Tuesday, July 14, 2026
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पंजाब में शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा पर बड़ा कदम, हाई कोर्ट के निर्देश पर फायर ऑडिट और इमरजेंसी इंतजामों की जांच

चंडीगढ़
 पंजाब में स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा शुरू हो गई है। राज्य सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को 10 अगस्त तक फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं पर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।

सेफ्टी आडिट की रिपोर्ट पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में पेश की जानी है बीते दिनों आडिट करने करवाने के निर्देश कोर्ट की ओर से दिए गए थे। इसके बाद आडिट का काम शुरू हो गया है इसके तहत सरकारी, निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में उपलब्ध सुरक्षा इंतजामों का आकलन किया जा रहा है।

हाल ही में लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना के बाद शैक्षणिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी के मद्देनजर पंजाब में भी यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं मौजूद हों।

ऑडिट के दौरान अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता, फायर अलार्म सिस्टम, हाइड्रेंट व्यवस्था, आपातकालीन निकास मार्ग, बिजली व्यवस्था और भवनों में सुरक्षा मानकों के पालन की जांच की जा रही है।

पंजाब के बड़े शहरों लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, पटियाला, मोहाली और बठिंडा में बड़ी संख्या में निजी स्कूल और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर संचालित हैं। इनमें प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इन संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता माना जा रहा है।

राष्ट्रीय भवन संहिता (नेशनल बिल्डिंग कोड) के अनुसार किसी भी स्कूल या शैक्षणिक संस्थान को मान्यता अथवा संबद्धता देने से पहले निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। पहले से संचालित संस्थानों में भी अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित निकास मार्ग और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं।

हाल के निरीक्षणों में देश के कुछ कोचिंग संस्थानों में गंभीर कमियां सामने आई थीं। कई जगह आपातकालीन निकास के संकेतक नहीं मिले, खिड़कियां लोहे की ग्रिल से बंद थीं, बेसमेंट में कक्षाएं संचालित हो रही थीं तथा फायर अलार्म और हाइड्रेंट सिस्टम काम नहीं कर रहे थे। कई संस्थानों में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता मिला, जो किसी भी आपात स्थिति में बड़ा जोखिम बन सकता है।

पंजाब में तैयार की जा रही रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि राज्य के स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा मानकों का कितना पालन हो रहा है। जिन संस्थानों में कमियां पाई जाएंगी, वहां उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। 10 अगस्त तक संबंधित विभागों को अपनी स्थिति रिपोर्ट सौंपनी है।

हाई कोर्ट ने अग्नि सुरक्षा पर स्थिति रिपोर्ट मांगी 

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों के साथ-साथ पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL), चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVNL) को स्कूलों और कोचिंग केंद्रों के लिए अग्नि सुरक्षा उपायों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह रिपोर्ट 10 अगस्त तक जमा करनी होगी।

यह आदेश अधिवक्ता कंवर पाहुल सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर आया है। याचिका में चंडीगढ़ ट्रिब्यून की 24 जून की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसका शीर्षक है "अचानक निरीक्षण में अग्नि सुरक्षा संबंधी खामियां उजागर"। इस लेख में नगर निगम के अग्निशमन एवं बचाव सेवा विभाग द्वारा सेक्टर 34 के कोचिंग केंद्रों के अचानक निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों का विस्तृत वर्णन किया गया है। लखनऊ के एक कोचिंग केंद्र में हाल ही में हुई आग की घटना के बाद, संयुक्त आयुक्त-सह-मुख्य अग्निशमन अधिकारी डॉ. इंदरजीत और स्टेशन अग्निशमन अधिकारियों की देखरेख में यह अभियान चलाया गया था।

निरीक्षकों ने पाया कि कक्षाओं में निकास के संकेत नहीं थे, खिड़कियाँ लोहे की ग्रिलों से अवरुद्ध थीं और भवन नियमों के विरुद्ध तहखानों में कक्षाएँ चलाई जा रही थीं। अग्नि सुरक्षा अलार्म और जल निकासी व्यवस्था या तो काम नहीं कर रही थी या बंद थी, और चाबियाँ गायब थीं। अधिकांश केंद्रों में प्रवेश और निकास द्वार एक ही थे। जिन संस्थानों का निरीक्षण किया गया उनमें हेलिक्स, एलन, श्री चैतन्य अकादमी, एलेक्स, हेड मास्टर्स, नारायण और पीडब्ल्यू विद्यापीठ शामिल थे।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पहले ही निर्देश दे दिया है कि मान्यता या संबद्धता देने से पहले स्कूलों द्वारा राष्ट्रीय भवन संहिता का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। मौजूदा स्कूलों को छह महीने के भीतर अग्निशमन उपकरण लगाने का आदेश दिया गया था।

सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को उच्च और निम्न तनाव वाली बिजली लाइनों के अंतर्गत आने वाली संपत्तियों की पहचान करने के लिए सर्वेक्षण करना चाहिए और मालिकों को सुरक्षा जोखिमों और कानूनी दायित्वों के बारे में नोटिस जारी करना चाहिए।

इससे पहले, पंजाब राज्य और चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश) मानवाधिकार आयोग ने भी इसी समाचार रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था। इसने पंजाब और चंडीगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों को अग्नि सुरक्षा मानदंडों को लागू करने, सभी प्रतिष्ठानों से अग्नि सुरक्षा एनओसी प्राप्त करने और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

 

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