Friday, August 21, 2026
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300 की जगह 500 रुपये में भी नहीं भर रहा थैला, रांची में सब्जी महंगाई से आमजन परेशान

रांची
राजधानी रांची में बदलते मौसम और मानसून की दस्तक के साथ हरी सब्जियों की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बाजारों में टमाटर से लेकर अधिकांश सब्जियां 40 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही हैं, जबकि कुछ चुनिंदा सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं।

महंगाई का सीधा असर निम्न मध्यम और मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई पर पड़ रहा है, जिससे घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार एक सप्ताह पहले तक 10 से 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाली भिंडी अब 30 से 40 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।

वहीं स्थानीय टमाटर 50 से 55 रुपये प्रति किलो और हाइब्रिड टमाटर 50 से 70 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। फ्रेंच बीन की कीमत सबसे अधिक बढ़ी है और यह 40 से 50 रुपये प्रति पाव तक बिक रही है।

बीन की कीमत 150 से 200 रुपये केजी तक पहुंच गई है। आलू और प्याज को छोड़कर लगभग सभी सब्जियों के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रांची में बुंडू, तमाड़, जोन्हा, सिल्ली, झालदा, बेड़ो समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सब्जियों की आपूर्ति होती है। यहां से आने वाली खेप नागाबाबा खटाल, मोरहाबादी, लालपुर, डोरंडा, रेलवे स्टेशन बाजार और बहुबाजार जैसी प्रमुख मंडियों तक पहुंचती है।

अंतिम फसल और कम आपूर्ति बनी महंगाई की वजह
सब्जी व्यापारी ने कहा कि वर्तमान में कई सब्जियों की अंतिम फसल बाजार में आ रही है। मानसून शुरू होने के बाद कई हरी सब्जियों की खेती और उत्पादन प्रभावित हो जाता है, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है।

यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि में सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। विक्रेताओं का कहना है कि जब तक नई फसल तैयार होकर बाजार में नहीं आती, तब तक कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम है।

सब्जियों के क्या हैं, रेट
सब्जी का नाम     भाव (रुपये प्रति किलो)
फ्रेंच बीन                   40 – 50
टमाटर                       50 – 60
झींगी / तोरई                40 – 60
खीरा                            30 – 40
भिंडी                            30 – 40
कद्दू                              20
सफेद आलू                    15
लाल आलू                      20
प्याज                            25
बैंगन                            40
पटल                             40
शिमला मिर्च                   50 – 70
बोदी                                40

    पहले 300 रुपये में सब्जियां पूरी होती थी, अब हालत ऐसी हैं, कि 500 रुपये में भी थैला नहीं भरता है।

    प्रति दिन 200 रुपये में पर्याप्त सब्जियां मिल जाती थीं, लेकिन अब 400 रुपये खर्च करने के बाद 2 दिन में सब्जियां खत्म हो रही।

    बारिश तक महंगाई की समस्या बनी, महंगी सब्जी खरीद ही नहीं रही।

    पहले टमाटर की चटनी बनती थी, अब सब्जी में आधा कटा टमाटर इस्तेमाल कर रही।

 

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