Saturday, August 1, 2026
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हेपेटाइटिस को हल्के में न लें, समय पर इलाज नहीं हुआ तो लिवर को हो सकता है स्थायी नुकसान

लिवर शरीर का ऐसा अंग है, जो खुद को काफी हद तक ठीक कर सकता है. लेकिन अगर हेपेटाइटिस का समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह धीरे-धीरे लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है. भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अंतरिक्ष कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस अक्सर बिना किसी खास लक्षण के बढ़ता रहता है. ऐसे में कई लोगों को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब लिवर काफी प्रभावित हो चुका होता है l  

हेपेटाइटिस से लिवर को स्थायी नुकसान कैसे होता है?
डॉ. अंतरिक्ष कुमार बताते हैं कि अगर हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी लंबे समय तक बना रहे, तो लिवर में लगातार सूजन रहती है. धीरे-धीरे स्वस्थ लिवर की जगह दागदार ऊतक (स्कार टिश्यू) बनने लगते हैं. इसे फाइब्रोसिस कहा जाता है. अगर यह समस्या और बढ़ जाए, तो यह सिरोसिस में बदल सकती है. इस स्थिति में लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता और हुए नुकसान को पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं होता. डॉक्टर के अनुसार, क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी के मरीजों में मोटापा, फैटी लिवर और नियमित शराब का सेवन लिवर को होने वाले नुकसान की रफ्तार और बढ़ा सकता है l  

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
प्रभात खबर से बातचीत में डॉ. अंतरिक्ष कुमार ने बताया कि क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी से पीड़ित लोगों, नियमित शराब पीने वालों, फैटी लिवर, मोटापे या डायबिटीज के मरीजों और जिनके परिवार में लिवर की बीमारी का इतिहास रहा हो, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए. समय पर इलाज न मिलने पर इनमें गंभीर लिवर क्षति का खतरा अधिक होता है l

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
    आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
    लगातार थकान या कमजोरी
    पेट या पैरों में सूजन
    भूख कम लगना और बिना किसी कारण वजन घटना
    मामूली चोट लगने पर भी आसानी से खून बहना या नीले निशान पड़ना

क्या इससे बचाव संभव है?
डॉ. अंतरिक्ष कुमार के मुताबिक, समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव है. साधारण ब्लड टेस्ट से हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी का पता लगाया जा सकता है. इससे लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचने से पहले इलाज शुरू किया जा सकता है l  

उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी से वैक्सीनेशन के जरिए बचाव किया जा सकता है. वहीं, हेपेटाइटिस सी का इलाज आज उपलब्ध एंटीवायरल दवाओं से अधिकांश मरीजों में पूरी तरह संभव है. नियमित फॉलो-अप, जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज, स्वस्थ वजन बनाए रखना और शराब से परहेज करने से सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है l  

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में करीब 25.4 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और लगभग 5 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस सी के साथ जीवन जी रहे हैं. चूंकि ये संक्रमण कई वर्षों तक बिना किसी लक्षण के रह सकते हैं, इसलिए समय पर स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है l

डॉक्टर की सलाह
 डॉ. अंतरिक्ष कुमार ने कहा, "अगर हेपेटाइटिस का समय रहते पता चल जाए, तो लिवर को होने वाले गंभीर नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है. लिवर में खुद को ठीक करने की क्षमता होती है, लेकिन जब फाइब्रोसिस बढ़कर सिरोसिस में बदल जाता है, तो हुए नुकसान को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता. इसलिए पीलिया या पेट में सूजन जैसे लक्षण आने का इंतजार नहीं करना चाहिए. ये अक्सर बीमारी के गंभीर चरण के संकेत होते हैं. जोखिम वाले लोगों को नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए, समय पर इलाज लेना चाहिए, डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलो-अप कराना चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए. इससे लिवर लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है और लिवर फेलियर व लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं से बचाव संभव है."

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