चंडीगढ़
पंजाब के सरकारी मुलाजिमों और पेंशनरों के बकाया DA मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट आज (6 अक्टूबर) फिर सुनवाई करेगा। पंजाब के चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा आज भी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होंगे। उन्हें कोर्ट ने समन किया है।
सोमवार (5 अक्टूबर) को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के मामले में तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रही है।
कोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट जाना आपका अधिकार है, लेकिन ट्वीट कर फैसले को चुनौती देंगे तो हम इसकी तारीफ नहीं करेंगे। सरकार खुद के लिए कड़ी कार्रवाई की स्थिति पैदा कर रही है। अब बहुत हो चुका, अब और लुका-छिपी नहीं चल सकती।
बता दें कि 3 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों को IAS, IPS और IFS अधिकारियों के बराबर लंबित DA/DR देने को कहा था। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि बकाया देने तक सरकार बड़े स्तर पर एडवरटाइजमेंट जैसे खर्च भी बंद करे।
पहले जानिए कि मुख्य विवाद क्या है?
पंजाब के मुलाजिम और पेंशनर्स मांग कर रहे हैं कि उन्हें छठे पंजाब पे कमीशन के अनुसार DA केंद्र सरकार के पैटर्न पर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि राज्य का टैक्स राजस्व बढ़ा है, इसलिए सरकार को ₹14,200 करोड़ का बकाया एरियर तुरंत ब्याज समेत देना चाहिए।
इस पर पंजाब सरकार का तर्क है कि 2021 के पे-रूल्स में कोई निश्चित केंद्रीय दर अनिवार्य नहीं है। इतनी बड़ी रकम अचानक जारी करने से राज्य का वित्तीय ढांचा प्रभावित होगा और वह पहले से ही कर्मचारियों को कई केंद्रीय श्रेणियों से ज्यादा वेतन दे रही है।
अब विवाद की पूरी टाइमलाइन पढ़िए
8 अप्रैल 2026 (सिंगल बेंच का फैसला): हाई कोर्ट के सिंगल जज की बेंच ने पंजाब सरकार को आदेश दिया कि वह अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को केंद्रीय पैटर्न के अनुसार उसी दर पर DA/DR जारी करे, जिस दर पर पंजाब में तैनात IAS, IPS अधिकारियों को दिया जाता है। कोर्ट ने इसके लिए 30 जून 2026 तक की डेडलाइन तय की थी।
3 अगस्त 2026 (हाई कोर्ट की डबल बेंच का सख्त आदेश): पंजाब सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील दायर की। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील खारिज कर दी और आदेश दिया कि 15 दिनों के भीतर सभी लंबित किस्तों का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने यह भी शर्त रखी कि देरी होने पर 6% सालाना साधारण ब्याज देना होगा और जब तक भुगतान नहीं होता, सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर विज्ञापनों जैसे गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाए।
17 अगस्त 2026 (हाई कोर्ट की डेडलाइन खत्म): हाई कोर्ट की ओर से दी गई 15 दिनों की डेडलाइन समाप्त हो गई, लेकिन सरकार ने भुगतान नहीं किया। इसके विरोध में पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन और अन्य संगठनों ने हड़ताल की चेतावनी दी।
27 अगस्त 2026 (कर्मचारियों की महा-हड़ताल और सरकार का एक्शन): लंबित DA, एरियर और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर कर्मचारियों ने राज्यव्यापी सामूहिक हड़ताल की। जवाब में भगवंत मान सरकार ने नो वर्क, नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का नियम लागू कर कर्मचारियों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर दिए।
1 सितंबर 2026 (सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट): पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की। सरकार ने तर्क दिया कि इतनी बड़ी रकम का एक साथ भुगतान करना वित्तीय और संवैधानिक रूप से संभव नहीं है।
8 से 9 सितंबर 2026 (पेन-डाउन स्ट्राइक और सरकार का झुकना): शो-कॉज नोटिस के विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करते हुए पेन-डाउन स्ट्राइक शुरू कर दी और सामूहिक छुट्टी पर चले गए। चौतरफा दबाव के बाद, 9 सितंबर को सरकार ने सभी कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस वापस ले लिए, जिसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल स्थगित की।
11 सितंबर 2026 (हाई कोर्ट का अल्टीमेटम): सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पंजाब सरकार की याचिका (SLP) में 9 तकनीकी आपत्तियां निकाली थीं। हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को इन आपत्तियों को दूर करने और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू करवाने के लिए 10 दिन का समय दिया।
18 से 27 सितंबर 2026 (8% डीए बढ़ोतरी का ऐलान): मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी यूनियनों के बीच एक अहम बैठक हुई। गतिरोध को कम करने के लिए सरकार ने अंतरिम राहत के रूप में 8% डीए बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी किया। इससे राज्य में DA 42% से बढ़कर 50% हो गया। हालांकि, पुराने बकाए का मुद्दा अभी भी जस का तस बना रहा।
5 अक्टूबर 2026 (मुख्य सचिव की पेशी और हाई कोर्ट की फटकार): मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा हाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। सरकार ने हलफनामा देकर कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस पर हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की अपील के स्टेटस को लेकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रही है और कोर्ट को गुमराह कर रही है। कोर्ट ने नोट किया कि 1 सितंबर को याचिका दायर होने के बावजूद तकनीकी आपत्तियां अभी तक दूर नहीं की गई हैं। ऐसा लग रहा है कि सरकार सिर्फ समय बिताने की कोशिश कर रही है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से खुद स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।




