Tuesday, August 11, 2026
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सीएनजी की खपत ने पकड़ी रफ्तार, पटना में रोजाना 1.40 लाख किलो खपत

 पटना
राजधानी में सीएनजी के नेटवर्क में लगातार विस्तार हो रहा है। खपत भी कई गुना बढ़ी है। गेल इंडिया ने पटना में सात वर्ष पहले तीन सीएनजी स्टेशनों से आपूर्ति आरंभ की थी। फरवरी 2025 तक पटना और आसपास के इलाकों में 30 स्टेशन संचालित हो रहे थे। इसके बाद भी स्टेशनों का विस्तार जारी रहा और वर्तमान में संख्या 41 हो गई है।

गेल के महाप्रबंधक एके सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2019-20 में 19 लाख किलो सीएनजी की आपूर्ति हो रही थी। वहीं, 2020-21 में 47 लाख, 2021-22 में 1.27 करोड़, 2022-23 में 2.52 करोड़ और 2023-24 में बढ़कर 3.14 करोड़ किलो हो गई।

2024-25 में यह 3.60 करोड़ किलो तक पहुंचने का अनुमान था। यानी छह साल में सीएनजी की वार्षिक आपूर्ति करीब 19 गुना बढ़ गई। वर्तमान में पटना में प्रतिदिन 1.40 लाख किलो सीएनजी की खपत हो रही है।

वर्ष 2025 में 90 हजार किलो प्रतिदिन, जबकि वर्ष 2024 में 70 हजार के आसपास खपत थी। मांग के कारण शहर और आसपास के क्षेत्रों में नए स्टेशन खोलने के साथ आपूर्ति ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है।

ग्रामीण इलाकों में अब भी परेशानी
सीएनजी आपूर्ति में शहरी इलाकों में पंपों पर जहां लंबी कतारें लग रही हैं, वहीं, ग्रामीण इलाके जैसे बिहटा आदि में आपूर्ति की समस्या है। उपभोक्ताओं के अनुसार, कई दिन घंटों सीएनजी नहीं है के बोर्ड पंपों पर टंगे मिलते हैं। इस कारण वाहन चालक एक-दूसरे पंप का चक्कर लगाते रहते हैं।

हालांकि, पटना और आसपास के इलाके में सीएनजी-पीएनजी की आपूर्ति के लिए नौबतपुर मदर स्टेशन लंबे समय से प्रमुख आधार रहा है। इसके अलावा गर्दनीबाग में मदर सीएनजी स्टेशन विकसित की गई है। इससे गर्दनीबाग, चितकोहरा, अनिसाबाद, बेउर और आसपास के क्षेत्रों में आपूर्ति को आसान बनाया जाने की कवायद हो रही है।

राजधानी में चल रहे 60 हजार से अधिक सीएनजी वाहन
राजधानी में 60 हजार से अधिक सीएनजी वाहन का परिचालन प्रतिदिन हो रहा है। इनमें 40 हजार से अधिक ऑटो चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त निजी कार करीब 20 हजार है। इसके अलावे बस व अन्य वाहन चल रहे हैं। सीएनजी के विस्तार के साथ शहर में गैस आधारित परिवहन का दायरा भी बढ़ा है।

पेट्रोल-डीजल की तुलना में अपेक्षाकृत कम लागत और प्रदूषण कम करने की जरूरत के कारण आटो, टैक्सी और निजी वाहनों में सीएनजी की मांग बढ़ी है। इसका असर स्टेशनों पर भी दिखता है। मई 2025 में आपूर्ति बाधित होने पर पटना के कई सीएनजी स्टेशनों पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी, जिससे बढ़ती निर्भरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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