Wednesday, July 29, 2026
Google search engine
HomeदेशTrump Tariff News: भारत पर 100% टैरिफ लगाने की चर्चा से मचा...

Trump Tariff News: भारत पर 100% टैरिफ लगाने की चर्चा से मचा हड़कंप, चीन भी टेंशन में

नईदिल्ली 
भारत और चीन के ऊपर 100% ट्रंप टैरिफ (Trump 100% Tariff) का खतरा मंडरा रहा है. दरअसल, अमेरिकी सीनेट में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक पर वोटिंग शुरू होने वाली है. खासतौर पर रूस को टारगेट करने वाले व्यापक प्रतिबंध विधेयक पर मतदान की तैयारी पूरी कर ली गई है और इसका भारत, चीन जैसे देशों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है, जो रूसी कच्चे तेल के दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। 

ट्रंप को 100% टैरिफ लगाने का अधिकार
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सीनेट में जिस विधेयक पर वोटिंग होने जा रही है, उसका उद्देश्य रूस पर प्रतिबंध लगाकर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर भी 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देना है, जो  बड़ी मात्रा में रूसी तेल (Russian Oil) और गैस (Russian Gas) खरीदना जारी रखे हुए हैं.  यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण को लेकर उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। 

अमेरिकी सीनेट में रूसी बैन से जुड़े विधेयक पर वोटिंग ठीक उसी दिन होगी, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार के दिन कैपिटल हिल का दौरा करेंगे. इस विधेयक को दिवंगत ग्राहम को श्रद्धांजलि के रूप में पेश किया जा रहा है। 

इस विधेयक का उद्देश्य क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्तावित कानून का नाम बदलकर अब 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' कर दिया गया है. यह न केवल रूस के एनर्जी रेवेन्यू को टारगेट करेगा, बल्कि ईरान से संबंधित अमेरिकी कदमों का भी विस्तार करेगा. इस विधेयक का प्रमुख उद्देश्य रूस को यूक्रेन के साथ युद्ध में उपलब्ध होने वाले धन में कमी लाना है. इसके साथ ही ईरान की परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की क्षमता को भी सीमित करना है। 

हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव पर कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने चिंता जताई है. आलोचकों का तर्क है कि यह उपाय राष्ट्रपति को व्यापक नई टैरिफ शक्तियां देते हैं, जो अमेरिकी सहयोगियों को भी प्रभावित कर सकती हैं और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ा सकती हैं। 

भारत के लिए क्यों बड़ी चिंता? 
अमेरिका का ये विधेयक भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि 2022 में यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) शुरू होने के बाद से देश में रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में तेज बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में US में प्रस्तावित कानून लागू होता है, तो फिर भारत पर टैरिफ का बम फूटने का खतरा है। 

गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में आए बदलावों के बाद से भारत रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक के रूप में उभरा है. रूसी तेल ने भारतीय रिफाइनरियों को रियायती कीमत पर कच्चा तेल दिया है, जिससे तमाम चुनौतियों के बीच भी देश में ईंधन की आपूर्ति में सहायता मिली है और रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार हुआ है। 

अगर प्रस्तावित कानून अंततः लागू हो जाता है और टैरिफ लगाए जाते हैं, तो इससे रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार में बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है. इसके साथ ही India-US Trade Deal पर बातचीत में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। 

भारत-China रूसी तेल की बड़े खरीदार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बता दें कि चीन करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल की खरीदारी करता है, जबकि भारतीय आयात करी 17 लाख बैरल डेली का है. इस हिसाब से India-China दोनों ही देश सबसे बड़ी रूसी तेल खरीदार बने हुए हैं और यही कारण है कि Trump Tariff के खतरे में ये दोनों देश आगे हैं।  

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments