Wednesday, September 9, 2026
Google search engine
Homeराज्यदिल्लीहाथ में ट्रिगर और ‘किल गाइड’ से आतंकी साजिश तक... लाल किला...

हाथ में ट्रिगर और ‘किल गाइड’ से आतंकी साजिश तक… लाल किला ब्लास्ट कैसे हुआ? NIA चार्जशीट ने खोली पूरी पोल

नई दिल्ली

दिल्ली में लाल किला के पास पिछले साल 10 नवंबर को बम ब्लास्ट हुआ था. इस मामले में जांच कर रही NIA ने अब चार्जशीट दाखिल कर दी है. NDTV के पास इस चार्जशीट की कॉपी है. इसके मुताबिक, इस हमले का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी ही था. डॉ. उमर ही वह आतंकी था जो सुसाइड बॉम्बर था। 

NIA ने अपनी चार्जशीट में 13 लोगों को आरोपियों बनाया है. इस चार्जशीट में सभी 13 आतंकियों की तस्वीर भी सामने आ गई है. चार्जशीट में NIA ने दावा किया है कि जांच के दौरान जो सबूत हाथ लगे, उससे साबित होता है कि धमाके के वक्त उमर कार में ही मौजूद था। लाल किला के पास 10 नवंबर 2025 को ब्लास्ट हुआ था. इस धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई थी और 29 लोग घायल हो गए थे। 

 राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए धमाके की जांच को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट में अहम दावे सामने आए हैं। NIA की चार्जशीट RC-21/2025/NIA/DLI के मुताबिक, आरोपी उमर उन नबी ने कार के अंदर रहते हुए कथित तौर पर IED को सक्रिय किया था।एनआईए के मुताबिक, धमाके के समय आरोपी उमर उन नबी कार के अंदर मौजूद था और उसने कथित तौर पर एक कमांड मैकेनिज्म के जरिए IED को सक्रिय किया। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में इस पूरे घटनाक्रम को अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल से जोड़ते हुए जांच के निष्कर्ष पेश किए हैं।NIA ने चार्जशीट में आरोप लगाया है कि आरोपियों पर चरमपंथी सामग्री का प्रभाव था। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों के पास कथित तौर पर ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक/हत्यारा कैसे बनें’ मिली थी, जिसे एजेंसी ने AQAP से जुड़ा मैनुअल बताया है।

NIA का कहना है कि इस सामग्री में विस्फोटक, हथियार, गुप्त अभियानों और IED से संबंधित जानकारी के अलावा ऑपरेशनल सुरक्षा, निगरानी, बच निकलने और गुप्त गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी शामिल थी।

एजेंसी के मुताबिक, बरामद दस्तावेज केवल वैचारिक प्रचार तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनमें ऐसी जानकारियां भी थीं जिनका इस्तेमाल किसी आतंकी सेल की गतिविधियों में किया जा सकता था।

कार के अंदर बैठकर खुद दबाया था बटन
NIA की चार्जशीट में साफ लिखा है कि मुख्य आरोपी उमर उन नबी (A-1) धमाके के वक्त गाड़ी के अंदर ही मौजूद था. उसने कार के भीतर बैठकर कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया और आईईडी (IED) को खुद एक्टिवेट कर दिया. यह हमला अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था. आतंकी किसी भी कीमत पर लाल किले जैसी ऐतिहासिक और संवेदनशील जगह पर बड़ा नुकसान पहुंचाना चाहते थे। 

‘How to Become an Assassin’ मैनुअल से ली गई ट्रेनिंग
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि आतंकी रेडिकलाइजेशन के लिए ऑनलाइन डार्क कंटेंट का सहारा ले रहे थे. आरोपी अल-कायदा (AQAP) से जुड़े एक डिजिटल मैनुअल फॉलो कर रहे थे, जिसका टाइटल था— ‘Lone Mujahid Pocket Book/How to Become an Assassin’.

इस किताब में सिर्फ नफरत भरे भाषण ही नहीं थे बल्कि हथियारों, एक्सप्लोसिव्स, TATP के इस्तेमाल और रिमोट-कंट्रोल डेटोनेटर बनाने की पूरी ट्रेनिंग दी गई थी. इसके अलावा, पुलिस से बचने के लिए फर्जी पहचान बनाने, चोरी-छिपे मूवमेंट करने और अकेले हमला करने की स्ट्रैटेजी भी सिखाई गई थी। 

‘पैनिक अटैक’ के चक्कर में जल्दी कर दिया ब्लास्ट
NIA के खुलासे के मुताबिक, आतंकी लाल किले की रेकी पिछले लगभग दो सालों से कर रहे थे. दिसंबर 2023 से ही उमर उन नबी अपने साथियों के साथ कई बार लाल किले के चक्कर काट चुका था. हालांकि हमले की तारीख पहले से 10 नवंबर तय नहीं थी. दरअसल, श्रीनगर में जब उसके साथी आतंकियों की धरपकड़ शुरू हुई तो उमर बुरी तरह घबरा गया. उसे लगा कि पुलिस उस तक कभी भी पहुंच सकती है. इसी डर और पकड़े जाने के खौफ में उसने आनन-फानन में लाल किले के पास जाकर खुद को उड़ा लिया। 

लोकतंत्र के खिलाफ नफरत और शरिया का एजेंडा
अल-फलाह स्थित ठिकाने से NIA को हाथ से लिखे कई नोट्स मिले हैं. इन नोट्स में भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को खारिज करते हुए शरिया कानून लागू करने की बातें लिखी थीं. चार्जशीट के अनुसार, लाल किले को निशाना बनाने की वजह यही थी कि यह ‘भारतीय राज्य और सत्ता का सबसे बड़ा प्रतीक’ है। 

 

हिंसक विचारधारा का आरोप
अपनी चार्जशीट में एनआईए ने कुछ प्रचार सामग्री का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, इन दस्तावेजों में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को कथित तौर पर ‘शैतानी और अत्याचारी व्यवस्था’ बताया गया था और उन्हें हिंसक तरीके से खत्म करने की विचारधारा को बढ़ावा दिया गया था।

चार्जशीट के मुताबिक, इस सामग्री में यह विचार भी सामने रखा गया कि मुसलमान जिहाद के बिना सम्मान हासिल नहीं कर सकते। NIA का दावा है कि दस्तावेजों में इस्लाम के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री, गजवा-ए-हिंद के संदर्भ और इराक, अफगानिस्तान तथा अमेरिका में हुए विभिन्न विद्रोहों का उल्लेख भी था। जांच एजेंसी ने इन दस्तावेजों को कथित AGuH मॉड्यूल की वैचारिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा है।

फर्जी पहचान और गुप्त गतिविधियों की ट्रेनिंग का दावा
चार्जशीट में NIA ने यह भी कहा है कि बरामद सामग्री में कथित आतंकी नेटवर्क के सदस्यों के लिए ऑपरेशनल निर्देश मौजूद थे। एजेंसी के मुताबिक, इनमें पहचान छिपाने, गुप्त तरीके से घुसपैठ करने और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अलग-अलग फर्जी पहचान तैयार करने जैसे तरीकों का उल्लेख था।

NIA का दावा है कि दस्तावेजों में हमले की रणनीतियों, लक्षित हमलों, अकेले किए जाने वाले हमलों और आत्मघाती हमलों से जुड़ी सामग्री भी मौजूद थी।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments