Wednesday, September 16, 2026
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यमुनानगर धान घोटाला: SIT बनी, जांच आगे नहीं बढ़ी; 30 संदिग्धों पर कार्रवाई का इंतजार

यमुना नगर.

70 करोड़ रुपये के धान घोटाले के खुलासे के बाद 237 दिन बीत चुके हैं, पर जांच अभी भी धीमी गति से चल रही है। पांच थाना प्रभारियों की एसआइटी गठित होने के बावजूद कार्रवाई तीन आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित है।

जांच के दौरान 30 से ज्यादा अधिकारी, कर्मचारी व अन्य लोगों के नाम सामने आ चुके हैं, पर अभी भी कई आरोपित पकड़ से बाहर हैं। घोटाले के मुख्य आरोपित छछरौली निवासी राइस मिलर संदीप सिंगला को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई 27 जुलाई को होगी। गिरफ्तारी नहीं होने से जांच टीम पर भी सवाल उठने लगे हैं। संदीप सिंगला को दो दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसे तीन चरणों में 18 दिन तक एसआइटी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। पूछताछ में सामने आया था कि उसके नियंत्रण में सात राइस मिलें हैं, जिनमें पांच पुरानी व दो नई हैं।

पुलिस ने संदीप सिंगला व रीतिका सिंगला के खिलाफ तीन थानों में केस दर्ज किए थे। पावर आफ अटार्नी संदीप के नाम होने के कारण रितिका को राहत मिल गई थी। पूछताछ में 30 से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। जांच प्रभावित न हो। इसलिए पुलिस ने नाम सार्वजनिक नहीं किए। नाम होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है।

महानिदेशक की जांच में घोटाले का खुलासा
जांच में सामने आई गड़बड़ियों के बाद मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण, मंडी गेट पास, मिल आवंटन, स्टाक सत्यापन व सरकारी रिकार्ड की जांच की थी। आरोप है कि नियमों के विपरीत कम धान की खरीद दिखाकर स्टाक में हेराफेरी की गई और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। 13 नवंबर को खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह की जांच में घोटाले का खुलासा हुआ था। जांच में धान के स्टाक और रिकार्ड में भारी अनियमितताएं सामने आने के बाद विशेष जांच दल का गठन किया गया था। इसमें पांच थाना प्रभारी शामिल किए गए थे, पर इसके बाद भी जांच की रफ्तार तेज नहीं हो सकी।

मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां
जांच में फर्जी गेट पास व दस्तावेजों के माध्यम से स्टाक में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई थी। जांच के दौरान 30 से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के नाम सामने आए थे, लेकिन पुलिस ने इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए। अब तक मामले में तीन ही गिरफ्तारियां हुई हैं। संदीप सिंगला के अलावा एसआइटी द्वारा हैफेड के सीनियर मैनेजर शैलेंद्र कुमार व परचेज मैनेजर अनिल कुमार को गिरफ्तार किया था।

बर्खास्तगी के आगे नहीं बढ़ा जांच दायरा
प्रशासनिक स्तर पर इंस्पेक्टर मनोज यादव, सविता, विनोद कुमार व एएफएसओ देवेंद्र कुमार को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। बावजूद इसके जांच अभी उन्हीं बिंदुओं तक सीमित है। कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं। प्रतापनगर में एक ही परिसर में चार लाइसेंस जारी होने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नियमानुसार एक स्थान पर एक लाइसेंस दिया जा सकता है, जबकि वहां एक से अधिक लाइसेंस संचालित पाए गए। अदालत ने हैफेड व खाद्य आपूर्ति विभाग को तीन माह में एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे, पर समय सीमा बीत चुकी है। कोर्ट ने कहा था कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल औपचारिक रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होगी। रणजीतपुर में एक ही स्थान पर दो राइस मिल चल रही थी।

हैफेड व खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से मिल में धान भेजा गया था। घोटाले के बाद बचे धान पर दोनों विभागों ने अपना दावा किया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर दोनों विभागों को 50-50 प्रतिशत धान उठाने की अनुमति दी थी। हैफेड ने अपना हिस्सा उठा लिया, पर डीएफएससी की ओर से धान उठाने में देरी की। जिस कारण काफी धान खराब भी हुआ। वहीं जगाधरी डीएसपी राजीव मिगलानी का कहना है कि इस मामले में जांच जारी है, इसमें अभी कुछ नया सामने नहीं आया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई निश्चित तौर पर होगी।

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