Monday, July 27, 2026
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MP UCC Draft: आज रविवार को कैबिनेट की हरी झंडी संभव, विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े बड़े प्रस्ताव

भोपाल 

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को तीन खंडों में तैयार अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। आज  रविवार को जगदीशपुर में प्रस्तावित विशेष कैबिनेट बैठक में यूसीसी के मसौदा विधेयक पर विचार कर उसे मंजूरी दिए जाने की संभावना है। इसके बाद सरकार मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। 

कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगे क्या होगा?
यदि कैबिनेट मसौदे को मंजूरी देती है तो कानून विभाग अंतिम विधेयक तैयार करेगा। इसके बाद इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद ही यूसीसी प्रदेश में लागू होगी। 

समिति की प्रमुख सिफारिशें
समिति की अंतिम रिपोर्ट में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके लिए विवाह के बाद एक से दो माह की समय-सीमा निर्धारित करने की सिफारिश है। मसौदे में यह भी प्रस्ताव है कि तलाक केवल न्यायालय की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मान्य होगा। मौखिक तलाक को कानूनी मान्यता नहीं देने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, पति या पत्नी के जीवित रहते तथा वैधानिक तलाक के बिना दूसरी शादी को अपराध की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव भी शामिल है। 

लिव-इन रिलेशनशिप पर क्या है प्रस्ताव?
प्रस्तावित यूसीसी मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रार के समक्ष पंजीकरण अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। बिना पंजीकरण के साथ रहने को दंडनीय बनाने का भी प्रस्ताव है। साथ ही लिव-इन संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों को पैतृक संपत्ति में वैधानिक अधिकार देने की सिफारिश भी रिपोर्ट में की गई है। 

आदिवासियों को दायरे से बाहर रखने का सुझाव
समिति ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि गुजरात और उत्तराखंड में भी आदिवासी समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।

तीन खंडों में तैयार हुई अंतिम रिपोर्ट
समिति की रिपोर्ट तीन अलग-अलग खंडों में तैयार की गई है। पहले खंड में यूसीसी लागू करने से संबंधित सिफारिशें हैं, जिन्हें देश-विदेश के कानूनों तथा मध्य प्रदेश की मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। यह भाग 10 अध्यायों में विभाजित है। दूसरे खंड में यूसीसी का मसौदा विधेयक शामिल है, जिसमें 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां हैं। तीसरे खंड में जिला स्तरीय बैठकों, राज्य स्तरीय परामर्श और ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त जनसुझावों तथा आपत्तियों का संकलन और विश्लेषण किया गया है।

9.58 लाख से अधिक सुझाव मिले
सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी।  समिति को 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। ये सुझाव जिला स्तरीय बैठकों, राज्य स्तरीय परामर्श और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लिए गए। अंतिम रिपोर्ट में इन सुझावों का विषयवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है।

यूसीसी पर सियासत भी तेज- 
– समान कानूनी अधिकार देना उद्देश्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार उपलब्ध कराना, महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना और पारिवारिक कानूनों में एकरूपता लाना है। मुख्यमंत्री लगातार कांग्रेस से यूसीसी पर अपना रुख स्पष्ट करने की बात कह रहे हैं।
 
– मुद्दो से ध्यान भटकाने यूसीसी ला रही सरकार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार यूसीसी की आड़ में प्रदेश के महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, युवाओं को रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। 

 

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