Monday, July 27, 2026
Google search engine
Homeराज्यरेलवे का बड़ा तकनीकी अपग्रेड! होडल-शोलाका रेलखंड पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग से बढ़ेगी...

रेलवे का बड़ा तकनीकी अपग्रेड! होडल-शोलाका रेलखंड पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग से बढ़ेगी सुरक्षा और ट्रेनों की स्पीड

पलवल
 उत्तर मध्य रेलवे के आगरा मंडल ने दिल्ली–मथुरा रेल मार्ग पर यात्री सुविधाओं और रेल संचालन को अधिक सुरक्षित एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मंडल ने होडल–शोलाका रेलखंड की तीसरी एवं चौथी लाइन पर 10.34 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली का सफलतापूर्वक संचालन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही भूतेश्वर से शोलाका तक कुल 61 किलोमीटर रेलखंड पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली लागू हो गई है। अब एक साथ कई ट्रेनें सुरक्षित रेलवे ट्रैक पर दौड़ सकेगी।

क्या है रेलवे का एबीएस सिस्टम
रेल अधिकारियों ने बताया कि ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली (ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग) रेलवे की एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें दो स्टेशनों के बीच ट्रैक को छोटे-छोटे हिस्सों ('ब्लॉक') में बांटा जाता है। ट्रेन के आगे बढ़ने पर सिग्नल बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित रूप से लाल या हरे हो जाते हैं। इससे एक ही ट्रैक पर कई ट्रेनें सुरक्षित रूप से एक-दूसरे के पीछे चल सकती हैं

यह सिस्टम ऐसे करती है काम
रेल अधिकारियों ने बताया कि पटरियों में बिजली के सेंसर लगे होते हैं। जब ट्रेन ट्रैक से गुजरती है, तो उसके पहियों की मौजूदगी से सर्किट पूरा हो जाता है जिससे सिग्नल अपने आप लाल हो जाता है। जैसे ही ट्रेन आगे बढ़ती है और ट्रैक खाली हो जाता है और सिग्नल वापस हरा हाे जाता है। इस सिस्टम के शुरू होने से ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। एक ही ब्लॉक में एक के पीछे एक कई ट्रेनें चल सकती हैं। इस सिस्टम से स्टेशन मास्टर के मैनुअल सिग्नल देने पर निर्भर नहीं करता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है। इसके अलावा ट्रेनों को स्टेशनों पर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता और यात्रा का समय घटता है।

ट्रेनों को चलाने में ये होगा फायदा
उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत आधुनिक इंटीग्रेटेड पावर सप्लाई (आईपीएस), फायर अलार्म यूनिट तथा शोलाका यार्ड का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। अब यहां वीडियो डिस्प्ले यूनिट (वीडीयू) आधारित संचालन और रीसेटिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। तीसरी एवं चौथी लाइन पर पहले लागू एब्सलूट ब्लॉक वर्किंग प्रणाली को हटाकर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली लागू कर दी गई है। नई प्रणाली लागू होने से एक ही ट्रैक पर सुरक्षित तरीके से एक से अधिक ट्रेनों का संचालन संभव होगा। ट्रेनों को अगले स्टेशन से लाइन क्लियर मिलने की प्रतीक्षा कम करनी पड़ेगी, जिससे अनावश्यक ठहराव घटेगा और समयपालन में सुधार होगा।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments