Wednesday, September 30, 2026
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PM मोदी डिग्री केस: केजरीवाल को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने बरकरार रखा ₹25 हजार का जुर्माना

अहमदाबाद
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी। दरअसल अरविंद केजरीवाल ने अपनी अपील में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी थी। इसमें पीएम मोदी की अकादमिक डिग्री सार्वजनिक करने के लिए गुजरात यूनिवर्सिटी को दिए गए निर्देश को रद्द कर दिया गया था।

सिंगल बेंच के फैसले को रखा बरकरार
गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच ने सिंगल बेंच के जज के आदेश को बरकरार रखा। बेंच ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के निर्देश को रद्द करने और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने वाले फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अपीलकर्ता ने सुनवाई के दौरान जो भी दलीलें दीं, उनमें से किसी से भी यह साबित नहीं होता कि पहले के फैसले में कोई त्रुटि थी। इसलिए अपील खारिज की जाती है और इस पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं लगाया जाएगा।

हाई कोर्ट ने कहा कि जिस तरह केजरीवाल ने उनके खिलाफ केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की प्रक्रिया का जवाब दिया और लिखित जवाब देकर मामले को आगे बढ़ाया, वह खुद सबकुछ कहता है और अदालत को इस पर आगे टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच ने कहा कि सीईसी की ओर से केजरीवाल को एक आवेदक मानते हुए स्वत: संज्ञान लेकर आदेश पारित करना कानून के दायरे से बाहर था। अदालत ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के निर्देश को रद्द करने और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने वाले फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

फटकार के साथ अदालत ने लगाया था जुर्माना
हाई कोर्ट ने कहा, 'इस मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अपीलकर्ता ने सुनवाई के दौरान जो भी दलीलें दीं, उनमें से किसी से भी यह साबित नहीं होता कि पहले के फैसले में कोई त्रुटि थी। इसलिए अपील खारिज की जाती है और इस पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं लगाया जाएगा।' सिंगल बेंच ने 31 मार्च, 2023 को सीआईसी के आदेश को रद्द करते हुए केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। बेंच ने आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर उन्हें फटकार लगाई थी और कहा था कि उनका रवैया गंभीर नहीं था।

क्या कहा था अरविंद केजरीवाल ने
अपील पर सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माना लगाए जाने के आधार को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके मुवक्किल ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री मांगने पर 'लगातार जोर नहीं दिया' था, जबकि एकल पीठ ने अपने आदेश में इसके विपरीत टिप्पणी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि सीआईसी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी और एक औपचारिक आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर केजरीवाल को पक्षकार बनाया था।

क्या है मामला?
दरअसल गुजरात हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 31 मार्च, 2023 को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को रद्द करते हुए केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। बेंच ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर उन्हें फटकार लगाई थी और कहा था कि उनका रवैया गंभीर नहीं था।

क्यों की थी अपील?
अपील पर सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माना लगाए जाने के आधार को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके मुवक्किल ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री मांगने पर “लगातार जोर नहीं दिया” था, जबकि सिंगल बेंच ने अपने आदेश में इसके विपरीत टिप्पणी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि सीआईसी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी और एक औपचारिक आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर केजरीवाल को पक्षकार बनाया था। 

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