Thursday, August 13, 2026
Google search engine
Homeराज्यहरियाणा में 1.20 लाख HKRN कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ीं, नई पॉलिसी पर...

हरियाणा में 1.20 लाख HKRN कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ीं, नई पॉलिसी पर टिकी निगाहें

 चंडीगढ़
 सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरियाणा की पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के कार्यकाल की 16 जून 2014 और 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीतियों को वैध ठहराए जाने के बाद प्रदेश में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का मुद्दा फिर गरमा गया है।

कर्मचारी संगठनों ने नायब सिंह सैनी सरकार पर नई रेगुलराइजेशन पॉलिसी बनाने और लंबे समय से अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने का दबाव बढ़ा दिया है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने ग्रुप बी, सी और डी कर्मचारियों के लिए वर्ष 2014 में तीन नियमितीकरण नीतियां बनाई थीं। 16 जून 2014 की पॉलिसी में 30 जून 2014 तक तीन साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को निर्धारित शर्तों के तहत नियमित करने का प्रविधान था।

18 जून 2014 की पॉलिसी में 17 जून 1997, पांच नवंबर 1999 तथा एक अक्टूबर 2003/10 फरवरी 2004 से संबंधित बचे मामलों पर विचार का प्रविधान किया गया था।

इन दोनों नीतियों के अलावा सात जुलाई 2014 की पॉलिसी में 31 दिसंबर 2018 तक 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का प्रविधान किया गया था। इन नीतियों के तहत दो दर्जन से अधिक विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों और विश्वविद्यालयों में करीब पांच हजार कर्मचारी नियमित किए गए थे।

हाईकोर्ट के फैसले से अटकी थी प्रक्रिया
योगेश त्यागी ने तीनों नीतियों को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सीडब्ल्यूपी 17206/2014 दायर की थी। हाईकोर्ट ने 31 मई 2018 को तीनों नीतियों को अवैध करार देते हुए रद कर दिया था।

इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी 31566/2018 दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवंबर को स्टे दिया और बाद में 16 अप्रैल को अपने फैसले में 16 जून और 18 जून 2014 की नीतियों को वैध, जबकि सात जुलाई 2014 की नीति को असंवैधानिक करार दिया।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर यह है कि जिन कर्मचारियों को वैध ठहराई गई दोनों नीतियों के तहत नियमित किया गया था, उनकी नियमित नियुक्तियों को कानूनी आधार मिल गया है। वहीं सात जुलाई की नीति के तहत नियमित होने वाले कर्मचारियों की संख्या नगण्य बताई गई है, क्योंकि हाईकोर्ट में चुनौती के बाद इसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन के लिए विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों और विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं। सात जुलाई की नीति के तहत नियमित हुए कर्मचारियों को भी नौकरी की सुरक्षा देते हुए न्यूनतम वेतन देने के आदेश दिए गए हैं।

अब नई पॉलिसी पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारी संगठन इसे नई नियमितीकरण नीति के लिए महत्वपूर्ण आधार मान रहे हैं। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री और महासचिव कृष्ण कुमार नैन ने कहा कि कर्मचारियों को केवल जाब सिक्योरिटी नहीं, बल्कि नियमितीकरण चाहिए और इसके लिए निर्णायक आंदोलन किया जाएगा।

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि फैसले के बाद सरकार के सामने रेगुलराइजेशन पॉलिसी बनाने की कोई कानूनी अड़चन नहीं है। उन्होंने हरियाणा कौशल रोजगार निगम को भंग कर उसमें पंजीकृत 1.20 लाख कर्मचारियों, अनुबंध शिक्षकों तथा अन्य पार्ट टाइम और अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने की अविलंब नीति बनाने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा असर

  • 16 जून 2014 की नियमितीकरण नीति वैध
  • 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति वैध
  • 7 जुलाई 2014 की नीति असंवैधानिक
  • वैध नीतियों के तहत नियमित हुए कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा

अब सरकार के सामने प्रमुख मांगें

  • नई नियमितीकरण नीति घोषित हो
  • 1.20 लाख एचकेआरएन कर्मियों पर फैसला हो
  • अनुबंध शिक्षकों और अन्य कच्चे कर्मचारियों को नियमित किया जाए
  • पंजाब सिक्योरिटी के बजाय नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments