Thursday, July 30, 2026
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यूपी परिवहन निगम का नया मॉडल: खाली पड़ी जमीनों से बढ़ेगी आय, बनेंगे शिक्षा संस्थान और अस्पताल

लखनऊ 
परिवहन निगम की अनुपयोगी जमीनों का अब सार्वजनिक हित में उपयोग होगा। इसमें कई शहरों में बस स्टेशनों से संचालन बंद हो गया है। ऐसी जमीनों पर अब अस्पताल, वेयर हाउस, शिक्षा संस्थान व होटल आदि बनेंगे। निगम ने पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।

इसे ऐसे समझ सकते हैं लखनऊ में कैसरबाग बस स्टेशन तक बसों के पहुंचने में जगह-जगह भीषण जाम लगता है, अभी इस स्टेशन का विकल्प जानकीपुरम बस स्टेशन तैयार न होने से बसों का जैसे-तैसे संचालन हो रहा, भविष्य में इस जमीन का सार्वजनिक हित में पार्किंग आदि बनाने में उपयोग हो सकता है।

ऐसे ही बाराबंकी व रायबरेली जिले के बस स्टेशनों तक पहुंचना बेहद कठिन होता जा रहा। परिवहन निगम ने फिलहाल देवरिया जिले के गौरी बाजार बस स्टेशन की 3880 वर्ग मीटर भूमि अस्पताल, होटल, शिक्षा संस्थान आदि बनाने के लिए ई-निविदा जारी किया है। यह बस स्टेशन 1993 से स्थायी रूप से बंद था, फ्लाईओवर निर्माण के कारण बसों के अंदर तक न पहुंच पाने की वजह से इसे बंद किया गया था।

बिल्ड यूज ट्रांसफर मॉडल से बदलेगी सूरत
परिवहन निगम ने विभिन्न शहरों में बहुमूल्य लेकिन, वर्षों से अनुपयोगी भूखंडों को रिक्त छोड़ रखा है, इससे वहां पर अवैध कब्जे हो रहे थे। इसे रोकने के लिए निगम ने बिल्ड यूज ट्रांसफर मॉडल तैयार कियालखनऊ है। परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभुनाथ सिंह ने बताया, इस मॉडल में निजी विकासकर्ता को जमीन 35 वर्ष की लीज पर दी जाएगी।

वह जमीन का भूउपयोग परिवर्तन कराकर अस्पताल, होटल, शिक्षा संस्थान आदि बना सकेगा। इसमें निर्माण की सारी प्रक्रिया विकासकर्ता को ही पूरी करनी होगी। लीज पूरी होने पर विकसित संपत्ति निगम को मिलेगी। इससे निगम को एकमुश्त लीज अनुदान और वार्षिक लाइसेंस शुल्क सहित अन्य से आय भी बढ़ेगी।

तीन दर्जन बस स्टेशनों की जमीन चिन्हित
परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक ने बताया, प्रदेशभर में गौरी बाजार की तरह करीब तीन दर्जन बस स्टेशनों को और चिन्हित किया गया है। आगे वहां की निविदा निकाल करके जमीनों का बेहतर उपयोग कराया जाएगा। निगम प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत बस स्टेशनों को नए सिरे से बना रहा है। लखनऊ में विभूतिखंड, चारबाग व अमौसी में कार्य चल रहा है। नया मॉडल पीपीपी से पूरी तरह से अलग है।

 

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