चंडीगढ़
पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) छात्रसंघ चुनाव को लेकर कैंपस में सियासी हलचल तेज हो गई है। सितंबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित चुनाव को लेकर छात्र संगठनों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
पिछले दो चुनावों के नतीजों ने इस बार मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। वर्ष 2024 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर छात्र संगठनों के समीकरण बदले थे।
इसके बाद पिछले वर्ष पीयू के इतिहास में पहली बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया। लगातार बदलते चुनावी परिणामों ने सभी संगठनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
इसके साथ ही इस बार के चुनाव में पांच हजार नए मतदाता पहली बार अपने मत का प्रयोग करेंगे। इसलिए इनका वोट जिस भी छात्र संगठन की ओर जाएगा उसकी तकदीर बदल जाएगी। यूनिवर्सिटी में कुल करीब 16 हजार मतदाता है। इनमें से एक तिहाई नए मतदाता है।
ऐसे में इन वोटरों की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। इनकी शक्ति को पहचानते हुए छात्र संगठन ने नए छात्रों को अपने पाले में करने में पूरी ताकत झोंक रहे है। नए छात्रों को लुभाने के लिए छात्र संगठनों की ओर से एडमिशन प्रक्रिया के दौरान भी विभागों के बाहर हेल्प डेस्क लगाए थे। वहीं,स्टूडेंट्स की काउंसिल की गई थी।
1977 में हुई थी शुरुआत
पंजाब यूनिवर्सिटी में वर्ष 1965-66 अकादमिक रूप से छात्रसंघ चुनावों की शुरुआत हुई। वर्ष 1977 में पीयू में प्रत्यक्ष रूप से छात्रसंघ चुनाव शुरू हुए। इसमें चार पदों–प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव होता है। हालांकि कुछ कारणों के चलते 1983 में छात्र संघ चुनाव रुक गए।
इसके बाद 1997 में छात्रों के प्रदर्शन के बाद चुनाव प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई। पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन परिसर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने और छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर साल चुनाव करता है। इसके लिए चुनाव आयोग और कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किया जाता है।
ये संगठन चुनाव में सक्रिय
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी)
स्टूडेंट्स फाॅर सोसाइटी (एसएफएस)
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई)
स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (सोई)
इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (इनसो)
पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (पुसु)
छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस)
आईएसओ (इंडियन स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन)




