Sunday, June 14, 2026
Google search engine
Homeविदेशभारतीय नाविकों पर हमले को लेकर सवाल, ईरान में फंसे क्रू ने...

भारतीय नाविकों पर हमले को लेकर सवाल, ईरान में फंसे क्रू ने जारी किया वीडियो

नई दिल्ली
ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले कमर्शल शिप को निशाना बनाए जाने और तीन भारतीयों की मौत के बाद अमेरिका के साथ एक बार फिर कहासुनी शुरू हो गई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि उन्होंने फोन पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बात करके कड़ी आपत्ति जताई है। तो दूसरे ही दिन रूबियो का बयान आ गया कि होर्मुज में नाकेबंदी का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी बीच ईरान में फंसे कुछ नाविकों ने वीडियो जारी करके सवाल किया है कि आखिर भारतीय शिप को ही क्यो निशाना बनाया जा रहा है।

भारतीय नाविक क्यों निशाने पर?
वीडियो में एक नाविक कहता है, भारतीय नाविकों पर हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, हम लोग ईरान में हैं। सिर्फ भारतीय जहाजों पर हमला हो रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है। हम लोग किसी सेना से तो हैं नहीं। हमें लड़ने की ट्रेनिंग नहीं मिली है। हम केवल देश का बिजनेस बढ़ा रहे हैं। हम कॉन्ट्रैक्ट बेस पर काम कर रहे हैं। हमारी क्या गलती है। कल एक शिप पर अटैक हुआ। उस शिप पर मैंने काम किया था। कैप्टन साहब से बात की तो उन्होंने बताया कि एक वॉर्निंग दी गई और फिर तुरंत मिसाइल से हमला कर दिया गया। आखिर उनकी क्या गलती थी।
 
उन्होंने कहा, हम लोगों को बीच में क्यों घसीटा जा रहा है। हम 13 लाख सीफेरर्स हैं। हम एक दूसरे की आवाज उठा सकते हैं। सवाल यह है कि सिर्फ भारतीय नाविकों को ही क्यो निशाना बनाया जा रहा है। बता दें कि अमेरिका ने 24 भारतीय चालक दल वाले एक जहाज पर ओमान तट पर हमला कर दिया था। इसमें तीन नाविकों की मौत हो गई थी और 21 को सुरक्षित निकाला जा सका था।

कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला
कांग्रेस का कहना है कि भारतीय नाविकों की मौत पर सरकार की प्रतिक्रिया शर्मनाक है। राहुल गांधी ने कहा कि मार्को रूबियो अफसोस जताने की बजाय आदेश देने वाली भाषा बोल रहे हैं। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि अमेरिकी कृत्य को अवैध एवं अस्वीकार्य कहा जाना चाहिए था और उससे माफी की मांग की जानी चाहिए थी।

इसको लेकर खेड़ा ने 'एक्स' पर लिखा, "भारत को अमेरिकी सैन्य हमले में तीन युवा भारतीय नाविकों की हत्या के लिए बिना शर्त माफ़ी की मांग करनी चाहिए थी। इसके बजाय, अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कथित तौर पर एक चेतावनी जारी करने का फैसला किया, जिसमें घोषणा की गई कि अमेरिकी सेना के आदेशों का पालन न करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments