Monday, July 27, 2026
Google search engine
Homeदेशईआरसीपी से मिलेगी उम्मीद, भविष्य में बीसलपुर बांध को मिलेगा सहारा

ईआरसीपी से मिलेगी उम्मीद, भविष्य में बीसलपुर बांध को मिलेगा सहारा

टोंक
मानसून की दस्तक के साथ ही हर वर्ष लाखों लोगों की निगाहें बीसलपुर बांध के जलस्तर टिक जाती है। राजधानी जयपुर, अजमेर, टोंक सहित सैकड़ों गांवों-कस्बों की पेयजल जरूरते इसी बांध से पूरी होती है। इस बार कमजोर मानसून और बदलते पर्यावरणीय हालात ने चिंता बढ़ा दी है कि आने वाले वर्षों में बीसलपुर बांध बढ़ती आबादी की प्यास बुझा पाएगा या नहीं। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) के अधिशासी अभियंता अमित सेहरा ने बताया कि भविष्य में बीसलपुर बांध का जलभराव काफी हद तक ईआरसीपी पर निर्भर रहेगा।

परियोजना के तहत रामगढ़ बांध, महलपुर बैराज, नवनेरा बांध, मेज बैराज और गलवा बांध को जोड़ते हुए पानी बीसलपुर तक पहुंचेगा। करीब 70 किलोमीटर लंबी और 16 मीटर चौड़ी नहर का निर्माण कार्य जारी है, जिसे अगले चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है।

2010 में सबसे निचले स्तर पर पहुंचा था बांध
बीसलपुर बांध परियोजना के अधिशासी अभियंता मनीष बंसल ने बताया कि बांध बनने के बाद सबसे कम जलस्तर 21 जुलाई 2010 को दर्ज किया गया था। उस समय जलस्तर 298.67 आरएल मीटर और जलभराव मात्र 0.120 टीएमसी रह गया था। वर्तमान में बांध का जलस्तर 313.64 आरएल मीटर है और इसमें 25.803 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जो अगले मानसून तक पेयजल आपूर्ति के लिए पर्याप्त है।

भविष्य की जरूरतों के लिए तैयारी
बढ़ती आबादी और पेयजल की मांग को देखते हुए बांध किनारे 122 करोड़ रुपए की लागत से नए इंटेक पंप हाउस का निर्माण कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ईआरसीपी पूरी होने के बाद बीसलपुर बांध को नियमित जलापूर्ति मिलेगी और भविष्य में पेयजल संकट की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी।

डूब क्षेत्र में आते है 68 गांव
बीसलपुर बांध के पूर्ण जलभराव में कुल 68 गांव व कस्बे डूब में आते हैं। जिसमें 43 आंशिक व 25 पूर्ण रूप से डूबते है। परियोजना अभियंताओं के अनुसार अभी लगभग 15 हजार हेक्टेयर भूमि में पानी भरा हुआ है। जो जलभराव बांध से करीब 18 किमी दूरी तक है। यह पानी जलभराव में सहायक बनास व डाई नदी क्षेत्र में भरा है खारी नदी में कुछ ही दूरी तक पानी है।

एक सेमी की रफ्तार से घट रहा गेज
बीसलपुर बांध परियोजना के कनिष्ठ अभियंता पूरण मल बैरवा ने बताया कि एक सप्ताह से मानसून की बेरूखी के कारण बांध में पानी की आवक बढ़ने के बजाए कमी होने लगी है। बांध से रोजाना जलापूर्ति व वाष्पीकरण को लेकर प्रतिदिन एक सेमी गेज घटने लगा है। बांध का गेज शनिवार को 313.64 आर एल मीटर रह गया। रविवार सुबह तक 313.63 आर एल मीटर दर्ज किया गया है। इसी प्रकार बांध से अभी जयपुर व चाकसू दूदू जलापूर्ति के लिए प्रति दिन 700 एमएलडी पानी, लिया जा रहा है। अजमेर, किशनगढ़ व ब्यावर क्षेत्र में 335 एम एल डी। टोंक- देवली- उनियारा पेयजल के लिए 71 एम एल डी पानी प्रतिदिन बांध से लिया जा रहा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments