Tuesday, August 4, 2026
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लीफ वेबर-गाल मिज से घट सकता है आम उत्पादन, नियमित निगरानी और छंटाई जरूरी

समस्तीपुर
 जिले के आम बागानों में इन दिनों लीफ वेबर और गाल मिज कीट का प्रकोप बढ़ने लगा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय रहते इन कीटों की पहचान कर समेकित प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है।

उनका कहना है कि यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो पौधों की वृद्धि प्रभावित होने के साथ उत्पादन में भी कमी आ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लीफ वेबर आम का प्रमुख क्षतिकारक कीट है, जो दिसंबर तक सक्रिय रहता है। यह पत्तियों और कोमल टहनियों को जाले के सहारे जोड़कर अपना आश्रय बना लेता है। इसके नवजात लार्वा अत्यंत आक्रामक होते हैं और पत्तियों की हरी सतह को खुरचकर खाते हैं।

अधिक प्रकोप होने पर पुरानी पत्तियों में केवल मध्य शिरा बचती है तथा पत्तियां सूखकर भूरे रंग की हो जाती हैं। इससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है और उनकी वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

वहीं, गाल मिज कीट भी आम के बागानों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इसके पिल्लू पत्तियों और कोमल टहनियों के भीतर रहकर नुकसान पहुंचाते हैं। इनके प्रकोप से फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है तथा लगे हुए फल समय से पहले गिरने लगते हैं।

इस कीट के पिल्लू पीले रंग के होते हैं और पूर्ण विकसित होने के बाद भूमि में जाकर प्यूपा का रूप धारण कर लेते हैं।

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से बागानों का नियमित निरीक्षण करने, संक्रमित पत्तियों और टहनियों को काटकर नष्ट करने तथा आवश्यकता पड़ने पर कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार ही कीटनाशकों का प्रयोग करने की अपील की है।

बागानों की नियमित देखभाल से घटेगा कीटों का प्रकोप:
सहायक निदेशक (पौधा संरक्षण) राजीव कुमार रजक ने बताया कि किसान प्रत्येक माह बागानों का निरीक्षण करें तथा जनवरी में गहरी जुताई अवश्य कराएं। संक्रमित पत्तियों और टहनियों को तोड़कर नष्ट करें और बागानों में पर्याप्त धूप व वायु संचार बनाए रखने के लिए नियमित छंटाई करें।

आवश्यकता के अनुसार, लाइट ट्रैप का भी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अधिक आर्द्रता वाले क्षेत्रों में जैविक नियंत्रण के तहत ब्यूवेरिया बेसियाना अथवा बैसिलस थुरिनजिएंसिस का प्रयोग प्रभावी हो सकता है।

वहीं, रासायनिक नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन, बागानों को खरपतवार एवं सूखी शाखाओं से मुक्त रखना तथा संक्रमित शाखाओं की समय पर छंटाई भी कीट प्रबंधन के लिए जरूरी है।

कृषि विभाग ने किसानों से निर्धारित मात्रा में ही अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करने की अपील की है।

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