Sunday, June 7, 2026
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पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, कहीं बढ़े तो कहीं स्थिर; जानिए आपके शहर में क्या है ताजा रेट

नई दिल्ली

 पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों का ऐलान आज सुबह 6 बजे हो गया है। राहत की बात यह है कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के रेट में आज फिर कोई बढ़ोतरी नहीं की है। आखिरी बार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के द्वारा पिछले हफ्ते शनिवार को इजाफा किया गया था। इसके बाद से ही दाम स्थिर बने हुए हैं। इस बीच इंटरनेशनल मार्केट से अच्छी खबर आई है। कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, युद्ध के पूर्व स्तर से यह अब भी काफी अधिक है।

सबसे महंगा पेट्रोल और डीजल कहां? 
26 मई 2026 के रेट के अनुसार हैदराबाद में पेट्रोल सबसे अधिक रेट पर बिक रहा है। इस शहर में लोगों को एक लीटर पेट्रोल के लिए 115.69 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, डीजल के लिए तिरुअनंतपुरम् में लोगों को 115.49 रुपये प्रति लीटर देने पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ चंडीगढ़ में पेट्रोल का रेट 98.10 रुपये प्रति लीटर है। जोकि दिल्ली सहित अन्य शहरों की तुलना में काफी कम है। बता दें, भुवनेश्वर में डीजल का रेट 100.92 रुपये प्रति लीटर है।

देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल का क्या है रेट? 

दिल्ली – 102.12 रुपये

मुंबई – 111.18 रुपये

कोलकाता – 113.47 रुपये

चेन्नई – 107.77 रुपये

गुरुग्राम – 102.77 रुपये

नोएडा – 102.12 रुपये

बेंगलुरू – 110.93 रुपये

भुवनेश्वर – 109.92 रुपये

चंडीगढ़ – 98.10 रुपये

हैदराबाद – 115.69 रुपये

जयपुर – 112.66 रुपये

लखनऊ – 102.05 रुपये

पटना – 113.35 रुपये

तिरुअनंतपुरम् – 115.49 रुपये

डीजल का क्या चल रहा है रेट? 

नई दिल्ली – 95.20 रुपये

मुंबई – 97.83 रुपये

कोलकाता – 99.82 रुपये

चेन्नई – 99.55 रुपये

गुरुग्राम – 95.444 रुपये

नोएडा – 95.56 रुपये

बेंगलुरू – 98.80 रुपये

भुवनेश्वर – 100.92 रुपये

चंडीगढ़ – 86.09 रुपये

हैदराबाद – 103.82 रुपये

जयपुर – 97.79 रुपये

लखनऊ – 95.55 रुपये

पटना – 99.36 रुपये

तिरुअनंतपुरम् – 104.40 रुपये

4 बार हो सका इजाफा 
मई के महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार इजाफा हो गया है। इस दौरान पेट्रोल और डीजल का रेट करीब 7.5 रुपये बढ़ गया है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बाद से तेल कंपनियों पर कीमतों को बढ़ाने का काफी दबाव था। कीमतों में इजाफे से पहले तेल कंपनियों को हर दिन 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा। जोकि अब 500 करोड़ रुपये से कम हो गया है।

सरकार ने भी कीमतों को संभालने की बहुत कोशिश की। एक्साइज ड्यूटी में कटौती भी की गई। लेकिन जब इंटरनेशनल मार्केट में स्थिति सामान्य नहीं हुई उसके बाद तेल कंपनियों को यह फैसला लेना पड़ा।

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