Monday, June 15, 2026
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राज्य स्तरीय बैंकर्स उप समिति की बैठक संपन्न- अनावश्यक रूप से आवेदन लंबित रखने पर होगी कार्रवाई

रायपुर

छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक तेजी से पहुंचाने के लिए शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) में वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स उप समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जनहित की योजनाओं से जुड़े ऋण (लोन) और अनुदान (सब्सिडी) के मामलों को बैंकर्स बिना किसी देरी के जल्द से जल्द स्वीकृत करें।

प्रमुख योजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा        

 बैठक में मुख्य रूप से महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों के बैंक लिंकेज को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, विभिन्न केंद्रीय व राज्य स्तरीय योजनाओं के तहत 31 मार्च तक बैंकों द्वारा दिए गए लोन और वित्तीय सहायता के मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें  प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, अंत्योदय स्वरोजगार योजना सहित अन्य योजनाओं के 31 मार्च तक के हितग्राहियों को बैंकों द्वारा प्रदत्त लोन एवं अन्य वित्तीय सहायता के प्रकरणों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।

अनावश्यक रूप से पेंडिंग न रखें फाइलें- विशेष सचिव
        

विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा ने बैंक प्रतिनिधियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत आने वाले हितग्राहियों के आवेदनों को बेवजह लंबित न रखा जाए। फाइलों के त्वरित निपटारे के लिए उन्होंने बैंकर्स को एक व्यावहारिक व्यवस्था बनाने को कहा है।

लोन के लिए हर हफ्ते तय हो एक दिन
      
बैंकर्स से कहा गया है कि वे स्वरोजगार और अन्य योजनाओं के हितग्राहियों के ऋण प्रकरणों के निराकरण के लिए प्रति सप्ताह एक निर्धारित दिन (फिक्स डे) तय करें, ताकि उसी दिन सभी आवेदनों की जांच कर उनका तत्काल निपटारा किया जा सके।
       
इस उच्च स्तरीय बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और विभिन्न राष्ट्रीयकृत व क्षेत्रीय बैंकों के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। शासन की इस पहल से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आम नागरिकों और ग्रामीण उद्यमियों को बैंकों से ऋण मिलने की प्रक्रिया बेहद सुगम और पारदर्शी हो जाएगी।

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