Wednesday, July 29, 2026
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मध्य प्रदेश में खर्चों पर लगाम, अफसरों की फ्लाइट, विदेश यात्रा और होटल मीटिंग पर रोक, लागू होगी व्हीकल पूलिंग

भोपाल 
मध्यप्रदेश में वित्तीय प्रबंधन की दिशाा में मोहन सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी स्तर पर होने वाले खर्चों पर लगाम लगा दी है. प्रदेश में अगले दो सालों तक होटलों, व्यावसायिक केन्द्रों में कार्यशाला, बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं किए जाएंगे. वित्त विभाग ने प्रदेश के अफसरों के विदेश दौरों पर भी रोक लगा दी है. किसी आवश्यक सरकारी कार्य से यात्रा के दौरान अफसरों को इकोनॉमी क्लास में ही हवाई सफर करना होगा. वित्त विभाग ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं। 

सरकारी खर्चे पर हवाई यात्रा पर लगाम
वित्त विभाग ने इसको लेकर सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, सभी संभागों के आयुक्त और सभी प्रबंध संचालकों को आदेश जारी करते हुए वित्तीय प्रबंधन के लिए कई आदेश दिए हैं. वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अधिकारी अब सिर्फ अत्यावश्यक मामलों में ही सरकारी खर्चे पर विदेश यात्रा कर सकेंगे. तमाम विभागों के अलावा सभी निगम मंडल, विश्वविद्यालय और दूसरी संस्थाओं को भी इस संबंध में आदेश दिए गए हैं. इसमें कहा गया है कि बहुत जरूरी विषय पर ही सरकारी खर्चे पर अधिकारी द्वारा विदेश यात्रा की जाए। 

अधिकारियों की हवाई यात्रा पर पाबंदी के फैसले पर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के रिएक्शन भी आ रहे हैं, क्योंकि खुद मोहन यादव के कार्यकाल में हवाई यात्रा पर 21 लाख रु प्रतिदिन खर्च होने पर भी सवाल उठे थे. ऐसे में सरकार को विधानसभा में इस मुद्दे पर जवाब भी देना पड़ा था। 

न सरकारी कैलेंडर छपेंगे और न दिए जाएंगे उपहार
वित्त विभाग ने मितव्ययिता के लिए कई बड़े व्ययों पर रोक लगा दी है। अब अनिवार्य मामलों को छोड़कर राज्य सरकार या उसके उपक्रमों के खर्च पर होने वाली सभी विदेश यात्राओं पर आगामी आदेश तक रोक रहेगी। नए साल या अन्य उत्सवों पर छपने वाले सरकारी कैलेंडर, डायरी के मुद्रण और वीआइपी को दिए जाने वाले उपहार व स्वागत समारोहों के खर्च पर भी रोक रहेगी।

अधिकारी हवाई यात्रा को इकोनामी क्लास के अलावा किसी भी अन्य श्रेणी में सरकार के व्यय पर नहीं कर सकेंगे। कार्यशाला, बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम या तो सरकारी भवनों में किए जाएंगे। वर्चुअल माध्यम व वेबिनार को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा कार्यालयों में होने वाले आंतरिक साज-सज्जा के गैर जरूरी खर्चों पर भी रोक लगाई गई है।

वाहन पुलिंग नीति होगी अनिवार्य
परिवहन व्यवस्था में होन वाले व्यय को नियंत्रित करने के लिए व्हीकल पूलिंग नीति का पालन करना अनिवार्य होगा। यदि किसी अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाता है, तो उस पद के वाहन को किसी अन्य पात्र अधिकारी को स्थानांतरित किया जाएगा ताकि किराए के वाहनों का खर्च कम हो सके। विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किराए के वाहनों की संख्या सीमित करें। दो या दो से अधिक अधिकारियों के बीच एक ही वाहन आवंटित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

10 हजार करोड़ रुपये आय कम होने का अनुमान
दरअसल, सरकार का अनुमान है कि इस वर्ष राज्य की आय बजट अनुमान से 10 हजार करोड़ रुपये तक कम रह सकती है। वित्त विभाग द्वारा राजस्व प्राप्ति के आधार पर यह अनुमान जताया है और सरकार को भी अवगत करा दिया है। यही कारण है कि प्रथम अनुपूरक बजट में राजस्व व्यय को बढ़ाने के स्थान पर पूंजीगत कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

नए किसी भी कार्य के लिए केवल उसी सूरत में अतिरिक्त राशि विभागों को दी जाएगी, जब भारत सरकार या अन्य किसी माध्यम से कोई राशि प्राप्त हो रही हो और उसमें राज्यांश मिलना आवश्यक हो। 2026-27 के बजट में 3,89,397 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया गया है। जबकि, व्यय 3,88,925 करोड़ रुपये रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कारकेड में किए आठ वाहन, ईवी को किया शामिल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर मध्य प्रदेश में मितव्ययिता को लेकर काम पहले ही प्रारंभ हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने के कारकेड में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर आठ कर चुके हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन को शामिल कर उससे ही यात्रा कर रहे हैं। इसके साथ ही वित्त विभाग नई गाड़ियों की खरीद पर प्रतिबंध लगा चुका है। 

वर्चुअल करना होंगे कार्यक्रम, होटलों में कार्यक्रम पर रोक
वित्त विभाग ने होटल और अन्य व्यावसायिक संस्थाओं में होने वाले कार्यक्रम, कार्यशला, प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है. ऐसे कार्यक्रम सरकारी संस्थानों में ही करने के निर्देश दिए गए हैं. बहुत जरूरी न होने पर ऐसे कार्यक्रम वर्चुअल प्रशिक्षण और वेबिनार करने के लिए कहा गया है. वित्त विभाग ने कहा है कि ऐसे कार्यक्रमों पर बहुत ज्यादा व्यय न किया जाए। 

वाहनों की संख्या की जाएगी कम
सभी विभागों को सरकारी विभागों में लगी किराए के वाहनों की संख्या कम करने का आदेश दिया गया है. विभागों को आदेश दिया गया है कि किराए के वाहनों के स्थान पर वाहनों को पूल किए जाने की व्यवस्था लागू की जाए. इसकी समीक्षा नियमित रूप से विभागाध्यक्ष स्तर पर की जाए. दो या दो से अधिक अधिकारियों के बीच एक से ज्यादा वाहन आवंटित नहीं किए जाएंगे. वित्त विभाग ने सभी विभागों को अधिकारियों या ऑफिस की साज-सज्जा पर होने वाले खर्च पर भी रोक लगा दी है. अधिकारी अपने केबिन के इंटीरियर पर भी अनावश्यक खर्च नहीं कर सकेंगे।

इसके अलावा अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने की स्थिति में अधिकारियों के अतिरिक्त वाहन के उपयोग पर भी रोक लगा दी है.अधिकारियों को उनकी पात्रता के अनुसार एक विभाग के हिसाब से ही वाहन उपलब्ध कराया जाएगा. दूसरे विभाग का कार्यभार सौंपे जाने पर दूसरे विभाग के वाहन का उपयोग अधिकारी नहीं कर सकेंगे। 

निगम-मंडल और सरकारी उपक्रम जमा कराएं पैसा
वित्त विभाग ने नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंध पर भी रोक लगा दी है. इसके साथ ही सभी निगम-मंडलों और सरकारी उपक्रमों को आदेश दिया गया है कि अपने लाभांश की अधिकतम संभव राशि राज्य शासन के खातों में जमा कराई जाए, ताकि सरकारी संसाधनों को मजबूत किया जा सके. गौरतबल है कि इसके पहले सामान्य प्रशासन विभाग ने भी विभागों में होने वाले गैरजरूरी खर्चों पर लगाम लगाने के आदेश दिए थे। 

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