Wednesday, September 23, 2026
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MGM मामले में NMC ने मांगी रिपोर्ट, एंटी-रैगिंग रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे

इंदौर 
एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एमवाय अस्पताल में PG JR-1 डॉ. सिम्मी यादव से कथित रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और अकादमिक दबाव के मामले में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने कॉलेज प्रबंधन से 24 घंटे में पैरावाइज कमेंट और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है। आयोग ने घटना की तत्काल, निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ जांच के निर्देश दिए हैं।

NMC को यह शिकायत डॉ. सिम्मी के भाई कुणाल यादव की ओर से मिली थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सीनियर रेजिडेंट्स ने डॉ. सिम्मी को कथित तौर पर बार-बार प्रताड़ित किया, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और कागजी काम करने के लिए दबाव बनाया।

इंसुलिन की अधिक मात्रा लेने का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि डॉ. सिम्मी ने इंसुलिन की अधिक मात्रा लेकर आत्महत्या का प्रयास किया। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने की बात शिकायत में कही गई है। परिवार के पास घटना से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड होने का भी दावा किया गया है।

NMC ने कॉलेज से घटना की तारीख, समय और परिस्थितियों के साथ यह जानकारी मांगी है कि डॉ. सिम्मी किस स्थिति में मिली थीं और उनकी वर्तमान मेडिकल स्थिति क्या है।

14-15 घंटे ड्यूटी कराने के आरोप की भी जांच
शिकायत में आरोप है कि आधिकारिक रोस्टर में करीब 12 घंटे की ड्यूटी के बजाय डॉ. सिम्मी से कथित तौर पर 14 से 15 घंटे तक काम कराया गया। इसके अलावा पर्याप्त गैर-अकादमिक और कागजी काम सौंपे जाने का भी आरोप लगाया गया है।

NMC ने ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक और अटेंडेंस रिकॉर्ड, ड्यूटी व हैंडओवर रजिस्टर तथा अवकाश रिकॉर्ड मांगे हैं। आयोग ने वास्तविक ड्यूटी अवधि और आधिकारिक रोस्टर के बीच अंतर की जांच करने को भी कहा है।

सार्वजनिक अपमान और धमकी के आरोप
शिकायत में मामूली गलतियों पर कथित सार्वजनिक अपमान, मानसिक उत्पीड़न और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। डॉ. सिम्मी को लगातार टारगेट करने और परिणाम भुगतने की धमकी देने का भी दावा किया गया है।

आयोग ने कॉलेज से पूछा है कि क्या डॉ. सिम्मी ने इससे पहले रैगिंग, उत्पीड़न, अत्यधिक कार्यभार या गैर-अकादमिक काम को लेकर मौखिक अथवा लिखित शिकायत की थी। शिकायत होने पर उसकी कॉपी और उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।

NMC ने डॉ. यशस्वी, डॉ. निकिता और डॉ. श्वेता से जुड़े आरोपों की भी अलग-अलग जांच कर उनका पक्ष और जवाब रिपोर्ट में शामिल करने को कहा है।

HOD को शिकायत की जानकारी थी या नहीं, मांगा जवाब
आयोग ने पूछा है कि कथित शिकायतों की जानकारी विभागाध्यक्ष डॉ. निलेश दलाल को कब और किस माध्यम से दी गई थी। इसके बाद क्या कार्रवाई की गई, काउंसलिंग, मध्यस्थता, चेतावनी या निगरानी जैसी कोई व्यवस्था की गई या नहीं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।

एंटी रैगिंग कमेटी और स्क्वाड की भी जांच
NMC ने कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग स्क्वाड के गठन और कामकाज का ब्योरा मांगा है। इसमें समिति की संरचना, निगरानी व्यवस्था, निरीक्षण व राउंड के रिकॉर्ड, प्राप्त शिकायतें और उन पर हुई कार्रवाई शामिल है।

आयोग ने संबंधित विभाग के PG छात्रों से वरिष्ठ रेजिडेंट्स और फैकल्टी की अनुपस्थिति में गोपनीय बातचीत करने को भी कहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि विभाग में उत्पीड़न, अपमान, धमकी या गैर-अकादमिक काम के दबाव की अन्य शिकायतें तो नहीं हैं।

वॉट्सऐप और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश
NMC ने संबंधित वॉट्सऐप ग्रुप, मैसेज, ईमेल, शिकायतें, ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, हैंडओवर रजिस्टर, अवकाश और अकादमिक रिकॉर्ड समेत सभी संबंधित दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रिकॉर्ड को बदला, हटाया या नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।

शिकायत के कारण अकादमिक नुकसान नहीं हो
NMC ने कॉलेज से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि शिकायत करने या जांच में शामिल होने के कारण डॉ. सिम्मी की PG ट्रेनिंग, अटेंडेंस, फॉर्मेटिव असेसमेंट, थीसिस, परीक्षा पात्रता या अकादमिक प्रगति प्रभावित न हो।

कॉलेज को यह भी बताना होगा कि डॉ. सिम्मी को आगे के उत्पीड़न, धमकी या प्रतिशोध से बचाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग की व्यवस्था का विवरण भी रिपोर्ट में देना होगा।

24 घंटे में दस्तावेजों के साथ देनी होगी रिपोर्ट
NMC ने कॉलेज प्रबंधन से सभी बिंदुओं पर दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ पैरावाइज कमेंट और ATR 24 घंटे के भीतर भेजने को कहा है। जांच के दौरान या उसके बाद डॉ. सिम्मी के खिलाफ किसी तरह की प्रताड़ना, धमकी, प्रतिशोध या प्रतिकूल अकादमिक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आयोग ने जांच में जानकारी देने वाले छात्रों और रेजिडेंट्स की पहचान कानून के दायरे में गोपनीय रखने को कहा है। साथ ही रैगिंग रोकने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और 9 मार्च 2026 के NMC पब्लिक नोटिस के अनुपालन की रिपोर्ट भी मांगी है।

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