Thursday, October 1, 2026
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नीरू की संघर्ष से सफलता की कहानी, कबड्डी में दो दिन में 3 पदक

जींद.

जब जींद जिले के संगतपुरा गांव की रहने वाली सुदेश देवी बीपीएल राशन कार्ड पर अनाज लेने के लिए घर से निकली थीं तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनकी बेटी सात समंदर पार जापान में तिरंगा फहराने जा रही है। 2026 एशियाई खेलों से आई इस खबर ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।

मां सुदेश ने एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि वे गरीबी रेखा के तहत मिलने वाला राशन लेने जा रही थी तभी उन्हें नीरू के गोल्ड मेडल जीतने का पता चला। एक तरफ राशन लेने की मजबूरी थी तो दूसरी तरफ पोडियम पर सबसे ऊपर खड़ी उनकी बेटी नीरू ढांडा, जिन्होंने एशियाई खेलों की महिला ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

30 में से 28 सटीक निशाने और नया एशियाई रिकॉर्ड
26 साल की नीरू ने निशानेबाजी के फाइनल दौर में जबरदस्त एकाग्रता दिखाई। उन्होंने 30 में से 28 निशाने एकदम सटीक लगाए और नया एशियाई खेल रिकॉर्ड कायम किया। चीन की दिग्गज निशानेबाज सन युनोंग 26 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। नीरू के लिए यह मेडल केवल एक खेल प्रतियोगिता की जीत नहीं है बल्कि उस लंबे आर्थिक और सामाजिक संघर्ष का नतीजा है जिसे उनके परिवार ने सालों तक झेला है।

कबड्डी के मैदान से गन थामने तक की कहानी
नीरू शुरुआत से शूटिंग में नहीं थीं। वे स्कूल और स्टेट लेवल पर कबड्डी खेला करती थीं। साल 2018 में जब उनके चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण ने जकार्ता एशियन गेम्स में सिल्वर जीता, तब नीरू के मन में भी इस खेल को अपनाने का विचार आया। सुदेश देवी ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने बयान में कहा, 'हमारे पास केवल दो एकड़ जमीन और कुछ पशु हैं। नीरू कबड्डी खेलती थी, लेकिन लक्ष्य के पदक जीतने के बाद उसने शूटिंग करने की इच्छा जताई। हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि हम बंदूक खरीद सकें या ट्रेनिंग का खर्च उठा सकें।'

तालाब किनारे टीन के डिब्बों पर साधे शुरुआती निशाने
जब जेब खाली हो तो महंगे खेलों का सपना देखना भी भारी पड़ता है। ऐसे में नीरू के चाचा सोमवीर श्योराण मदद के लिए आगे आए। शुरुआत में नीरू के पास अभ्यास के लिए अपनी राइफल तक नहीं थी इसलिए वे लक्ष्य की गन से ही प्रैक्टिस करती थीं। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए अपने बयान में नीरू ने उस दौर को याद करते हुए कहा, 'मेरे चाचा मुझे एक तालाब के पास ले गए और उन्होंने मुझे टीन के एक छोटे टुकड़े पर निशाना लगाने को कहा। मैंने खुद से कहा कि चलो देखते हैं मैं क्या कर सकती हूं, और मैंने वह टेस्ट पास कर लिया।' इसके बाद वे औपचारिक कोचिंग के लिए मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी (भोपाल) पहुंचीं।

भारतीय सेना में नायब सूबेदार
आज नीरू भारतीय सेना की कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं और महू स्थित आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में अपनी ट्रेनिंग करती हैं। खेल मंत्रालय ने उन्हें TOPS स्कीम के डेवलपमेंट ग्रुप में भी शामिल किया है। 2022 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाली नीरू ने 2025 एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था।

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