Thursday, September 10, 2026
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बेटियां अब अनुकंपा नियुक्ति से नहीं होंगी वंचित, सुप्रीम Court ने साफ किया अधिकारों का दायरा

 नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के बाद बेटियों के अधिकार को लेकर बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विवाह के बाद भी बेटी परिवार का ही अंग है. किसी बेटी को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए सिर्फ इसलिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि वह विवाहित है. सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले ने विवाहित बेटियों के अधिकार को लेकर छाई भ्रम की धुंध हटा दी है। 

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस दलील को खारिज कर दिया कि निवास एक अलग पात्रता शर्त है, जिसका मूल्यांकन प्रत्येक मामले के तथ्यों पर किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी विवाहित बेटियों के अधिकार खारिज किए जाने को इस धारणा के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता कि हर विवाहित बेटी जरूरी रूप से कहीं और रहती है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक निर्णय उन अनुमानों पर आधारित नहीं किया जा सकता, जो व्यापक हैं और जीवंत वास्तविकताओं से कटे हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता निशा ने तर्क दिया कि विवाहित बेटियों को एक लाभकारी योजना से बाहर करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है और यह समानता की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन करता है. सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि विवाहित बेटियाँ आम तौर पर अपने वैवाहिक घरों में चली जाती हैं। 

सरकार की ओर से दलील यह भी दी गई कि विवाह के बाद बेटियां स्थानीय निवास की आवश्यकता को पूरा नहीं कर सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा का उद्देश्य उत्तराधिकार का अधिकार बनाना नहीं, एक मृतक के परिवार को तत्काल वित्तीय राहत देना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में निरंतरता सुनिश्चित करना है. एक बार जब निर्भरता को मानक रूप में स्वीकार कर लिया जाता है, तो एक विवाहित बेटी को केवल इसलिए बहिष्कृत करना तर्कहीन हो जाता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर फैसला सुनाया कि क्या विवाहित बेटियों को संवैधानिक रूप से 'परिवार' की परिभाषा से बाहर रखा गया है? क्या अनुकंपा के आधार पर उन्हें उचित मूल्य की दुकान का लाइसेंस दिया जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2025 में दिए अपने निर्णय में कहा था कि केवल अविवाहित बेटी को ही अनुकंपा के आधार पर माता या पिता के नाम से लाइसेंस वाली उचित मूल्य की राशन दुकान का आवंटन अनुकंपा के आधार पर ट्रांसफर हो सकता है। 

याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. अपनी याचिका में विवाहित बेटी ने यह तर्क दिया था कि वह अपने पिता की मृत्यु के बाद मां और एक विकलांग बहन की देखभाल कर रही है। 

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