Tuesday, August 25, 2026
Google search engine
Homeराज्यमध्य प्रदेशभाइयों की कलाई पर सजेगी बुरहानपुर की खास राखी, केले के रेशे...

भाइयों की कलाई पर सजेगी बुरहानपुर की खास राखी, केले के रेशे से बनी राखियों के विदेशों से भी ऑर्डर

बुरहानपुर
 आज यानि मंगलवार से तीन दिन बाद भाई-बहनों का त्योहार रक्षाबंधन है. राखी के त्योहार को देखते हुए बाजार सज गए हैं, वहीं अलग-अलग प्रकार और डिजाइन की राखियां बनाई जा रही है. जिसकी डिमांड भी बाजार में है. इसी तरह 'मेड इन बुरहानपुर' राखियों ने राजधानी भोपाल समेत लंदन तक धूम मचाई है. मोहम्मदपुरा स्थित RSETI प्रशिक्षण केंद्र से स्व सहायता समूह की 30 महिलाओं ने प्रशिक्षण हासिल किया, उन्होंने केले के रेशे से विभिन्न उत्पाद बनाने की कला सीखी, रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए खूबसूरत इको फ्रेंडली राखियां तैयार करना शुरू किया। 

महिलाएं राखियों सहित कई तरह के उत्पाद भी तैयार कर रही हैं. खास बात यह है कि इन राखियों की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहुंच रही है. हाल ही में महिलाओं से लंदन में रहने वाले के एक मूल भारतीय शख्स ने राखियां खरीदी है. इससे महिलाओं का हौसला बढ़ा है. जैनाबाद गांव में 30 महिलाएं उत्साह और उमंग के साथ राखियां बनाने में जुटी हैं. थोक में 25 रुपए प्रति नग के हिसाब से राखी बिक रही है। 

प्रशिक्षण लेकर केले के रेशे से महिलाएं बना रहीं राखी
जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर स्थित जैनाबाद गांव में रहने वाली रंजना पवार ने वर्ष 2018 में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान और मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर प्रशिक्षण हासिल किया. इसके बाद स्व-सहायता समूह की नींव रखी, इस समूह में महिलाओं को जोड़ा गया, सभी महिलाओं को भी प्रशिक्षणl दिलाया. इन महिलाओं ने केले के रेशे से आकर्षक और इको फ्रेंडली उत्पाद बनाकर अपनी अलग पहचान स्थापित की है। 

केले को मिली पहचान, घर बैठे रोजगार
खास बात यह है कि तत्कालीन कलेक्टर भव्या मित्तल के कार्यकाल में केला फसल को 'एक जिला एक उत्पाद' योजना में शामिल किया गया था. जिसके चलते केला फसल और इससे बने उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है. स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को घर बैठे रोजगार का अवसर मिला है. रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही उन्होंने केले के रेशे से राखियां बनाना शुरू किया है. राजधानी भोपाल समेत लंदन तक इको फ्रेंडली राखियां पहुंची है. धीरे-धीरे इस काम में महिलाओं की रुचि बढ़ रही है, उन्होंने एक से बढ़कर एक उत्पाद बनाए हैं. इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है. महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं, परिवार और गांव में उनका मान-सम्मान बढ़ गया है। 

विदेशों से भी आ रहे ऑर्डर
स्व-सहायता अध्यक्ष रंजना पवार ने बताया कि "केले के रेशे को अलग-अलग साइज में तैयार किया जाता है. उससे आकर्षक डिजाइन की राखियां बनाई जाती हैं. इसके बाद राखियों को सजाकर बाजार और ग्राहकों तक पहुंचाते हैं. केले के रेशे से तैयार राखी पूरी तरह इको-फ्रेंडली है, राखी के धागे में केमिकल युक्त रंग नहीं है. इससे किसी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं होता. पर्यावरण के लिए अनुकूल है, इस काम में करीब 30 महिलाएं जुटी हैं. उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है, केले के रेशे से बनी राखियों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. विदेशों से भी उन्हें ऑर्डर मिल चुके हैं, लंदन तक उनकी बनाई राखियां पहुंच गई हैं। 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments