Friday, September 11, 2026
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मोदी कैबिनेट में बदलाव के संकेत? राज्यसभा टिकट कटने से रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कूरियन की विदाई की चर्चा तेज

भोपाल/जयपुर/अहमदाबाद/दिल्ली

भाजपा और कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। मध्यप्रदेश की दो सीटों के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और उद्योगपति रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। राजस्थान से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है।

कांग्रेस ने भी सात उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। पार्टी ने कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान को उम्मीदवार बनाया है।

वहीं मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, राजस्थान से नीरज डांगी, तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती और झारखंड से प्रणव झा को राज्यसभा चुनाव के लिए टिकट दिया गया है।

ओडिशा में 25 मई को देवाशीष सामंतराय ने बीजू जनता दल (BJD) और राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन कर ली थी। इस तरह ओडिशा की इस सीट पर उपचुनाव होगा।

इसके लिए भाजपा ने देवाशीष को ही उम्मीदवार बनाया है। 13 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होगा। नामांकन भरने की लास्ट डेट 8 जून है।

तमिलनाडु, मेघालय और मिजोरम में भी प्रत्याशी घोषित
    तमिलनाडु: CM विजय की पार्टी TVK ने राज्य की एक राज्यसभा सीट कांग्रेस को दी है। पार्टी ने यहां से प्रवीण चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया है।

    मेघालय: मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस-II (MDA-II) ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के जेम्स पीके संगमा को सर्वसम्मति से उम्मीदवार बनाया है।

    मिजोरम: राज्य की एक सीट के लिए सत्ताधारी दल जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने पार्टी प्रवक्ता के. लालतलुआंगकिमा को प्रत्याशी घोषित किया है।

NDA के पास 18 सीट

राज्यसभा की जिन 27 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से NDA के पास अभी 18 (आंध्र प्रदेश से 1, गुजरात से 4, कर्नाटक से 3, राजस्थान-मध्य प्रदेश से 2-2, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से एक-एक सीटे हैं)। वहीं कांग्रेस गठबंधन के पास 5 सीटे हैं। वहीं तीन अन्य सीटें YSRCP के खाते में हैं। एक बीजेडी के पास थी।

इन चुनावों में NDA को 17 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को पांच, JMM को दो और TVK को एक सीट मिलने की उम्मीद है। एक सीट मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट जीत सकती है। YSRCP अपनी तीनों सीटें गंवा सकती है।

244 सदस्यों वाले उच्च सदन में NDA के पास अभी 149 सांसद हैं, जबकि विपक्ष के पास 78 और गैर-गठबंधन वाले क्षेत्रीय दलों के पास 17 सांसद हैं।

केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कूरियन का कटा टिकट, मोदी कैबिनेट से विदाई तय

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए 11 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. इस सूची के सामने आते ही सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा दो केंद्रीय राज्य मंत्रियों रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कूरियन के नामों के कटने को लेकर शुरू हो गई है. उम्मीदवारों की सूची में जगह न मिलने के कारण अब दोनों ही मंत्रियों की मोदी मंत्रिपरिषद से छुट्टी तय मानी जा रही है। 

BJP की इस 11 संसदीय उम्मीदवारों की सूची में सबसे चौंकाने वाला  नाम रवनीत सिंह बिट्टू का है. वह राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद हैं. केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका नहीं दिया गया है. पंजाब में सिखों के बड़े चेहरे के तौर पर स्थापित बिट्टू का 21 जून को कार्यकाल समाप्त हो रहा है. संसद का सदस्य न रहने की स्थिति में उनका मंत्री पद जाना अब लगभग तय है। 

वहीं, मध्य प्रदेश कोटे से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन का नाम भी इस सूची से नदारद है. कूरियन का कार्यकाल भी आगामी 21 जून को समाप्त हो रहा है. उन्हें दोबारा राज्यसभा न भेजने के फैसले के बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। 

सांगठनिक धुरंधरों को मिला ईनाम पार्टी ने इस बार मंत्रियों को ड्रॉप करके संगठन में रात-दिन काम करने वाले जमीनी रणनीतिकारों पर बड़ा दांव खेला है। 
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और कई राज्यों के चुनावी प्रभारी तरुण चुघ को मध्य प्रदेश कोटे से उम्मीदवार बनाया गया है.चुघ को टिकट देकर पार्टी ने उनके संगठनात्मक कौशल को पुरस्कृत किया है. उनके साथ एमपी से प्रदेश मंत्री और लंबे समय से प्रदेश बीजेपी का प्रमुख चेहरा रहे रजनीश अग्रवाल को भी संसद भेजा जा रहा है। 

इसके अलावा, राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में हरियाणा बीजेपी के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया को राजस्थान से टिकट मिला है. पूनिया की जमीनी और जाट समुदाय पर मजबूत पकड़ को देखते हुए इसे बड़ा फैसला माना जा रहा है। 

वहीं, बीजेपी की केंद्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर को भी राजस्थान कोटे से राज्यसभा का टिकट दिया गया है, जो महिला और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत करेगा। 

गुजरात के 4 'सरप्राइज' नाम 
बीजेपी ने अपने अभेद्य किले गुजरात से चार ऐसे चेहरों को मैदान में उतारा है जिन्होंने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है.इन नामों के पीछे RSS की पसंद और ओबीसी-आदिवासी सोशल इंजीनियरिंग साफ दिखाई देती है। 

राजूभाई शुक्ला: मेहसाणा के रहने वाले राजूभाई शुक्ला लंबे समय से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता और मजबूत ब्राह्मण चेहरा हैं. वर्तमान में वे सुरेंद्रनगर के जिला प्रभारी हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से गहरा जुड़ाव रखते हैं. वे मेहसाणा जिला महामंत्री और कड़ी नगरपालिका के प्रमुख भी रह चुके हैं। 

मानसिंह परमार: युवा चेहरा मानसिंह परमार सोमनाथ जिले से आते हैं. वे ओबीसी मोर्चा के प्रमुख व पूर्व विधायक गोविंद परमार के भतीजे हैं और खुद भी पूर्व जिला अध्यक्ष के रूप में संगठन संभाल चुके हैं। 

जितेंद्र कंजारिया: देवभूमि द्वारका के खंभालिया से पूर्व विधायक मेघजी कंजारिया के बेटे जितेंद्र खुद भी ओबीसी समुदाय से आते हैं और क्षेत्र के बड़े जमीनी नेता हैं। 

मुकेशभाई राठवा: छोटा उदेपुर जिला महामंत्री मुकेश राठवा भारतीय जनता युवा मोर्चा से अपनी राजनीति शुरू कर चुके हैं. RSS के कैडर रहे मुकेश राठवा की गुजरात के आदिवासी समुदाय पर बेहद मजबूत पकड़ मानी जाती है। 

नॉर्थ-ईस्ट पर विशेष फोकस 
मणिपुर में जारी संवेदनशील और सामाजिक हालात के बीच भाजपा ने मणिपुर बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष  ए. शारदा देवी को राज्यसभा का टिकट दिया है. एक महिला और सांगठनिक अध्यक्ष को उच्च सदन में भेजना राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। 

वहीं, अरुणाचल प्रदेश से पार्टी के वरिष्ठ और बेहद अनुभवी नेता ताई तगाक को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। 

ओडिशा उपचुनाव में देबाशीष सामंतराय को तोहफा
ओडिशा की एकमात्र राज्यसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए बीजेपी ने देबाशीष सामंतराय को अपना प्रत्याशी बनाया है. दिलचस्प बात यह है कि देबाशीष सामंतराय बीजू जनता दल (BJD) छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. यह उपचुनाव उन्हीं के इस्तीफे के कारण खाली हुई सीट पर हो रहा है, जिस पर बीजेपी ने दोबारा उन्हीं पर भरोसा जताया है।  

ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव

राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं।

राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है।

महाराष्ट्र की 7 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं
राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 7 हैं।

कुल विधायकों की संख्या x 100/ (राज्यसभा की सीटें+1) = +1 288X100/(7+1)= +1 28800/8= +1 3600= +1 3601 चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए महाराष्ट्र में अभी एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी।

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