Wednesday, July 29, 2026
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150 से अधिक मामलों का आरोपी, 2 करोड़ का इनामी… जानिए नक्सली नेता मिसिर बेसरा की पूरी कहानी

रांची

नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में मंगलवार को सुरक्षा बलों को दो बड़ी कामयाबी मिली। दिन में जहां सारंडा में सक्रिय रहे 24 नक्सलियों ने जहां पुलिस के सामने सरेंडर किया, वहीं देर रात भाकपा माओवादियों के पोलित ब्यूरो सदस्य और 2.20 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार कर लिया।। बेसरा के साथ उसके दो सहयोगी मेहनत उर्फ मोछू और गौरव भी दबोचे गए है। यह गिरफ्तारी धनबाद और गिरिडीह की सीमा पर स्थित मनियाडीह इलाके से हुई। मिसिर समेत अन्य माओवादियों को धनबाद- गिरिडीह सीमा पर एक टाटा मैजिक गाड़ी से पकड़ा गया। इसके अलावा दो अन्य को हिरासत में भी लिया गया है।

दरअसल, सुरक्षाबलों को मिसिर बेसरा के अपने दो सहयोगियों के साथ गिरिडीह जाने की सूचना मिली थी। जिसके बाद राज्य पुलिस मुख्यालय ने तीनों को दबोचने के लिए गुप्त योजना बनाई। योजना के तहत देर रात कामयाबी मिली। पीरटांड निवासी मिसिर तकरीबन 40 सालों से माओवादी संगठन में सक्रिय था। धनबाद में कॉलेज में पढ़ाई के दिनों में महाजनी आंदोलन के जरिए वह नक्सली संगठन से जुड़ गया था।

एक मात्र पोलित ब्यूरो सदस्य बचा था मिसिर
भाकपा माओवादियों का संगठन अब पूरी तरह खत्म हो गया है। देशभर में मिसिर बेसरा एक मात्र पोलित ब्यूरो सदस्य था। 22 फरवरी 2026 को पोलित ब्यूरो सदस्य और भाकपा माओवादियों के प्रमुख देव ने सरेंडर कर दिया था। वहीं इससे पूर्व नंबला केशव राजू उर्फ बसवा राजू को सुरक्षाबलों ने 21 मई 2025 को मार गिराया था। माओवादियों का सचिव रहा गणपति बीते आठ सालों से ट्रेसलेस है, खराब स्वास्थ्य के कारण कई बार उसकी मौत की अटकलें लगती रही हैं।

आईबी लगातार रख रही थी नजर
बताया जाता है कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी लगातार बेसरा पर नजर रख रही थी। आईबी की सूचना पर ही मंगलवार को राज्य पुलिस मुख्यालय, सीआरपीएफ व झारखंड जगुआर ने संयुक्त रणनीति बनाई।

कई माह से दे रहा था चकमा
मिसिर बेसरा कई माह से सुरक्षा बलों को चकमा दे रहा था। मई में झारखंड पुलिस के समक्ष बेसरा दस्ते के 27 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। मंगलवार को भी 24 नक्सलियों ने सरेंडर किया । सरेंडर करने वाले माओवादियों से भी सुरक्षाबलों को मिसिर बेसरा के गतिविधियों की जानकारी मिली थी।

पहली बार 2007 में खूंटी से हुई थी गिरफ्तारी
मिसिर बेसरा पहली बार सितंबर 2007 में खूंटी से गिरफ्तार हुआ था, पर 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट में हमला कर माओवादियों ने छुड़ा लिया था। तब से बूढ़ापहाड़, कोल्हान व सारंडा में रहा।

150 से अधिक केस हैं दर्ज
बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में 150 से अधिक केस हैं। दो केस में एनआईए को भी तलाश थी। झारखंड में बेसरा पर एक करोड़, जबकि ओडिशा मे 1.20 करोड़ का इनाम घोषित है। गिरफ्तारी के बाद मिसिर बेसरा और सहयोगियों को लेकर पुलिस रांची के लिए निकल गई है। देर रात या बुधवार तड़के तीनों के रांची पहुंचने की संभावना है।

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