Friday, October 16, 2026
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मां कालरात्रि की पूजा से दूर होंगे कष्ट! जानें सप्तमी का शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, फूल और आरती

नवरात्रि का सातवां दिन: नवरात्रि का सातवां दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप को समर्पित है। नवरात्रि के सातवें दिन को 'सप्तमी' भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों के जीवन में कष्टों, बाधाओं से मुक्ति और खुशियों का संचार करती हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से देवी कालरात्रि की उपासना करने से मनुष्य को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है। वो सभी सुखों को प्राप्त करता है।
नवरात्रि की सप्तमी कब है?

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का सप्तमी व्रत 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा। पंडित जी कहते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मुश्किल समय में मां कालरात्रि का ध्यान लगाने और स्मरण करने से जातक को मानसिक शांति और साहस मिलता है। यही कारण है कि मां को 'शुभंकरी' भी कहा जाता है। कहा जाता है कि मां का स्वरूप भले ही अत्यंत भयानक और विकराल है लेकिन वह अपने भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं और शुभ फलों को प्रदान करती हैं।

17 अक्टूबर को मां कालरात्रि के पूजन के शुभ मुहूर्त:
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:59 बजे से सुबह 05:47 बजे तक

अपराह्न (शाम) का पूजा मुहूर्त: दोपहर 03:54 बजे से शाम 06:14 बजे तक।

मां कालरात्रि की पूजा विधि:
1. मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए नवरात्रि के सातवें दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. अब पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और गंगाजल से शुद्ध करें।

3. मां कालरात्रि की प्रतिमा या फोटो को स्थापित करें।

4. अब मां को रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें।

5. मां की आरती उतारें और उनके मंत्रों का यथाशक्ति जाप करें।

मां कालरात्रि के प्रिय मंत्र:
मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा में उनके प्रिय मंत्रों का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

सामान्य मंत्र: ॐ कालरात्र्यै नम:

बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:

देवी मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
प्रार्थना या स्तुति मंत्र:

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

नवर
नवरात्रि के सातवें दिन का शुभ रंग और फूल:

नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि में नीले रंग के वस्त्र पहनने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां कालरात्रि की पूजा में रात में खिलने वाली चमेली और नीले या गुड़हल के फूल अर्पित किए जाते हैं।

मां कालरात्रि का प्रिय भोग:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें (जैसे गुड़ का हलवा, गुड़ की खीर या मालपुआ) अत्यंत प्रिय हैं। मान्यता है कि मां को गुड़ से बनी चीजों को अर्पित करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और व्यक्ति की कुंडली में राहु दोष शांत होता है।

मां कालरात्रि की कथा:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में अपना आतंक मचाना शुरू किया तो सभी देवी-देवतागण परेशान हो गए। सभी समस्या का समाधान पूछने के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे। तब भगवान शिव ने मां पार्वती से राक्षसों का वध करके अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए कहा। भगवान शिव का आदेश पाने के बाद मां पार्वती ने मां दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध किया। लेकिन जैसे ही मां दुर्गा ने रक्तबीज का वध किया तो उसके रक्त की बूंदों से हजारों-लाखों रक्तबीज उत्पन्न हो गए। तब मां दुर्गा ने मां कालरात्रि का रूप धारण किया और रक्तबीज का वध किया और उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को अपने मुख में भर लिया।
मां कालरात्रि की आरती:

कालरात्रि जय जय महाकाली।

काल के मुंह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।

महाचंडी तेरा अवतारा॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।

महाकाली है तेरा पसारा॥

खड्ग खप्पर रखने वाली।

दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।

सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।

गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा।

कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे ना बीमारी।

ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवे।

महाकाली मां जिसे बचावे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।

कालरात्रि मां तेरी जय॥

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