Sunday, June 7, 2026
Google search engine
Homeविदेशकुवैत-बहरीन हमलों के बाद अमेरिका सख्त, ईरानी संपत्तियों के इस्तेमाल की तैयारी

कुवैत-बहरीन हमलों के बाद अमेरिका सख्त, ईरानी संपत्तियों के इस्तेमाल की तैयारी

नई दिल्ली
 अमेरिकी प्रशासन ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों से हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए ईरानी संपत्तियों को खाड़ी देशों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों को हुए नुकसान की लागत का आकलन करने के लिए टीम को निर्देश दिया है। इसके साथ ही वाशिंगटन भविष्य में इस संघर्ष से होने वाले किसी भी विनाश की मरम्मत के लिए भी ईरानी संपत्तियों के उपयोग पर विचार कर रहा है।

$24 बिलियन की रिहाई पर अटका शांति समझौता
यह घोषणा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजई के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संभावित शांति समझौता अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई 24 बिलियन डॉलर की ईरानी संपत्ति की रिहाई पर निर्भर करता है।

शुक्रवार को सीएनएन से बात करते हुए रेजई ने इस राशि की रिहाई को विश्वास की अहम परीक्षा और किसी भी व्यापक समझौते की दिशा में एक जरूरी कदम बताया था।

इस नए घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से ही नाजुक संघर्ष विराम प्रयासों के और उलझने का खतरा पैदा कर दिया है। एक अंतरिम समझौते को सुरक्षित करने के चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद वीकेंड में फिर से लड़ाई भड़क उठी है।

सैन्य तनाव में वृद्धि और ईरानी ठिकानों पर हमला
इस बीच पूरे क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, समुद्री यातायात के लिए खतरा बने ड्रोनों को इंटरसेप्ट करने के बाद अमेरिकी बलों ने शनिवार तड़के होर्मुज में गोरुक और केशम द्वीप पर ईरानी तटीय रडार प्रतिष्ठानों पर हमला किया। अमेरिकी सेना ने रणनीतिक जलमार्ग के पास दो और ईरानी हमलावर ड्रोनों को मार गिराने का भी दावा किया है।

इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। कुवैती अधिकारियों ने बताया कि सात बैलिस्टिक मिसाइलें रिहायशी इलाकों के ऊपर से गुजरीं, जिससे संपत्ति का नुकसान हुआ लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई।

वहीं बहरीन में सायरन बजने के बाद निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि मिसाइलों ने दोनों देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिकी सेना ने कहा कि छह मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया और सातवीं अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रही।

क्या है ईरान की मांगें?
अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है ताकि एक ऐसा अंतरिम समझौता हो सके जो शत्रुता को रोक दे और परमाणु कार्यक्रम जैसे विवादित मुद्दों पर भविष्य की बातचीत का रास्ता खोले। हालांकि, अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है।

तेहरान अपनी तेल आय के अरबों डॉलर तक पहुंच, कच्चे तेल के निर्यात पर प्रतिबंधों से राहत, बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अधिक नियंत्रण की मांग कर रहा है।

इसी बीच मध्यस्थता के प्रयासों के तहत, पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान पहुंचे। ईरानी मीडिया के अनुसार, वे पाकिस्तान के सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री का अयातुल्ला खामेनेई के लिए एक 'विशेष पत्र' लेकर गए हैं। नकवी की ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची सहित कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत करने की उम्मीद है।

ईरान की क्षमता पर राष्ट्रपति ट्रंप का बयान
यह संघर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर भी दबाव बढ़ा रहा है, जिन्हें ईंधन की बढ़ती कीमतों और युद्ध के कारण होने वाले व्यापक आर्थिक व्यवधानों पर घरेलू आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

एनबीसी न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी ऑपरेशनों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को काफी हद तक कम कर दिया है, लेकिन उन्होंने माना कि तेहरान के पास अभी भी एक बड़ा शस्त्रागार मौजूद है।

ट्रंप ने कहा, "उनके पास कुछ मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं। प्रतिशत के हिसाब से मैं कहूंगा कि शायद उनकी मिसाइलों का 21% से 22% हिस्सा। यह बहुत सारी मिसाइलें हैं, लेकिन जब हमने पहली बार हमला किया था, तब के मुकाबले यह बहुत कम है।"

लेबनान में तनाव
दक्षिणी लेबनान में एक सैन्य वाहन पर हुए इजरायली हमले में दो सैन्य अधिकारियों और एक सैनिक की मौत हो गई। इजरायली सेना इस घटना की जांच कर रही है।

ईरान ने वाशिंगटन के साथ किसी भी व्यापक समझौते को लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आंदोलन के बीच संघर्ष विराम से जोड़ दिया है। हालांकि, इजरायल ने साफ किया है कि उसका सैन्य अभियान जारी रहेगा।

यह जटिल क्षेत्रीय विवाद शांति प्रयासों को और उलझा रहा है। बातचीत रुकी हुई है और युद्ध को तीन महीने पूरे हो चुके हैं, ऐसे में किसी स्थायी समझौते की उम्मीदें फिलहाल अनिश्चित बनी हुई हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments