Thursday, June 25, 2026
Google search engine
Homeदेशभारत-अमेरिका के बीच जल्द हो सकता है ऐतिहासिक समझौता, व्यापार को मिलेगा...

भारत-अमेरिका के बीच जल्द हो सकता है ऐतिहासिक समझौता, व्यापार को मिलेगा बड़ा बूस्ट

नई दिल्ली

भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. दोनों देश एक बेहद ऐतिहासिक और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी बेथनी पोलोस मॉरिसन ने कैपिटल हिल में आयोजित 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' के एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी समझौते का मुख्य उद्देश्य साल 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर के पार पहुंचाना है. इस रणनीति को 'मिशन 500' का नाम दिया गया है। 

परिणाम-उन्मुख संबंधों पर जोर
अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में दोनों देश अब केवल बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका ध्यान सीधे परिणामों पर केंद्रित है. फरवरी 2026 में व्यापार समझौते की दिशा में की गई आधिकारिक घोषणा के बाद से दोनों देशों की टीमों ने इस पर दिन-रात काम किया है. इस समझौते के लागू होने से अमेरिकी निर्यातकों के लिए भारत का 140 करोड़ (1.4 बिलियन) उपभोक्ताओं वाला विशाल बाजार पूरी तरह खुल जाएगा, जो दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा। 

क्या है समझौते की प्रमुख बातें?
500 अरब डॉलर की भारतीय खरीद: इस समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, कोकिंग कोल और अत्याधुनिक तकनीकी उत्पाद खरीदने की योजना बना रहा है। 

ऊर्जा साझेदारी में उछाल: दोनों देशों के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार 2025 से तेजी से बढ़ा है और यह 14.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. साथ ही नए 'शांति अधिनियम' के तहत दोनों देश नागरिक परमाणु सहयोग बढ़ाने की राह तलाश रहे हैं। 

रिकॉर्ड भारतीय निवेश: आर्थिक मोर्चे पर भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में भारी निवेश कर रही हैं. हाल ही में हुए 'SelectUSA इन्वेस्टमेंट समिट' में भारतीय कंपनियों द्वारा 20 अरब डॉलर के नए निवेश की प्रतिबद्धताएं जताई गईं, जो अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी निवेश घोषणाओं में से एक है। 

टैरिफ नीति में बदलाव के बाद नए सिरे से बातचीत
हाल ही में अमेरिकी टैरिफ नीतियों में आए बड़े बदलावों और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस समझौते के ढांचे को फिर से समायोजित किया जा रहा है. इसी सिलसिले में अमेरिकी मुख्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर नई दिल्ली के दौरे पर हैं, जहां वे भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ इस समझौते के आखिरी हिस्सों को सुलझाने के लिए गहन बातचीत कर रहे हैं. दोनों पक्षों की कोशिश है कि 24 जुलाई 2026 से पहले (जब अमेरिका का अस्थायी 10% टैरिफ समाप्त हो रहा है) एक अंतरिम व्यापार समझौते को लागू कर दिया जाए. भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देश अगले महीने यानी जुलाई के मध्य तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरी तरह से लागू करने की स्थिति में होंगे। 

व्यापार संतुलन और शिक्षा का योगदान
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है. इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात मामूली बढ़त के साथ 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से भारत का आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इस वजह से भारत का व्यापार अधिशेष जो पहले 40.89 अरब डॉलर था, वह घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है. व्यापार के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र भी इस रिश्ते को मजबूती दे रहा है; वर्तमान में 3,30,000 से अधिक भारतीय छात्र अमेरिकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सालाना 14 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments