Friday, August 14, 2026
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हरियाणा में बदले नियम, कोचिंग सेंटरों पर लगेगा रेगुलेशन; आवासीय इलाकों में नर्सिंग होम को मंजूरी

चंडीगढ़.

मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में वीरवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम प्रस्ताव पास हुए। इनमें कोचिंग संस्थानों के लिए कड़े नियम, 5,714.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले विश्व बैंक वित्त पोषित वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम, रिहायशी कॉलोनियों में लीज पर नर्सिंग होम खोलने, महिला स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन योजना और शहरी क्षेत्रों के विकास से जुड़े लाइसेंस प्रक्रिया आसान बनाने को मंजूरी दी गई।

प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर एनओसी सहित कई शर्तें जोड़ी
दिल्ली और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए हादसों से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। नौकरियों, पेशेवर पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सभी निजी कोचिंग संस्थानों को अब नामित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। छात्रों और अभिभावकों को रिझाने के लिए भ्रामक दावे नहीं किए जा सकेंगे। कोचिंग सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। स्कूल-कॉलेजों के समय के दौरान कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्रिमंडल की बैठक में "हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण और विनियमन) नियम, 2026" के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

छात्रों को देनी होंगी बुनियादी सुविधाएं
छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएं जैसे फर्नीचर, पर्याप्त रोशनी, पीने योग्य पानी, छात्र और छात्राओं के लिए अलग शौचालय और अग्नि-सुरक्षा उपायों जैसी सुविधाएं देनी होंगी। वहीं, चिकित्सा सहायता या प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट-एड), पार्किंग, पुस्तकालय, वाई-फाई, स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर प्रयोगशाला, छात्रावास और कैंटीन उपलब्ध करानी होंगी। संचालकों को बताना होगा कि भवन अपना है या लीज/किराए पर लिया गया है। अग्नि-सुरक्षा प्रमाणन, संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणन और क्या भवन विशेष रूप से सक्षम (दिव्यांग) छात्रों के लिए बाधा मुक्त है। इसके अलावा कर्मचारियों के चरित्र और पूर्ववृत्त (एंटीसिडेंट्स) के सत्यापन के संबंध में भी जानकारी देनी जरूरी होगी।

पोर्टल के जरिये होगा पंजीकरण
निजी कोचिंग संस्थान के साथ-साथ नया कोचिंग सेंटर खोलने के लिए नामित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। पंजीकरण के लिए दस हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जो इलेक्ट्रानिक माध्यम से देय होगा। संबंधित प्राधिकरण 30 दिनों के भीतर आवेदनों की जांच करेगा और आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण पाए जाने पर, तीन साल के लिए वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा। पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए निजी कोचिंग संस्थान को अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र की समाप्ति से कम से कम एक महीने पहले 5,000 रुपये के नवीनीकरण शुल्क के साथ आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच और त्रुटियों को दूर करने (यदि कोई हो) के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर नवीनीकरण प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।

वेबसाइट पर फीस, पाठ्यक्रमों की जानकारी देनी होगी
पंजीकृत संस्थानों को निर्धारित रिकॉर्ड बनाए रखने और संबंधित प्राधिकरण को सालाना जानकारी प्रस्तुत करने के अलावा अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपेक्षित जानकारी अपलोड करना अनिवार्य होगा। पाठ्यक्रमों और पाठ्यक्रम-सामग्री और शुल्क संरचना, कक्षाओं की संख्या और क्षमता, प्रति बैच अधिकतम छात्रों की संख्या, शिक्षण, परामर्शदाता और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की योग्यता व बायोडाटा और छात्रों की संख्या के अनुपात में कोचिंग क्षेत्र के विवरण से संबंधित व्यापक जानकारी देनी जरूरी।

वाटर सिक्योर हरियाणा: जल भविष्य को मिलेगी ताकत 45 लाख लोगों को सीधा लाभ
मंत्रिमंडल की बैठक में विश्व बैंक वित्त पोषित ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ को मंजूरी दी गई। 5,714.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस एकीकृत जल क्षेत्र कार्यक्रम से प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में करीब 45 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। 4,000.36 करोड़ रुपये का विश्व बैंक ऋण और 1,714.44 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा होगा। इसे 15 प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा, जिनमें 48.94 लाख एकड़ सिंचाई योग्य कमांड एरिया शामिल है। नहर सिंचाई की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने, भूजल दोहन कम करने, भूजल रिचार्ज बढ़ाने और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं शुरू होंगी
सूक्ष्म सिंचाई एवं कमांड एरिया विकास प्राधिकरण के तहत करीब 900 करोड़ रुपये से 620 वाटरकोर्स का पुनर्वास होगा। 600 करोड़ रुपये से 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के स्तर पर करीब 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का वर्टिकल ड्रेनेज/सब-सर्फेस ड्रेनेज के जरिए सुधार किया जाएगा। 5 लाख एकड़ में डीएसआर (सीधी बिजाई) को बढ़ावा देने और ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत करीब 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

104 नहर चैनलों की होगी मरम्मत
रियल टाइम जल प्रबंधन को तकनीक से जोड़ते हुए नहरों के स्वचालित एवं रियल टाइम संचालन के लिए 20 एससीएडीए स्थान स्थापित किए जाएंगे। पानी के डिस्चार्ज और प्रवाह की निगरानी के लिए 400 आरटीडीएएस स्थान/माप बिंदु बनाए जाएंगे। इससे नहर संचालन, जल लेखांकन और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने में मदद मिलेगी। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के तहत करीब 2,484.87 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 104 नहर चैनलों का पुनर्वास किया जाएगा। इससे करीब 8.75 लाख एकड़ कमांड एरिया (सीसीए) को लाभ मिलेगा। भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देने के लिए 248 करोड़ रुपये की लागत से 131 नए जलाशयों का निर्माण किया जाएगा।

अन्य स्टार्टअप्स के लिए फायदे
निजी या एंजल निवेशक से 25 लाख जुटाने पर सरकार भी 25 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट दे सकेगी। नई तकनीक का लाइसेंस लेने या टेक्नोलाजी ट्रांसफर के लिए 10 लाख तक सहायता मिलेगी। गुणवत्ता प्रमाणन पर खर्च की 50 प्रतिशत राशि, अधिकतम 25 लाख तक, एक बार वापस की जाएगी।

एच-हब नाम से विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर बनेगा
विद्यार्थियों को 10 हजार ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (डीआईवाई) किट बांटी जाएंगी। एच-हब नाम से विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर स्थापित किया जाएगा, जहां स्टार्टअप को आधुनिक सुविधाओं के साथ तकनीकी और कारोबारी सहयोग मिलेगा। विश्वविद्यालयों और पालीटेक्निक के विद्यार्थी स्टार्टअप में अप्रेंटिसशिप कर सकेंगे। पात्र स्टार्टअप को प्रति अप्रेंटिस 7,500 प्रतिमाह तक स्टाइपेंड का 50 प्रतिशत वापस मिलेगा। एक स्टार्टअप अधिकतम 50 अप्रेंटिस का लाभ ले सकेगा। टेक्नोलाजी स्टार्टअप के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज का खर्च भी नीति के दायरे में लाया गया है। हरियाणा आधारित स्टार्टअप भारत के किसी भी डेटा सेंटर पर हुए ऐसे खर्च का 75 प्रतिशत (अधिकतम ढाई लाख रुपये सालाना) पांच साल तक वापस ले सकेंगे।

शहरी विकास से जुड़े लाइसेंस लेना होगा आसान
कैबिनेट बैठक में हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन आफ अर्बन एरियाज रूल्स-1976 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। संशोधनों का मकसद लाइसेंस से जुड़े आवेदन, उनकी जांच, फैसले की सूचना और लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट बनाना है। यह बदलाव विधानसभा की अधीनस्थ विधान समिति की 2016-17 की 45वीं रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर किया गया है।

लोगों को घर के नजदीक मिलेगी उपचार की सुविधा
रिहायशी कॉलोनियों में लीज की जमीन पर भी नर्सिंग होम खोले जा सकेंगे। नए नर्सिंग होम के लिए डाक्टर के पास खुद की जमीन की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। बैठक में मौजूदा नीति में संशोधन को मंजूरी दी गई। इससे उन डाक्टरों को राहत मिलेगी, जो अपनी जमीन नहीं होने के कारण रिहायशी इलाकों में नर्सिंग होम शुरू नहीं कर पा रहे थे। लोगों को उनके घर के नजदीक ही उपचार और भर्ती की सुविधा मिल सकेगी।

महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए विशेष पैकेज
महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए नीति में विशेष पैकेज रखा गया है। उन्हें एक साल तक लीज रेंट का 50 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख रुपये तक वापस मिलेगा। सात साल तक नेट एचजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी। इसकी सीमा फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट के 100%तक रहेगी। सामान्य स्टार्टअप के लिए नेट एचजीएसटी की 50% प्रतिपूर्ति सात साल तक जारी रहेगी। महिला उद्यमियों के हस्तशिल्प, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य एवं वेलनेस उत्पाद तथा स्थानीय खाद्य उत्पादों के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तक माइक्रो-ग्रांट भी दिए जाएंगे।

इन डॉक्टरों को मिलेगा लाभ
आयुष और एलोपैथिक दोनों पद्धतियों के योग्य चिकित्सक रिहायशी प्लाट पर नर्सिंग होम स्थापित कर सकेंगे। प्लाट डाक्टर के नाम होना जरूरी नहीं बल्कि वह उसे लीज पर लेकर भी सुविधा शुरू कर सकेगा। इसके लिएकन्वर्जन चार्ज देना अनिवार्य होगा। प्लाट पर नर्सिंग होम चलाने के लिए अनुमति लीज की अवधि तक ही वैध रहेगी। डाक्टर के पास संबंधित मेडिकल काउंसिल या आयुष काउंसिल का वैध पंजीकरण नंबर होना चाहिए।

हर 10वां सामान अब हरियाणा के स्टार्टअप से खरीदेगी सरकार
कैबिनेट बैठक में हरियाणा स्टेट स्टार्टअप पालिसी-2022 के सप्लीमेंट को मंजूरी दी गई। कारपोरेट सेक्टर को भी स्थानीय स्टार्टअप के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकारी खरीद में अब प्रदेश सरकार हर दसवां सामान प्रदेश के स्टार्टअप से खरीदेगी। कोई निजी या एंजल निवेशक स्टार्टअप में 25 लाख रुपये लगाता है तो सरकार भी इतनी ही मैचिंग ग्रांट देगी। कारपोरेट कंपनियां किसी स्टार्टअप के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू करती हैं और उसे आगे बढ़ाकर वास्तविक अनुबंध में बदलती हैं तो सरकार 10 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट देगी।

‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ के मुख्य बिंदु

  • कार्यक्रम की अनुमानित लागत – 5,714.80 करोड़ रुपये
  • विश्व बैंक से ऋण- 4,000.36 करोड़ रुपये
  • राज्य सरकार का हिस्सा- 1,714.44 करोड़ रुपये
  • संभावित प्रत्यक्ष लाभार्थी – 45 लाख प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टर- 15
  • प्रदेश में इस समय सिंचाई योग्य कमांड एरिया- 48.94 लाख एकड़।

किसानों के लिए क्या बदलेगा?

  • सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
  • नहरों में पानी की संचरण हानि कम करने पर जोर होगा।
  • सूक्ष्म सिंचाई से पानी के अधिक दक्ष उपयोग को बढ़ावा।
  • डीएसआर, फसल विविधीकरण से कृषि क्षेत्र में पानी की मांग घटाने का प्रयास होगा।
  • जलभराव वाली भूमि के सुधार से कृषि क्षेत्र के उपयोग में मदद।
  • भूजल रिचार्ज, उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से जल स्रोतों पर दबाव कमगा।
  • जलवायु चुनौतियों के बीच किसानों की आय को अधिक टिकाऊ बनाने पर जोर रहेगा।
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