Thursday, June 18, 2026
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सदाबहार आम की अनोखी किस्म से सहारनपुर में बढ़ी बागवानी की चर्चा

सहारनपुर
 मीठे-मीठे आमों का सीजन चल रहा है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला पूरे देश में आम की बेहतरीन किस्मों के लिए मशहूर है। इस बार यहां आम की एक ऐसी अनोखी वैरायटी हुई है, जो हर तरफ चर्चा में है। आमतौर पर आम के पेड़ पर साल में एक बार बौर आती है और फिर निश्चित समय पर फल तैयार होते हैं। लेकिन, इस वैरायटी की खासियत यह है कि ये केवल मौसम विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल फल देने की क्षमता रखता है। आम की इस दुर्लभ किस्म को 'सदाबहार' नाम दिया गया है।

सदाबहार 'आम' के पेड़ की सबसे खास बात यह है कि इसके ऊपर एक साथ बौर, छोटे फल और पकने के लिए तैयार आम दिखाई देते हैं। यानी पेड़ पर हर समय किसी न किसी अवस्था में फल मौजूद रहता है। यही वजह है कि इसे देखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग सहारनपुर पहुंच रहे हैं। खासकर वो लोग, जिन्होंने आम के बड़े-बड़े बाग लगा रखे हैं।

नई बोर के साथ छोटे फल और पके फल
आम की अनोखी किस्म को संरक्षित और विकसित करने का काम कर रहे किसान राजेंद्र अटल बताते हैं कि उनके पास कई दुर्लभ और विशेष पौधों का संरक्षण किया जा रहा है। सदाबहार आम का यह पेड़ अब अपने तीसरे साल में प्रवेश कर चुका है और लगातार बेहतर फल दे रहा है। पिछले साल भी इस पेड़ ने सालभर फल दिए थे और इस समय भी नई बौर के साथ छोटे और पकने के लिए तैयार फल एक साथ मौजूद हैं।

दूसरे आम से कितना अलग है सदाबहार
राजेंद्र अटल बताते हैं कि इस किस्म की एक और विशेषता इसका आकार है। अन्य आम के पेड़ों के मुकाबले यह छोटा रहता है, जिससे इसकी देखभाल और फल तोड़ने का काम आसान हो जाता है। साइज में छोटा होने के बावजूद इसकी उत्पादकता काफी अच्छी मानी जाती है। ये आम बेहद मीठे और खुशबूदार होते हैं। यही कारण है कि एक बार इसका स्वाद चखने वाले लोग इसकी तारीफ किए बिना नहीं रहते।

जैविक तरीके से उगाया जाता है सदाबहार आम
एक और खास बात यह भी है कि इस वैरायटी की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जा रही है। राजेंद्र अटल बताते हैं कि इसके उत्पादन में किसी प्रकार की रासायनिक खाद या केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्राकृतिक तरीकों से तैयार होने के बावजूद यह पेड़ लगातार फल देने में सक्षम है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग बनाता है। फिलहाल राजेंद्र अटल के पास सदाबहार आम के करीब 20 पेड़ हैं। साथ ही कलम विधि के जरिए नए पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं।

 

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