Thursday, September 10, 2026
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NCR में अवैध बस्ती पर बड़ी कार्रवाई, 10 हजार मकानों वाले इलाके में पहुंचा बुलडोजर दस्ता

फरीदाबाद

फरीदाबाद की सघन बस्ती नेहरू कॉलोनी में बड़ा बुलडोजर ऐक्शन बुधवार सुबह शुरू हो गया। नगर निगम ने दल-बल के साथ अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। 6 जेसीबी और एक बड़ी मशीन की मदद से मकानों को हटाया जा रहा है। उधर, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग उठाते हुए कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों की ओर से अभी यह जानकारी नहीं दी गई है कि कुल कितने मकानों को तोड़ा जाएगा।

चारों ओर से रास्ते बंद, लोगों की आवाजाही प्रभावित
बुधवार सुबह करीब सात बजे शुरू हुई कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने नेहरू कॉलोनी की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों को बंद कर दिया। मेट्रो रोड, सैनिक कॉलोनी, बिजली दफ्तर मार्ग, मुल्ला होटल क्षेत्र और तारण नंबर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। रास्ते बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ दफ्तर जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।

छह जेसीबी और बड़ी मशीन से हटाए जा रहे निर्माण
नगर निगम की टीम ने भारी मशीनरी के साथ अभियान चलाया। मौके पर छह जेसीबी और एक बड़ी तोड़फोड़ मशीन लगाई गई है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। कार्रवाई के दौरान निगम अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी रही। किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है।

वर्षों से बसी कॉलोनी, हजारों परिवारों पर असर
नेहरू कॉलोनी पुनर्वास विभाग की भूमि पर विकसित हुई बस्ती मानी जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां करीब दस हजार मकान बने हुए हैं और लगभग पांच लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र से जुड़े हैं। कॉलोनी में वर्षों से परिवार रह रहे हैं। पिछले वर्ष पुनर्वास विभाग की ओर से निवासियों को नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि नोटिस के बाद आगे कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। एक वर्ष बाद अब नगर निगम ने दोबारा अभियान शुरू किया है, जिससे बड़ी संख्या में परिवारों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और निगम की दलील
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। अदालत ने सड़कों, सार्वजनिक भूमि और ग्रीन बेल्ट पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। निगम का यह भी कहना है कि क्षेत्र में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए भूमि को खाली कराना आवश्यक है। इसी आधार पर अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की जा रही है।

पुनर्वास की मांग पर उठे सवाल
प्रभावित लोगों का कहना है कि इससे पहले इलाके में बने धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई हो चुकी है और संबंधित भूमि को भी खाली कराया जा चुका है। उनका सवाल है कि अब आवासीय मकानों को तोड़ने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। लोगों का कहना है कि वे वैकल्पिक व्यवस्था मिलने पर मकान खाली करने को तैयार हैं। मंगलवार को प्रभावित परिवारों का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से भी मिला था और पुनर्वास की मांग रखी थी। निवासियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भावना के अनुरूप विस्थापित परिवारों के पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

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