Wednesday, August 12, 2026
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दूध की जगह वनस्पति से बने पनीर पर MP में बैन, मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला; जानें क्या है एनालॉग पनीर

भोपाल
 मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एमपी में एनालॉग पनीर पर बैन लगा दिया है। साथ ही सीएम मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में प्राकृतिक दूध के उत्पादों को ही हम प्रोत्साहित करेंगे। देश के दूसरे राज्यों ने भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया है।

एनालॉग बैन पर पूरी तरह से प्रतिबंध
मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर पर बैन लग गया है। इस तरह का पनीर बनाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। सीएम मोहन यादव ने साफ कर दिया है कि वे राज्य में प्राकृतिक पनीर को ही प्रोत्साहित करेंगे। एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को हतोत्साहित किया जाएगा।

हम प्राकृतिक पनीर बनाएंगे
उन्होंने कहा कि हमने ये निर्णय किया है कि मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री को हतोत्साहित करेंगे। इस पर प्रतिबंध लगाएंगे। देश के अन्य राज्यों में भी इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। हमारे यहां प्राकृतिक दूध के उत्पाद हैं हम प्राकृतिक पनीर बनाएंगे। हम इन उत्पादों के बलबूते पर राज्य की पहचान बनाएंगे।

बता दें कि एनालॉग पनीर को असली दूध से बने पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है। इसमें दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कम कीमत के कारण बाजार में इसकी खपत तेजी से बढ़ी है।

मुख्यमंत्री ने कहा मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर हम प्रतिबंध लगा रहे हैं। जैसा अन्य राज्यों ने लगाया है। हम प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन को बढ़ाएंगे और प्राकृतिक रूप से ही पनीर बनाएंगे।

बिल्कुल बढ़ावा नहीं देंगे
मोहन यादव ने कहा कि हम दूध का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे चल रहे हैं। एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को हम बढ़ावा नहीं देंगे।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में देश में एनालॉग पनीर की चर्चा शुरू हो गई है। इसका निर्माण आर्टिफिशियल तरीके से की जाती है। मध्य प्रदेश की कंपनी का माल हाल ही में रायपुर में सीज किया गया था। साथ ही एनालॉग पनीर का आरोप लगाया था। लेकिन जांच रिपोर्ट में क्लिनचिट मिल गई थी।

रोज 300 से 400 क्विंटल की खपत का अनुमान
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की रोजाना आवक और बिक्री करीब 300 से 400 क्विंटल होने का अनुमान है। इस हिसाब से प्रदेश में हर महीने करीब 9 हजार से 12 हजार क्विंटल, यानी 900 से 1200 टन एनालॉग पनीर खपने की बात सामने आई है। बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री को देखते हुए सरकार ने अब इस पर सख्ती का निर्णय लिया है।

मानवाधिकार आयोग ने भी जताई नाराजगी
एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने भी नाराजगी जताई है। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों को पत्र लिखने का फैसला किया है। आयोग की ओर से राज्यों से इस तरह के उत्पाद की बिक्री और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर जानकारी मांगे जाने की संभावना है।

आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एनालॉग पनीर घातक है। इसके लिए एफएसएसएआई को नोटिस देकर पूछ रहे हैं कि इस तरह के पनीर को बेचने की इजाजत क्यों दे रहे हैं।

कानूनगो ने कहा कि अगर सिगरेट के ऊपर लिख देते हैं कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो क्या यह हानि करना बंद कर देता है। जब तीन राज्यों की सरकार ने अच्छा निर्णय लिया है तो इस पर अन्य राज्यों को भी निर्णय लिया जाना चाहिए। सिर्फ एरोबिक स्टार्च वाला टेस्ट करने से एनालॉग पनीर पकड़ में नहीं आता है।

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