Monday, July 27, 2026
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टैरिफ बम से बढ़ी ट्रंप की टेंशन, आयात हुआ सस्ता और कमजोर

नई दिल्ली
डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के टैरिफ ने दुनियाभर के निर्यातकों और खुद अमेरिका पर कैसे-कितना असर डाला, इस बारे में अंतरराष्ट्री मुद्रा कोष के अर्थशास्त्रियों ने एक रिसर्च पेपर में विस्तार से बताया है और इसमें जो निष्कर्ष सामने आए हैं, वो ट्रंप की टेंशन बढ़ाने वाले हैं. Trump Tariff को आईना दिखाने वाले आईएमएफ के इस पेपर में कहा गया है कि ग्लोबल टैरिफ से निर्यात की कीमतों में तो कोई खास कमी नहीं आई, बल्कि खुद अमेरिका का आयात लो-क्वालिटी हो गया.  

ट्रंप टैरिफ से US को क्या लाभ?
IMF के एक शोध पत्र के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अप्रैल 2025 में पहली बार दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ बम फोड़ा गया था. लेकिन उन्होंने अपनी जिस टैरिफ नीति के हिस्से के रूप में हाई रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया थी, उसका उल्टा असर देखने को मिला है. अर्थशास्त्रियों ने रिसर्च पेपर में कहा कि इससे अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सामानों की कीमत में कमी लाने में कोई खास सफलता नहीं मिली, बल्कि अमेरिकी आयात उच्च क्वालिटी के बजाय सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले सामानों की ओर बढ़ गया.

विदेशी निर्यातकों ने स्थिर रखी कीमतें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के इस वर्किंग पेपर में साफ किया गया है कि ट्रंप टैरिफ के जरिए भी विदेशी निर्यातकों को काफी हद तक अपनी कीमतें कम करने के लिए मजबूर नहीं कर सके. शोधपत्र में पाया गया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क का बड़ा हिस्सा आयात कीमतों में जुड़ गया, जिससे निर्यातकों को अतिरिक्त लागत का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा ही वहन करना पड़ा. विदेशी आपूर्तिकर्ताओं ने प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए शुल्क लागू होने से पहले की कीमतों को कम करने के बजाय, अपनी कीमतों को लगभग स्थिर रखा, जिससे अमेरिकी आयातकों को कम लागत वाले विकल्पों की तलाश करना पड़ा.

अमेरिकी आयात का मूल्य क्यों घटा?
रिसर्च पेपर में सामने आया है कि अमेरिका के कुल आयात मूल्य में गिरावट टैरिफ अटैक के बीच निर्यातकों द्वारा दी गई छूटों के कारण नहीं, बल्कि आयात के कम कीमत वाले आपूर्तिकर्ताओं और उत्पादों की ओर ट्रांसफर होने के चलते देखने को मिली है. अर्थशास्त्रियों ने आगे कहा कि ये पैटर्न बिल्कुल वैसा ही है, जैसा कि 2018-19 के अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद (US-China Tariff Tension) के दौरान देखा गया था.

अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी सीमा शुल्क डेटा का उपयोग करते हुए 2025 में लागू टैरिफ में बढ़ोतरी के असर का अध्ययन किया. इसमें पाया गया कि टैरिफ के चलते अमेरिका में आयातकों को निम्न गुणवत्ता वाले आयात की ओर रुख करना पड़ा. ये कंपनियों की उत्पादकता पर निगेटिव प्रभाव डालने वाले हैं, जबकि अमेरिकी उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता में कमी का सामना करना पड़ा है, भले ही औसत आयात मूल्य कम नजर आ रहा हो.

रिसर्च के नतीजे क्या कहते हैं?
IMF Paper में रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि Trump Tariff ने विदेशी निर्यातकों से कीमतों में पर्याप्त छूट पाने के बजाय अमेरिकी आयात की संरचना को बदलने का काम किया है. जैसे-जैसे आयातकों ने अधिक कीमत वाले आपूर्तिकर्ताओं से हटकर अन्य स्रोतों से आयात का अहमियत देना और इंपोर्ट करना शुरू किया, औसत आयात कीमतों में आई गिरावट तुलनात्मक रूप से प्रोडक्ट प्राइस के बजाय आयात बास्केट में बदलाव के रूप में नजर आई. यह रिसर्च पेपर आईएमएफ के अर्थशास्त्रियों जेबीन आन, लोरेंजो रोटुनो और मिशेल रूटा द्वारा तैयार किया गया है.

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