Monday, August 17, 2026
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छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय पहचान, डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर को ‘राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार’ से नवाजा गया

 डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर को  राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार  नई दिल्ली के कन्वेंशन सेंटर में  प्रदान किया गया 

 रंगमंच एवं लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर को मिला राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 

रायपुर 
 छत्तीसगढ़ रायपुर के प्रतिष्ठित रंग कर्मी लोक कलाकार एवं सांस्कृतिक संरक्षक डॉ पुरुषोत्तम चंद्राकर को रंगमंच एवं लोक कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 सम्मान नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित भव्य राष्ट्रीय सम्मान समारोह में प्रदान किया गया। 
राष्ट्र गौरव भारतीय रंगमंच एवं लोक संस्कृति के संरक्षण पारंपरिक लोक कलाओं के संवर्धन सांस्कृतिक विरासत के प्रचार प्रसार तथा कला के माध्यम से समाज में जागरूकता एवं सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने हेतु किए गए उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए रंगमंच एवं लोककला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर को राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026  राष्ट्रीय सम्मान से 15 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026  प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।

डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर के रंगमंच एवं लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान,समर्पण, रचनात्मक प्रतिभा सांस्कृतिक सेवा एवं राष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति आपकी निरंतर प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए आपको इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 प्रदान किया गया।

डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर राष्ट्रीय स्तर के रंग कर्मी लोक कलाकार हैं। रंगमंच में अपने उत्कृष्ट अभिनय निर्देशन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं लोक कलाओं के माध्यम से समाज को भारतीय संस्कृति एवं लोक परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रंगमंच एवं लोक कला के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता रचनात्मक दृष्टि एवं सांस्कृतिक समर्पण ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। 
डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने युवा कलाकारों को मंच प्रदान करने तथा भारतीय लोक कला की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं एक समर्पित कलाकार एवं सांस्कृतिक मार्गदर्शन के रूप में डॉ. चंद्राकर ने कला को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज में जागरूकता सांस्कृतिक चेतना एवं राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण का प्रभावी साधन बनाया है उनके मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से अनेक युवा कलाकारों ने रंगमंच एवं लोक कला के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सफल प्रदर्शन किया है। डॉ.पुरुषोत्तम चंद्राकर का मानना है कि लोक कला किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा होती है इसी विचारधारा के साथ वह भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन तथा समाज में कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

अपने लोककला मंच के माध्यम से लाल किला नई दिल्ली राष्ट्रीय मानव संग्रहालय नई दिल्ली, इंदिरा कला केंद्र नई दिल्ली, पृथ्वी थियेटर मुंबई, एनसीपी थिएटर मुंबई, रविंद्र मंच कोलकाता भुवनेश्वर, संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहयोग से अगरतला, गुवाहाटी, शिलांग, विरासत महोत्सव देहरादून, कुल्लू दशहरा कुल्लू मनाली, अंतर्राष्ट्रीय गिरमिटिया महोत्सव कुशीनगर उत्तर प्रदेश, गोवा, नासिक, नेहरू कला केंद्र जयपुर, शिल्प कला महोत्सव अहमदाबाद, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर, संगीत नाटक अकादमी के माध्यम से जोधपुर, लोक कला महोत्सव झांसी, चेन्नई, भारत भवन भोपाल, उज्जैन कालिदास महोत्सव, जबलपुर, भाग्य नगर हैदराबाद सहित देश भर में छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला संस्कृति को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुति देश के प्रतिष्ठित मंचों सहित प्रदेश के सभी महोत्सव लोकउत्सव में प्रस्तुति दिए हैं सुआ, करमा, ददरिया, पंथी राउत नाचा, गौरा गौरी, भोजली, के माध्यम से एवं नाटक राजा फोकलवा, दसमत कईना, लोकमाता अहिल्या देवी,शहीद वीर नारायण सिंह, संत रविदास जी, छत्तीसगढ़ में राम, जैसे प्रसिद्ध नाटकों का मंचन व प्रहसन के माध्यम से सफलतापूर्वक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दिए हैं।

इस सम्मान के लिए डॉक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर को संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के प्रांत महामंत्री हेमंत महुलिकर, चंद्राकर समाज के प्रदेश अध्यक्ष दाऊ दिनेश चंद्राकर, राकेश तिवारी, पद्मभारती बंधु, पद्मराधेश्याम बारले, पद्मअनूप रंजन पांडे, डॉ अजय मोहन सहाय, डॉ. दीनानाथ यादव, सहित छत्तीसगढ़ के कलाकारों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक संस्थाओं, शिक्षाविदों एवं नागरिकको ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।

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