Thursday, September 10, 2026
Google search engine
Homeराज्यउत्तर प्रदेशबृजलाल बोले- पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी, जनता तुष्टिकरण की राजनीति...

बृजलाल बोले- पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी, जनता तुष्टिकरण की राजनीति को नकारेगी

अखिलेश रोज गढ़ते हैं फर्जी नैरेटिव, बंधुराष्ट्र के लिए राष्ट्र प्रथम जरूरी- बृजलाल

पूर्व डीजीपी ने सपा अध्यक्ष पर लगाया तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप

आतंकियों के मुकदमें वापस लेने और मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर साधा निशाना

मुलायम सिंह यादव सरकार में मेरठ पीएसी कैंप हमलों से जुड़े मुकदमे वापस लेने का भी लगाया आरोप

बृजलाल बोले- पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी, जनता तुष्टिकरण की राजनीति को नकारेगी

लखनऊ

राज्यसभा सांसद एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव रोज कोई न कोई फर्जी नैरेटिव गढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव सत्ता में आने पर बंधुराष्ट्र बनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन बंधुराष्ट्र के निर्माण के लिए पहली आवश्यकता राष्ट्र प्रथम की भावना है। पार्टी हित और निजी हित बाद में होना चाहिए। बृजलाल ने आरोप लगाया कि सपा की अब तक की राजनीति विशुद्ध तुष्टिकरण पर आधारित रही है।

आतंकवाद के मुद्दे पर सपा को घेरा

बृजलाल ने कहा कि भारत में इस्लामिक आतंकवाद का अंतिम लक्ष्य देश को गजवा-ए-हिंद के जरिए इस्लामिक राष्ट्र बनाना है। आतंकवादी देश और समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं, इसलिए सभी को मिलकर उनके कुत्सित इरादों को विफल करना चाहिए। वोट बैंक की राजनीति के लिए अखिलेश यादव और उनकी पार्टी आतंकियों के साथ खड़ी नजर आती रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद वर्ष 2013 में अखिलेश यादव ने आतंकियों से जुड़े 14 चार्जशीट वापस लेने का आदेश दिया था। इनमें रामपुर सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर हमला, न्यायालयों में हुए बम धमाके और अन्य आतंकी घटनाओं से जुड़े मामले शामिल थे।

लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या ब्लास्ट का भी किया जिक्र

पूर्व डीजीपी ने कहा कि 23 नवंबर 2007 को लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या की अदालतों में आतंकियों ने धमाके किए थे, जिनमें करीब डेढ़ दर्जन वकील और अन्य लोग मारे गए। इसी समूह से जुड़े आतंकियों पर 22 मई 2007 के गोलघर ब्लास्ट का भी आरोप था। इन मामलों में गिरफ्तार आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसे अखिलेश सरकार ने वापस लेने का प्रयास किया।

बृजलाल ने कचहरी ब्लास्ट के मामलों में गिरफ्तार खालिद मुजाहिद और हकीम तारिक कासमी का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट भी वापस लेने की कोशिश की गई। इसके बाद अखिलेश सरकार ने उनके समेत तत्कालीन सेवानिवृत्त डीजीपी विक्रम सिंह, दो एसपी, डीएसपी सहित 38 पुलिसकर्मियों पर हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि खालिद और हकीम की बाराबंकी में हुई गिरफ्तारी से जुड़े मुकदमे को भी वापस लेने का प्रयास किया गया, लेकिन न्यायालय के हस्तक्षेप से ऐसा नहीं हो सका और हकीम तारिक कासमी को आजीवन कारावास की सजा हुई। केवल अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में भी आतंकियों से जुड़े कई मुकदमे वापस लिए गए थे। 

मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर भी अखिलेश पर हमला

बृजलाल ने अखिलेश यादव के भाईचारे के दावे पर भी सवाल उठाए। 2013 के कवाल कांड और उसके बाद हुए मुजफ्फरनगर दंगे का जिक्र करते हुए कहा कि 26 अगस्त 2013 को मलिकपुरा, शामली निवासी सचिन और गौरव कवाल गांव गए थे, जहां शाहनवाज कुरैशी से विवाद हुआ। अगले दिन दोबारा हुए विवाद में शाहनवाज की चाकू लगने से मौत हुई और इसके बाद सचिन तथा गौरव की भीड़ ने हत्या कर दी।

बृजलाल ने आरोप लगाया कि अपराधियों को पकड़ने के बाद तत्कालीन मंत्री आजम खान ने उन्हें छुड़वा दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद मामला बढ़ता गया और मुजफ्फरनगर में साम्प्रदायिक दंगा हुआ, जिसमें 60 लोगों की मौत हुई तथा करीब 50 हजार लोगों को राहत शिविरों में रहना पड़ा। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी केवल मुस्लिम राहत शिविरों में गए, जबकि हिंदू राहत शिविरों में नहीं गए। अखिलेश यादव पर भी पीड़ित हिंदुओं की सुध नहीं लेने का आरोप लगाया और कहा कि उस दौरान अखिलेश सैफई महोत्सव में व्यस्त रहे। सिर्फ अपने सरकारी आवास पर मुस्लिम नेताओं को स्टेट प्लेन से बुलाकर बातचीत की, जबकि पीड़ित हिंदुओं की कोई सुध नहीं ली गई।

कब्रिस्तान, बेटियों और मदरसों की योजनाओं को लेकर निशाना

बृजलाल ने कहा कि अखिलेश भाजपा पर लोगों को बांटने का आरोप लगाते हैं, लेकिन उनके शासनकाल के कामकाज में हिंदुओं के साथ भेदभाव दिखाई देता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद मुस्लिम कब्रिस्तानों की बाउंड्री के लिए अलग बजट आवंटित किया गया, जबकि हिंदू श्मशान घाटों के लिए ऐसा प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने हमारी बेटी, उसका कल योजना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि 10वीं पास मुस्लिम बेटियों को उच्च शिक्षा या विवाह के लिए एकमुश्त 30 हजार रुपये दिए गए, जबकि हिंदू बेटियों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं थी। पीडीए की बात करने वाले अखिलेश को पिछड़ों और दलितों की बेटियों की चिंता नहीं रही।

बृजलाल ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मुस्लिमों को उर्दू अनुवादक बनाकर लाभ पहुंचाया गया, लेकिन संस्कृत के उत्थान के लिए ऐसा प्रयास नहीं किया गया। मदरसों के आधुनिकीकरण के नाम पर धन खर्च किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य स्कूलों की अनदेखी हुई। उन्होंने योगी सरकार की कायाकल्प योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत स्कूलों के भवनों का कायाकल्प किया गया और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

सरकारी योजनाओं में 20 प्रतिशत वरीयता का आरोप

बृजलाल ने कहा अखिलेश सरकार में सरकारी योजनाओं में मुसलमानों को 20 प्रतिशत वरीयता दी गई, जबकि दलितों और पिछड़ों की चिंता नहीं की गई। लखनऊ और गाजियाबाद में हज हाउस बनाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए काशी, मथुरा, अयोध्या, विंध्याचल और चित्रकूट समेत बौद्ध तीर्थों की अनदेखी की गई। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अखिलेश यादव रोजाना नए-नए फर्जी नैरेटिव गढ़कर प्रदेशवासियों को भ्रमित कर रहे हैं। अखिलेश का लक्ष्य तुष्टिकरण के जरिए परिवार की सरकार बनाना है। उन्होंने इसे पीडीए यानी परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी करार देते हुए कहा कि परिवारवादी सरकार अब उत्तर प्रदेश में नहीं बनेगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments