Saturday, June 13, 2026
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भोपाल में होटल सुरक्षा भगवान भरोसे: नियमों की अनदेखी, बेसमेंट किचन बने जोखिम का कारण

भोपाल
 दिल्ली के एक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद देशभर में अग्नि सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. इधर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जमीनी हकीकत भी बेहद डरावनी और चिंताजनक है. दरअसल शहर में सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर करीब 3200 होटल और रेस्टोरेंट धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से लगभग 99 प्रतिशत संस्थानों के पास वैध फायर एनओसी तक नहीं है. ऐसे में यदि आज किसी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान में आग लग जाए, तो वहां मौजूद सैकड़ों ग्राहकों और कर्मचारियों की जान बचाना मुश्किल होगा। 

राजधानी में महज 38 संस्थानों के पास वैधानिकता
​नगर निगम और प्रशासनिक रिकार्ड के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भोपाल में संचालित करीब 3,200 होटल और रेस्टोरेंट में से सिर्फ 38 संस्थानों के पास ही वैध फायर एनओसी उपलब्ध है. जबकि बाकी के हजारों प्रतिष्ठान बिना किसी ठोस फायर प्लान की स्वीकृति के चल रहे हैं. हालांकि आबकारी विभाग से अनुमति प्राप्त लगभग 75 बारों को जरूर फायर सेफ्टी के दायरे में लाया गया है, लेकिन इसके अलावा एक बहुत बड़ी संख्या ऐसी है जो पूरी तरह से रामभरोसे संचालित हो रही है। 

​नियमों की उड़ रहीं धज्जियां, बेसमेंट में धधक रहे किचन
​अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुसार किसी भी बिल्डिंग का बेसमेंट सिर्फ पार्किंग या स्टोरेज के उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है. वहां कमर्शियल किचन चलाने की सख्त मनाही है. इसके बावजूद भोपाल के एमपी नगर, शाहपुरा, पुराने भोपाल, नर्मदापुरम रोड और संत हिरदाराम समेत अन्य इलाकों में अधिकांश होटलों और रेस्टोरेंटों के बेसमेंट में 10 से 50 कर्मचारियों की मौजूदगी में गैस चूल्हे और भारी-भरकम एलपीजी सिलेंडर धधक रहे हैं. सबसे खतरनाक बात यह है कि कई होटलों में एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग रास्ते तक नहीं हैं. आगजनी की स्थिति में ऐसी जगहों से बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है। 

​स्वतंत्र फायर एक्ट का अभाव, कार्रवाई करने में बंधे हाथ
विशेषज्ञ बताते हैं कि ​भोपाल नगर निगम के पास वर्तमान में कोई स्वतंत्र और कड़ा फायर एक्ट लागू नहीं है. इस कानूनी कमजोरी के कारण जिम्मेदार अधिकारी नियमों का उल्लंघन करने वाले होटल मालिकों पर सीधे सख्त दंडात्मक कार्रवाई या भारी जुर्माना लगाने से कतराते हैं. वहीं जांच के नाम पर केवल नोटिस जारी करने की रस्म अदायगी की जाती है, जिसका फायदा उठाकर रसूखदार संचालक बिना किसी डर के अपना कारोबार जारी रखते हैं। 

​संकरी गलियां और अतिक्रमण, दमकल वाहनों का पहुंचना भी मुश्किल
बता दें कि ​भोपाल के पुराने और घने बाजारों जैसे लखेरापुरा, हमीदिया रोड और चौक बाजार इलाके में स्थिति और भी बदतर है. इन क्षेत्रों में संकरी गलियों, बेतरतीब खड़े वाहनों और दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण के कारण आपातकालीन स्थिति में दमकल की गाड़ियों का घटना स्थल तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है. हाल ही में हमीदिया रोड स्थित एक होटल के कमरों में शार्ट सर्किट से लगी आग के दौरान तंग रास्तों के कारण दमकल कर्मियों को राहत कार्य में भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। 

'​जांच के बाद होगी कार्रवाई'
​इस मामले में नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन का कहना है, "निगम की टीमें समय-समय पर शहर के व्यावसायिक परिसरों में उपलब्ध फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच करती हैं. जिन होटलों, रेस्टोरेंटों या बेसमेंट संचालकों के पास वैध एनओसी नहीं पाई जाएगी, उन्हें चिह्नित कर नोटिस दिए जा रहे हैं और नियमों का कड़ाई से पालन न करने पर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। 

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