Friday, October 23, 2026
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हरियाणा के आसमान में गुलाबी राजहंसों का डेरा, वेटलैंड नहीं बचे तो खत्म हो सकता है प्रवास का सिलसिला

 भिवानी
 वर्षा मौसम खत्म होने के साथ ही हजारों मील का सफर तय कर गुलाबी मेहमान ग्रेटर फ्लेमिंगों हरियाणा के वेटलैंड में डेरा डालने लगे है।

हरियाणा के भिवानी, चरखी दादरी के बिरही कलां, झज्जर के भिंडावास, गुरुग्राम के चंदू वेटलैंड, रोहतक के कुछ गांवों में गुलाबी मेहमान ग्रेटर फ्लैमिंगों में डेरा डाल दिया है। मगर इस बार प्रदेश में हुई कम वर्षा के कारण सूखते वेटलैंड और अक्टूबर में भी बढे़ तापमान के कारण इनकी संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है।

मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे इलाकों से हजारों मील का सफर तय कर हरियाणा पहुंचे खूबसूरत ग्रेटर फ्लेमिंगो (राजहंस) के व्यवहार पर पक्षी विशेषज्ञ नजर रखे है। विशेषज्ञों की माने तो ग्रेटर फ्लेमिंगों की संख्या तो इस बार कम है ही, साथ ही इनका व्यवहार भी चौंकाने वाला है।

गुरुग्राम के चंदू वेटलैंड और झज्जर के रामसर स्थल भिंडावास वन्यजीव अभ्यारण्य, भिवानी, चरखी दादरी के बिरही कलां में इन गुलाबी पक्षियों ने डेरा डाल लिया है। आमतौर पर उत्तर भारत में अक्टूबर और नवंबर के महीनों में गुलाबी ठंड की शुरुआत हो जाती है, जो इन विदेशी मेहमानों के अनुकूल होती है।

लेकिन पिछले कुछ सालों में मौसम के बदलते मिजाज के कारण इस सीजन में भी तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर दर्ज किया जा रहा है। इस असामान्य गर्मी ने इन पक्षियों की जैविक घड़ी (बायोलोजिकल क्लाक) को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।

कम वर्षा और तापमान अधिक होने से जलाशयों का पानी तेजी से सूख रहा है, जिससे फ्लेमिंगो के मुख्य भोजन नीले-हरे शैवाल (अलगाई), जलीय कीड़े और क्रस्टेशियंस की भारी कमी हो गई है। ऐसी स्थिति में ये पक्षी सिर्फ जिंदा रहना और भोजन तलाशने को प्राथमिकता दे रहे है।

हरियाणा है उम्मीद
नजफगढ़ वेटलैंड अवैध शिकार, अतिक्रमण और पानी की कमी से पूरी तरह सूखने की कगार पर है। जिस कारण हरियाणा कुछ जिले खासकर चार जिले भिंडावास अभ्यारण्य (झज्जर), चंदू वेटलैंड (गुरुग्राम), बिरही कलां (चरखी दादरी) व भिवानी इन पक्षियों के लिए उम्मीद है। बिरही कलां चरखी दादरी व भिवानी के शांत इलाकों के तालाब और जलभराव वाले मैदान इन पक्षियों के लिए सुरक्षित गढ़ बनकर उभरे है।

3 से 4 महीने का प्रवास, फिर मूक विदाई
वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये ग्रेटर फ्लेमिंगो अगले तीन से चार महीने (लगभग फरवरी या मार्च की शुरुआत तक) हरियाणा में ही रहेंगे। इसके बाद जैसे ही उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा, ये वापस अपने मूल वतन या गुजरात के कच्छ की ओर लौट जाएंगे।

ग्रामीण वेटलैंड्स का संरक्षण जरूरी
प्रवासी पक्षियों खासकर ग्रेटर फ्लैमिंगों को दो फुट तक पानी भरा क्षेत्र पसंद है। पहले हरियाणा में ऐसा काफी क्षेत्र था मगर धीरे-धीरे यह खत्म हो रहा है। खासकर झज्जर, गुरुग्राम, रोहतक के ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार कम वर्षा और अत्यधिक गर्मी के कारण काफी क्षेत्र सूख गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार ये पक्षी एक बार जिस क्षेत्र में आते है, हर बार फिर वहीं आते है। मगर जगह सूखने पर इन्हें मजबूरी में नई जगह तलाशनी पड़ती है। जिससे ये खुद को असुरक्षित महसूस करते है। प्रवासी पक्षियों की संख्या जिस तरह कम हो रही है, ऐसे में विशेषज्ञों ने ग्रामीण वेटलैंड के संरक्षण की मांग उठाई है।

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि हरियाणा सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इन छोटे और ग्रामीण वेटलैंड्स को प्रदूषण, शहरीकरण और मानवीय दखल से तुरंत नहीं बचाया, तो वह दिन दूर नहीं जब ये गुलाबी पक्षी हरियाणा के आसमान से हमेशा के लिए गायब हो जाएंगे।

यह शांत फ्लेमिंगो पक्षी हमें चेता रहा है कि सुधरने का समय अब बहुत कम बचा है। हरियाणा में चरखी दादरी की बिरही कलां में फोरेस्ट लैंड है और झज्जर के डीघल में वेटलैंड है, जिसे संरक्षित किया जा सकता है।

    वेटलैंड लगातार कम हो रही है। डीघल, गुरुग्राम के चंदू वेटलैंड के आसपास के कुछ गांवों में पहले वेटलैंड थी, जो इस बार कम वर्षा और अधिक गर्मी के कारण सूख गई है। प्रवासी पक्षी ग्रेटर फ्लेमिंगो (राजहंस), बतख आ रहे है मगर इन्हें अनुकूल माहौल न मिलने पर ये दूसरी जगह तलाशते है, जो इनके लिए परेशानी भरा है। वेटलैंड को संरक्षित करने की जरूरी है। चरखी दादरी बिरही कलां और डीघल में वेटलैंड है, जिसे संरक्षित किए जाने की जरूरत है। -राकेश अहलावत, पक्षी विशेषज्ञ एवं रिसर्चर अशोका यूनिवर्सिर्टी सोनीपत

 

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