Saturday, June 27, 2026
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16,448 करोड़ के राजस्व अंतर पर बिजली कंपनियों की मांग, स्मार्ट मीटर खर्च पर भी विवाद बरकरार

लखनऊ
 बिजली बिलों की नई दरों को लागू करने को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही उठक-बैठक अब खत्म होने वाली है। जल्द ही नियामक आयोग नई दरों को लेकर ऐलान कर सकता है। माना जा रहा है कि इस बार नई नदरों में बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।कभी भी नई दरों का ऐलान हो सकता है। बिजली की नई दरों के ऐलान की उलटी गिनती अब शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक नियामक आयोग की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस बार लगातार सातवें साल बिजली की दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद बेहद कम है। अगर ऐसा हुआ तो यह नया रिकॉर्ड होगा।

बिजली की नई दरों पर सभी बिजली कंपनियों के प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने मार्च और अप्रैल में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद राज्य सलाहकार समिति की बैठक भी हो चुकी है। नियम के मुताबिक नियामक आयोग को पांच जून के पहले ही दरें घोषित कर देनी चाहिए थीं। हालांकि, अब देर से ही सही, जल्द ही ये जारी हो सकती हैं।

16,448 करोड़ रुपये के अंतर को माना आधार
पावर कॉरपोरेशन और बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप में लगभग 3,995 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 12,453 करोड़ रुपये के राजस्व का अंतर बताया है। उन्होंने लगभग 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को आधार बनाकर बिजली दरों में इजाफे की मांग की है। इसके अलावा स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना के तहत लगभग 3,838 करोड़ रुपये के खर्च को उपभोक्ता बिलों में शामिल करने का भी प्रस्ताव पावर कॉरपोरेशन ने दिया है। बिजली दरों में सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर के दाम उपभोक्ताओं पर डाले जाने को भी गलत बताते हुए इसे नियम विरुद्ध बताया है। नोएडा पावर कंपनी के उपभोक्ताओं को मिल रही 10 प्रतिशत रियायत बरकरार रहे इसके लिए भी पैरवी की गई है।

केवल दरें ही नहीं और भी फैसले आएंगे
टैरिफ आदेश में केवल बिजली दरें ही नहीं तय होंगी बल्कि और भी फैसले आएंगे। इनमें बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले उपभोक्ताओं को साझा क्षेत्र में बिजली खर्च का ब्योरा मिलने, घरों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू कनेक्शन ही इस्तेमाल करने की छूट और स्मार्ट मीटर के दाम उपभोक्ताओं से न लिए जाने समेत अन्य मसले शामिल हैं।

बिजली बिल में पुराना बकाया नहीं जोड़ सकेगा पावर कॉरपोरेशन
पावर कॉरपोरेशन अब पुराने बकाया भुगतान की रकम बिजली बिलों में नहीं वसूल सकेगा। जून में हो रही 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली मामले में नियामक आयोग ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है। आयोग ने कहा है कि नियम पुराना बकाया जोड़ने की इजाजत नहीं देते हैं। बीते साल अप्रैल से हर महीने उपभोक्ताओं के बिजली बिल में ईंधन अधिभार के एवज में अतिरिक्त शुल्क लगता रहा है। बीते 14 महीने में पावर कॉरपोरेशन ने इस तरह से करीब 2800 करोड़ रुपये की वसूली की। इस बीच 600 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं के अलग-अलग महीनों में कम भी किए गए। इस साल जून में जब अधिकतम ईंधन अधिभार शुल्क के तौर पर 10 प्रतिशत लिए जाने लगे तो इसी गणना को लेकर सवाल उठने लगे।

हर महीने बिल में जोड़ा जा रहा था अधिभार शुल्क
मामला नियामक आयोग पहुंचा तो पावर कॉरपोरेशन ने जवाब दिया कि उसने बकाया भुगतान की रकम को भी जोड़कर अधिभार शुल्क लगाया है। साथ ही यह भी कहा कि ऐसा पहली बार नहीं बल्कि हर महीने किया गया है। नियामक आयोग ने अपने फैसले में बकाया भुगतान की रकम को ईंधन अधिभार शुल्क में जोड़ना गलत बता दिया। ऐसे में अब सभी 14 महीनों में हुई वसूली की समीक्षा होगी, जिसके बाद अतिरिक्त वसूली गई रकम पर फैसला होगा। वहीं, आयोग ने अब पहली बार यह भी साफ कर दिया है कि इस तरह की रकम पर फैसला सालाना तौर पर बिजली दरें तय करते वक्त लिया जाएगा। आयोग के इस फैसले तक बकाया भुगतान की रकम के समायोजन तक स्थिति स्पष्ट नहीं थी। आयोग ने आदेश में कहा है कि केवल तय महीने में वास्तिवक ईंधन, ऊर्जा खरीद और ट्रांसमिशन पर खर्च की रकम के एवज में ही अधिभार शुल्क लगाया जाएगा।

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