Tuesday, October 13, 2026
Google search engine
Homeराज्यबिहार / झारखण्डसपना कुमारी से आकाश दीप तक, बिहार की मेडल योजना से खिलाड़ियों...

सपना कुमारी से आकाश दीप तक, बिहार की मेडल योजना से खिलाड़ियों को मिल रहा सरकारी नौकरी का मौका

पटना
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना से जहां एक तरफ राज्य में खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे युवक-युवतियों की संख्या बढ़ी है, तो दूसरी तरफ दो साल में 181 खिलाड़ियों को मेडल के आधार पर अलग-अलग स्तर पर सरकारी नौकरियां मिली हैं। जिन 181 खिलाड़ियों को सरकारी जॉब मिली है, उसमें 95 पुरुष और 86 महिला प्लेयर शामिल हैं। मेडल के आधार पर सरकारी नौकरी में युवतियों की लगभग आधी हिस्सेदारी से सरकार गदगद है, क्योंकि बिहार में छात्राओं को कई तरह की प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए स्कूल से ही पढ़ाई और खेल से जोड़ा जा रहा है।

बिहार की मेडल आधारित नौकरी योजना के तहत डीएसपी, दारोगा, पंचायती राज पदाधिकारी और अन्य उपयुक्त पदों पर सीधी बहाली के लिए नियम तय कर दिए गए हैं। सरकार आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण के जरिए खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर भी दे रही है। भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाज आकाश दीप और मुकेश कुमार को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्ति मिली है।

रग्बी खिलाड़ी सपना कुमारी को मिली डीएसपी की नौकरी
रग्बी खिलाड़ी सपना कुमारी कहती है कि उन्हें सामाजिक विरोध और संसाधन की कमी का सामना करना पड़ा। गांव में शॉर्ट्स पहनकर खेलने पर लोग ताने मारते थे, लेकिन मां हमेशा हौसला बढ़ाती रहीं। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के बाद 2022 में पाटलिपुत्र खेल परिसर में आयोजित प्रतियोगिता में तीन स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने पर सपना को सरकारी नौकरी मिली। वर्तमान में सपना बिहार राज्य खेल प्राधिकरण में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने के बाद गांव और समाज का नजरिया बदला है और अब दूसरे लोग भी अपनी बेटियों को खेल में आगे बढ़ने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं।

फुटबॉल प्लेयर श्यामा रानी भी गवर्नमेंट जॉब में
मुंगेर जिले के इटहरी गांव की फुटबॉल खिलाड़ी श्यामा रानी की खेल यात्रा 2008 में शुरू हुई थी। सामाजिक दिक्कतों के बावजूद परिवार ने श्यामा का साथ दिया। श्यामा महिला फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और इंडियन वीमेंस लीग में पंजाब एफसी की कप्तान रह चुकी हैं। श्यामा खेल कोटे के तहत नौकरी कर रही हैं और राज्य खेल प्राधिकरण में ही खेल गतिविधियों में योगदान दे रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं, बेहतर प्रशिक्षण और खेल क्लबों से लड़कियों के लिए आगे बढ़ने के अवसर बढ़े हैं।

खिलाड़ियों को मिलती है 3 से 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की एथलेटिक्स कोच कोमल कुमारी ने कहा कि पहले राज्य में खेल की आधारभूत संरचना और सरकारी सहयोग की कमी थी। अब खेल विभाग और राज्य खेल प्राधिकरण के सहयोग से खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रेरणा, सक्षम और उत्कर्ष जैसी योजनाओं के तहत पात्र खिलाड़ियों को 3 लाख से 20 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है, जिससे उन्हें प्रशिक्षण, डाइट वगैरह में मदद मिलती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments