें चर्चा में दोबारा लाया, जिसके चलते वह मैसूर के चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचे और देवी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया. चलिए अब जानते हैं मैसूर के चामुंडेश्वरी मंदिर की मान्यता.

चामुंडेश्वरी मंदिर का महत्व
कर्नाटक के मैसूर शहर के चामुंडी हिल्स पर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर देवी दुर्गा के उग्र रूप मां चामुंडेश्वरी को समर्पित है. यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि मैसूर की पहचान भी माना जाता है. यह दक्षिण भारत के प्रमुख शक्ति स्थलों में से एक है जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी चामुंडी पहाड़ी पर देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था. इसी कारण देवी को महिषासुर मर्दिनी कहा जाता है. मंदिर के पास आज भी महिषासुर की विशाल प्रतिमा इस कथा की याद दिलाती है.

शक्तिपीठ है चामुंडेश्वरी मंदिर
चामुंडेश्वरी मंदिर 18 प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है. यह मंदिर मैसूर शहर से लगभग 13 किमी दूर चामुंडी पहाड़ियों की चोटी पर स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती के केश (बाल) गिरे थे, जिससे यह स्थान अत्यंत पवित्र बन गया. इसी वजह से यहां की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है और भक्त दूर-दूर से आकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं.

कहा जाता है कि भक्तों के बीच यह गहरी आस्था है कि मां चामुंडेश्वरी सच्चे मन से की गई प्रार्थना को अवश्य स्वीकार करती हैं. करियर में सफलता, विवाह, व्यापार और पारिवारिक सुख के लिए लोग यहां विशेष रूप से दर्शन करने आते हैं. कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद यहां दुबारा आकर धन्यवाद स्वरूप पूजा भी करते हैं.

मंदिर का इतिहास
कहा जाता है कि मंदिर का मूल निर्माण लगभग 12वीं शताब्दी में हुआ था, जिसे बाद में विजयनगर साम्राज्य और मैसूर के वोडेयार राजाओं ने इसको पूरा करवाया. चामुंडादेश्वरी मंदिर द्रविड़ स्थापत्य शैली से बना है और इसका ऊंचा गोपुरम दूर से ही आकर्षित करता है. मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 1000 सीढ़ियां हैं, जिन्हें श्रद्धालु भक्ति भाव से चढ़ते हैं. रास्ते में स्थित विशाल नंदी की प्रतिमा भी यहां का प्रमुख आकर्षण है. पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां से पूरे मैसूर शहर का सुंदर नजारा देखने को मिलता है.

इसके अलावा, मैसूर का प्रसिद्ध दशहरा उत्सव भी इस मंदिर से संबंधित है. पुराने समय में राजाओं के वक्त दशहरा शुरू होने से पहले यहां विशेष पूजा की जाती थी. आज भी यह परंपरा जारी है और नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष सजावट और पूजा-अर्चना होती है, जिससे इस मंदिर का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments