मानसा
मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुरू कर दी है। जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस घटनास्थल से सबूत जुटाने की है, जहां 13 अक्टूबर को झोटा की गोली मारकर हत्या की गई थी।वारदात के अगले ही दिन मेडिकल स्टोर को तोड़कर आग लगा दी गई थी। ऐसे में अब CBI के लिए घटनास्थल की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और क्राइम सीन दोबारा तैयार करना आसान नहीं होगा।
जांच एजेंसी को यह समझने के लिए आसपास के दुकानदारों, प्रत्यक्षदर्शियों और वारदात के लाइव वीडियो का सहारा लेना पड़ सकता है कि गोलीबारी के दौरान कौन व्यक्ति कहां मौजूद था और घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा।
मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार और उसकी पत्नी नीलम को आज (22 अक्टूबर) कोर्ट में पेश किया जाएगा। इनका आज रिमांड खत्म हो रहा है। पुलिस इनकी रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है।
हत्या के 10 दिन बाद भी झोटा का पोस्टमॉर्टम और अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। उनकी डेडबॉडी मानसा के सिविल अस्पताल में रखी हुई है। परिवार और एक्शन कमेटी CM भगवंत मान और DGP गौरव यादव का इस्तीफा समेत 10 मांगों को लेकर अड़ा हुआ।
बुधवार को पंजाब सरकार की ओर से गठित 3 महिला IAS अधिकारियों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और झोटा के परिवार सहित एक्शन कमेटी के बीच दूसरे दौर की बैठक में भी अंतिम सहमति नहीं बन सकी।
इससे पहले संभावना जताई जा रही थी कि परिवार पोस्टमॉर्टम के लिए राजी हो सकता है, क्योंकि झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने धरने के दौरान संगत से पोस्टमॉर्टम करवाने की इजाजत मांगी थी। हालांकि, इंसाफ कमेटी और प्रशासन के बीच मांगों को लेकर सहमति न बनने के कारण पोस्टमॉर्टम का फैसला नहीं लिया गया।
अधिकारी बोलीं- कई मांगों पर सहमति बनी SIT में शामिल IAS अधिकारी अपनीत रियात ने बताया कि एक्शन कमेटी की ओर से सरकार के सामने कुल 14 मांगें रखी गई थीं। इनमें सीबीआई जांच की मांग पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है, जबकि कई अन्य मांगों पर भी सहमति बनी है। हालांकि, सभी मांगों पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।
उन्होंने बताया कि कमेटी के प्रतिनिधियों ने शेष मांगों पर विचार-विमर्श करने के लिए अपनी बैठक बुलाने की बात कही है। इसके बाद कमेटी दोबारा SIT के साथ चर्चा करेगी। अपनीत रियात ने उम्मीद जताई कि जल्द ही सभी पक्षों के बीच सहमति बन जाएगी।
दूसरी तरफ, CBI ने जांच शुरू कर दी है। टीम ने मामले से संबंधित केस दस्तावेज अपने कब्जे में लेने के साथ झोटा के परिवार के बयान दर्ज किए। इसके अलावा टीम ने घटनास्थल का भी जायजा लिया। कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जब तक झोटा के परिवार को न्याय नहीं मिलता और उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई, भीड़ ने गिराई बाकी दुकान
झोटा की हत्या के बाद 14 अक्टूबर को जिला प्रशासन ने आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान के एक हिस्से पर बुलडोजर चलाया था। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने दुकान का बाकी हिस्सा गिराकर आग लगा दी थी। प्रशासन ने आरोपी के मकान के अवैध निर्माण वाले हिस्से पर भी कार्रवाई की थी। इस घटनाक्रम ने जांच के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पत्नी ने कहा, हमारी मांग नहीं थी दुकान तोड़ना
झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने भी जिला व पुलिस प्रशासन की तरफ से आरोपी की दुकान को गिराने की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मनप्रीत कौर ने कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार ने आरोपी अश्वनी की दुकान या घर को गिराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन व पुलिस ने सबूत खत्म करने के लिए दुकान को गिराकर सभी सबूत खत्म कर दिए हैं।
मूसेवाला के पिता बोले- दुकान तोड़ना गलत कदम
सीबीआई जांच शुरू होने के बाद सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने भी आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान को तोड़ना जिला व पुलिस प्रशासन का गलत कदम बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कर उन्होंने झोटा की हत्या के मामले में केस प्रॉपर्टी बनने वाले सभी अहम सबूत खत्म कर दिए हैं। अगर दुकान होती, तो CBI चेक करती कि दुकान में बिना बिल की कितनी दवाइयां हैं और कितनी बिल समेत हैं। नशीली दवाओं का रिकॉर्ड मिलता। दुकान में लगे CCTV कैमरे भी अहम सबूत बनते, लेकिन वे सब खत्म हो चुके हैं।
CBI के सामने क्या हैं चुनौतियां, जानिए…
आसपास के दुकानदार बन सकते हैं गवाह: CBI टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ आसपास के दुकानदारों से बातचीत की। टीम ने वारदात के दिन की परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटाई। जांच में पड़ोसी दुकानदारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उनके बयानों से पता लगाने में मदद मिलेगी कि झोटा कब दुकान पर पहुंचे, उनके साथ कितने लोग थे, विवाद कैसे शुरू हुआ और गोलीबारी के बाद आरोपी किस तरफ गया।
CBI ने पुलिस से लिया रिकॉर्ड, नई FIR दर्ज: CBI ने बुधवार को मामले की औपचारिक जांच शुरू करते हुए अपनी FIR दर्ज की। जांच टीम ने मानसा के संबंधित पुलिस थाने से पहले दर्ज FIR और मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज हासिल किए हैं। एक DIG रैंक के अधिकारी की अगुवाई में टीम जांच को आगे बढ़ा रही है। टीम ने झोटा के परिवार से भी संपर्क किया है। जांच अधिकारियों ने उनके पिता और पत्नी से घटनाक्रम तथा झोटा की नशा विरोधी गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली है।
लाइव वीडियो से खुल सकती हैं वारदात की परतें: 13 अक्टूबर को झोटा मेडिकल स्टोर पर कथित तौर पर नशीली दवाओं की बिक्री का विरोध करने पहुंचे थे। इसी दौरान दुकान संचालक अश्वनी कुमार के साथ उनका विवाद हुआ और गोलीबारी में उनकी मौत हो गई। घटना का एक हिस्सा फेसबुक लाइव वीडियो में भी रिकॉर्ड हुआ था।
नशे संबंधी खुलासों की जानकारी भी जुटाई: जांच एजेंसी के लिए यह वीडियो महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य साबित हो सकता है। इससे गोली चलने से पहले हुए विवाद, मौके पर मौजूद व्यक्तियों और घटनाक्रम की समयरेखा को समझने में मदद मिलेगी। CBI ने वारदात के वीडियो और झोटा द्वारा पहले सोशल मीडिया पर किए गए नशे संबंधी खुलासों की जानकारी भी जुटाई है।
हत्या के पीछे की वजह भी जांच का अहम हिस्सा: झोटा लंबे समय से मानसा और आसपास के क्षेत्रों में नशे तथा कथित तौर पर नशीली दवाएं बेचने वालों के खिलाफ अभियान चला रहे थे। वह सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके नशे की बिक्री और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे थे।




