Friday, July 10, 2026
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शोध में खुलासा, जनरेटिव एआई से विद्यार्थियों की पढ़ाई, रचनात्मकता और कार्यक्षमता में सुधार हुआ

 हिसार
 उच्च शिक्षा में जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) तेजी से विद्यार्थियों के सीखने के तरीके को बदल रहा है। हरियाणा के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के 400 स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि 82 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ाई में जनरेटिव एआई का उपयोग कर रहे हैं।

इनमें से 74 प्रतिशत विद्यार्थियों का मानना है कि एआई की मदद से उनके असाइनमेंट और प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पहले से बेहतर हुई है, जबकि 51 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों ने स्वीकार किया कि इससे उनकी कार्यक्षमता और आलोचनात्मक सोच में सुधार हुआ है। यह जानकारी गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) के हरियाणा स्कूल आफ बिजनेस के शोधार्थी अनमोल खुराना के शोध में सामने आई है। उनका यह शोधपत्र भारतीय प्रबंधन संस्थान जम्मू के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चयनित हुआ है।

18 से 25 आयु वर्ग के युवाओं पर किया सर्वे
एमबीए विभाग के निदेशक प्रो. डॉ. संजीव कुमार के निर्देशन में किए गए इस अध्ययन का सर्वे दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच किया गया। शोध में 400 विद्यार्थियों को शामिल किया गया, जिनमें 68 प्रतिशत स्नातक और 32 प्रतिशत स्नातकोत्तर विद्यार्थी थे।
प्रतिभागियों में 58.6 प्रतिशत पुरुष और 41.4 प्रतिशत महिलाएं शामिल रहीं। अधिकांश विद्यार्थी प्रो. संजीव । 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के थे, जिससे युवा वर्ग में एआइ के बढ़ते उपयोग की स्पष्ट तस्वीर सामने आई।

अध्ययन के अनुसार 85 प्रतिशत विद्यार्थी सबसे अधिक चैटजीपीटी का उपयोग करते हैं। इसके बाद 39.4 प्रतिशत गूगल जेमिनी, 13.5 प्रतिशत परप्लेक्सिटी और 5.2 प्रतिशत डीपसीक का इस्तेमाल करते हैं। वहीं 58.9 प्रतिशत विद्यार्थियों को जनरेटिव एआई की जानकारी शैक्षणिक संस्थानों से मिली, जबकि 25.7% ने इंटरनेट मीडिया और 15.5 प्रतिशत ने मित्रों एवं सहपाठियों को इसका प्रमुख स्रोत बताया।

सीखने की दक्षता को बढ़ा रहा एआइ
शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि जनरेटिव एआइ का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग विद्यार्थियों की सीखने की दक्षता, रचनात्मकता, आत्म-प्रभावकारिता, नवाचार और समस्या-समाधान क्षमता को बढ़ा रहा है।

जिन विद्यार्थियों का आत्मविश्वास अधिक होता है, वे एआई का अधिक प्रभावी और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करते हैं। हालांकि अध्ययन में यह भी चेताया गया है कि बिना उचित दिशा-निर्देशों के एआइ पर अत्यधिक निर्भरता विद्यार्थियों की मौलिक लेखन क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में चुनौतियों पर चर्चा
अनमोल खुराना ने बताया कि आइआइएम जम्मू के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविद् और 4 शोधकर्ता शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका, संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। उनका मानना है कि यह अध्ययन भविष्य की शिक्षा तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में उपयोगी साबित होगा।

 

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