Sunday, June 21, 2026
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करनाल के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, बिना मिट्टी 60 मिनी ट्यूबर देने वाला आलू पौधा तैयार

करनाल

धान, गेहूं को छोड़ प्रदेश का किसान सब्जी और बागवानी की ओर बढ़ रहा है। कुछ सालों से आलू की खेती में किसानों का रुझान बढ़ रहा है। किसान की आय बढ़ाने के लिए शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र (पीटीसी) ने ऐरोपोनिक तकनीक अपना सफल शोध किया है।

इस तकनीक से एक पौधे से 60 मिनी ट्यूबर (बीज के आलू) मिलेंगे। आलू बीज उत्पादन में आई यह क्रांति कई बड़े राज्यों के लिए गेम चेंजर साबित होगी।

हरियाणा अब उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों की बीज की जरूरत को पूरा करेगा। प्रदेश में करीब 34 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। इसमें पांच प्रमुख किस्में कुफरी उदय, पुखराज, कुफरी मोहन, कुफरी चिपसोना व कुफरी सूर्या, आनंद, पुष्कर शामिल हैं।

शामगढ़ केंद्र में आलू की नई किस्म "कुफरी उदय" पर शोध किया गया। इस किस्म के पौधों में ट्यूबर बनने की रफ्तार भी सबसे अधिक पाई गई। साथ ही, मिट्टी में न होने के कारण यह बीज शत-प्रतिशत फंगस रहित, बैक्टेरिया और वायरस मुक्त है।

यह है एरोपोनिक तकनीक एरोपोनिक तकनीक खेती की एक आधुनिक विधि है, जिसमें पौधों की जड़ें मिट्टी या पानी के बजाय हवा में रहती हैं। इससे कम पानी, कम जगह में तेज वृद्धि और अधिक उत्पादन मिलता है।

क्या है एरोपोनिक तकनीक?
इस तकनीक में पौधे को हवा में लटकाकर कंप्यूटर नियंत्रित मशीनों से जड़ों में पोषक तत्वों की बौछारें की जाती हैं। इस व्यवस्था से बीज उत्पादन में सात गुना यानी एक पौधे से बीज के 60 आलू मिले हैं। जबकि परंपरागत और नेट हाउस के अंदर प्रति पौधा केवल आठ मिनी ट्यूबर का उत्पादन ही हो पाता था।

नए रिकॉर्ड से उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों की बीज की जरूरत को पूरा करेगा हरियाणा
मिट्टी और कोकोपिट के बिना कुफरी उदय किस्म में एरोपोनिक तकनीक से शोध में आए सुखद परिणाम
कृषि की इस तकनीक से हरियाणा में सात गुना बढ़ेगा आलू के बीज का उत्पादन
    आठ आलू अब तक एक पौधे से मिलते हैं।
    34 हजार हेक्टेयर में प्रदेश में होती है आलू की खेती।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैलेगा नेटवर्क
शामगढ़ आलू प्रौद्योगिकी केंद्र करीब 4500 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाला आलू बीज दूसरे राज्यों को भेज रहा है। नए शोध में प्रति पौधा 60 मिनी ट्यूबर मिलने के बाद केंद्र की बीज उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ेगी।

अब देश की सबसे बड़ी आलू उत्पादक बेल्ट वाले राज्यों को कवर करने की योजना तैयार की जा रही है। अब हरियाणा अपने किसानों की जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दूसरे बड़े राज्यों के किसानों को बड़े पैमाने पर आलू बीज देने में पूरी तरह सक्षम होगा।

एरोपोनिक तकनीक में एक पौधे से 60 मिनी ट्यूबर प्राप्त होना हमारे लिए मील का पत्थर है। इससे पहले के शोध में हम केवल 40 मिनी ट्यूबर ही उगाने में कामयाब हो पा रहे थे, लेकिन हमारे विज्ञानियों के गहन अध्ययन, सटीक न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट और निरंतर प्रयास से यह बड़ी सफलता मिली है। क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी और हम दूसरे राज्यों के लिए बीज उपलब्धता के साथ-साथ निर्यात करने की स्थिति में आ सकते हैं। -डॉ. मनोज भानुकर, उप निदेशक, आलू प्रौद्योगिकी केंद्र शामगढ़ करनाल।

 

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