Tuesday, July 28, 2026
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बिल के विरोध में साथ आए स्टालिन और विजय थलापति, DMK-TVK की रणनीति ने बढ़ाई सियासी हलचल

चेन्नई

संसद के मॉनसून सत्र से पहले तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सत्ताधारी पार्टी टीवीके ने इस मुद्दे पर हाथ मिला लिया है और दोनों दलों ने बिल का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है।

भले ही केंद्र सरकार के 20 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र के एजेंडे में फिलहाल 'परिसीमन पैकेज' शामिल नहीं है, लेकिन तमिलनाडु में इसके खिलाफ लामबंदी शुरू हो गई है। राज्य की प्रमुख पार्टी डीएमके और सत्ताधारी दल तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने साफ कर दिया है कि अगर संसद में परिसीमन लागू करने से जुड़ा कोई भी बिल लाया जाता है, तो उसका कड़ा विरोध किया जाएगा।

केंद्र ने राज्यों के अधिकार छीने तो करेंगे विरोध: डीएमके
डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अगर केंद्र की बीजेपी सरकार राज्यों के अधिकारों का हनन करने वाला या संविधान के खिलाफ कोई नया कानून लाती है, तो पार्टी उसके खिलाफ खड़ी होगी। उन्होंने बताया कि बीजेपी की ओर से इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के संकेत दिए गए हैं, लेकिन पार्टी किसी भी अंतिम फैसले से पहले पूरी जानकारी मिलने का इंतजार करेगी। अन्नादुरई ने कहा, "अगर पिछली बार की तरह बिल पास किया गया, तो इसमें हमारा ही नुकसान है।"

स्टालिन ने सांसदों को दिए कड़े निर्देश
इससे पहले 16 जुलाई को डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने अपनी पार्टी के सांसदों के साथ एक अहम बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने सांसदों को निर्देश दिया कि वे संसद में एक 'रचनात्मक विपक्ष' की भूमिका निभाएं और तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम का डटकर विरोध करें।

बता दें कि डीएमके लंबे समय से परिसीमन प्रस्ताव की मुखर विरोधी रही है। इसी साल 16 अप्रैल को एमके स्टालिन ने इस प्रस्तावित बिल की एक प्रतीकात्मक कॉपी को 'काला कानून' बताते हुए जला दिया था। उनका आरोप है कि इसका तमिल लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। अगले ही दिन संसद में यह बिल और संबंधित संवैधानिक संशोधन दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहे थे।

'तमिलनाडु अपना प्रतिनिधित्व छिनने नहीं देगा'
तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री थलापति विजय भी इस मामले में पूरी तरह से डीएमके के सुर में सुर मिला रहे हैं। विधानसभा चुनावों से पहले ही विजय ने परिसीमन की कवायद को केंद्र सरकार का 'भेदभावपूर्ण' कदम करार दिया था। सत्ता संभालने के बाद, 10 जुलाई को करूर के दौरे पर उन्होंने अपना स्टैंड एक बार फिर साफ किया।

सीएम विजय ने कहा, "केंद्र सरकार की ओर से परिसीमन लागू करने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। इसे कोई भी पेश करे, तमिलनाडु इसे दृढ़ता से खारिज करेगा। हम अपना सही प्रतिनिधित्व छिनने नहीं देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई हमारा हक ना मार सके।"

बीजेपी ने किया बचाव, एआईएडीएमके ने साधी चुप्पी
एक तरफ जहां राज्य की प्रमुख पार्टियां इसके विरोध में मुखर हैं, वहीं बीजेपी ने परिसीमन का बचाव किया है। बीजेपी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "परिसीमन तो होना ही है, वास्तव में इसे साल 2000 में ही हो जाना चाहिए था।" दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके के नेताओं ने फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

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