चंडीगढ़
पंजाब सरकार की पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के साथ बैठक बेनतीजा रही जिस कारण यूनियन की हड़ताल मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी। बुधवार को यूनियन के चक्का जाम के कारण दो हजार बसों के पहिए थम गए, जिस कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
यूनियन ने शुक्रवार को सीएम आवास और पंजाब विधानसभा की तरफ कूच करने का फैसला लिया है। यूनियन आउटसोर्स कर्मियों को अनुबंध पर लाने, अनुबंध कर्मियों पर नियमित करने, पिछले आंदोलन के दौरान कर्मियों पर दर्ज केस वापस लेने और विभाग में नई बसें खरीदने की मांग को लेकर संघर्ष कर रही है और अब अगली बैठक 29 अक्तूबर को तय की गई है।
विभाग में 2900 के करीब बसें हैं लेकिन दो हजार बसें विभिन्न रूटों पर बंद रही जिस कारण दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस कारण यात्री दिन भर बसों के इंतजार में परेशान होते रहे। विभाग की केवल लोकल रूट पर ही कुछ बसें चली हैं लेकिन यहां भी काफी रूट प्रभावित रहे हैं।
यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल के अनुसार उनकी कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा और परिवहन सचिव वरुण रूजम के साथ बात हुई है लेकिन सरकार ने 29 अक्तूबर तक का समय मांगा है और उस दिन दोबारा बैठक बुलाई गई है। गिल ने आरोप लगाया कि सरकार ने 15 अक्तूबर तक अधिसूचना जारी करने के अपने वादे को पूरा नहीं किया है इसलिए हम अपनी हड़ताल मांगें पूरी होने तक जारी रखेंगे।
डीसी और आरटीओ कार्यालयों में काम कराने पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। कई लोगों को हड़ताल की जानकारी नहीं थी। हालांकि, आम जनता पर तत्काल असर अपेक्षाकृत कम रहा, क्योंकि अधिकांश नागरिक सेवाओं के लिए सुविधा केंद्रों के माध्यम से आवेदन किए जाते हैं।
लेकिन आवेदनों की आगे की प्रक्रिया कर्मचारियों की गैरमौजूदगी के कारण प्रभावित हुई और फाइलों का निपटारा रुक गया। नगर निगम में कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा नहीं लिया और कामकाज सामान्य रहा।
वहीं, नगर सुधार ट्रस्ट के कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर कामकाज ठप रखा। कर्मचारी नेताओं ने पहले ही चेतावनी दी थी कि हड़ताल के दौरान ड्यूटी पर आने वाले कर्मचारियों को सरकार का समर्थक और मुलाजिम विरोधी माना जाएगा।
पावर ऑफ अटार्नी के सत्यापन के लिए काट रहे चक्कर
सरकारी दफ्तरों में बार-बार होने वाली हड़ताल से आम लोगों की परेशानी बढ़ रही है। राजगुरु नगर निवासी बोधराज ने बताया कि विदेश में रहने वाले उनके रिश्तेदारों की प्रापर्टी से संबंधित पावर ऑफ अटार्नी सत्यापन के लिए डीसी कार्यालय की एचआरसी ब्रांच में जमा करवाई हुई है।
करीब 15 दिन से वह इस काम के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन बुधवार को भी दफ्तर बंद मिला। बोधराज ने कहा कि वीरवार को भी हड़ताल रहेगी, जबकि शुक्रवार के बाद शनिवार, रविवार और सोमवार को छुट्टियां हैं। ऐसे में काम के लिए मंगलवार तक इंतजार करना पड़ सकता है।
लुधियाना निवासी नवीन कुमार ने भी पावर ऑफ अटार्नी के सत्यापन में देरी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि करीब 10 दिन से वह लगातार कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उनके मुताबिक, अगर शुक्रवार को काम नहीं हुआ तो अब मंगलवार को ही दोबारा आना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाली हड़ताल का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
बिजली कर्मियों की हड़ताल से सेवाएं प्रभावित
साझा संघर्ष के तहत पीएसईबी इंप्लाइज फेडरेशन एटक की जिला इकाई ने भी बुधवार को दो दिन का सामूहिक अवकाश लेकर सिटी सेंटर डिवीजन में गेट रैली की।
कर्मचारियों ने पंजाब सरकार और बिजली निगम प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें पूरी करने की मांग की। हड़ताल के चलते बिजली संबंधी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं हो सका। नए बिजली कनेक्शन और मीटर लगवाने पहुंचे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रैली की अध्यक्षता फेडरेशन के राज्य सचिव गुरप्रीत सिंह महिदूदां ने की। उन्होंने कहा कि 17 जुलाई 2020 और 15 जनवरी 2015 के पत्र रद करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने और नई भर्तियों को रेगुलर करने का ठोस प्रस्ताव लाने तक संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा। महिदूदां ने दावा किया कि हाईकोर्ट के फैसले के तहत कर्मचारियों को 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलना चाहिए।
सरकार पर दबाव बनाकर आठ प्रतिशत डीए हासिल किया गया है, जबकि शेष 10 प्रतिशत डीए ब्याज सहित दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ प्रचार करने की बात भी कही। इस मौके पर अशोक कुमार बंगड़, मनीष कुमार, देविंदर सिंह, दीपक कुमार, सिंगारा सिंह, साहिल डांग, अमर बहादुर, लखवीर सिंह और पारस सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
सरकारी स्कूलों में सामान्य रूप से लगीं कक्षाएं
सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल का असर शहर के सरकारी स्कूलों में देखने को नहीं मिला। बुधवार को विद्यार्थी सामान्य दिनों की तरह स्कूल पहुंचे और अध्यापकों ने नियमित रूप से कक्षाएं लीं।
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) की ओर से पहले अध्यापकों के सामूहिक अवकाश पर जाने की बात कही गई थी, लेकिन कई स्कूलों में शिक्षण कार्य सामान्य रहा।
सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैबोवाल खुर्द, अयाली खुर्द और गोबिंद नगर में अध्यापकों ने कक्षाएं जारी रखीं। इन स्कूलों में पहले से छुट्टी पर चल रहा स्टाफ ही अनुपस्थित रहा।




