Sunday, June 28, 2026
Google search engine
Homeराज्यउत्तर प्रदेशरोजगारपरक शिक्षा की ओर कदम: यूपी के स्कूलों में IT और हेल्थ...

रोजगारपरक शिक्षा की ओर कदम: यूपी के स्कूलों में IT और हेल्थ सेक्टर की ट्रेनिंग अनिवार्य

लखनऊ
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ रोजगारपरक कौशल (Employment Skills) से जोड़ने की मुहिम तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में "प्रोजेक्ट प्रवीण" के अन्तर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण (STT) देने के लिए जिलों और प्रशिक्षण प्रदाताओं को महत्वाकांक्षी लक्ष्य आवंटित कर दिए गए हैं।

योगी सरकार का संकल्प: कोई भी युवा हुनर से न रहे वंचित
उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने योजना के विवरण साझा करते हुए कहा कि योगी सरकार का मुख्य ध्येय है कि प्रदेश का कोई भी युवा हुनर से वंचित न रहे। 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के जरिए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत आईटी (IT-ITeS), हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस और कृषि जैसे उन महत्वपूर्ण सेक्टर्स में ट्रेनिंग दी जाएगी जिनकी बाजार में भारी मांग है।

गुणवत्ता पर विशेष ध्यान: इस वर्ष 36,103 छात्रों को ट्रेनिंग का लक्ष्य
प्रशिक्षण की गुणवत्ता को उच्च स्तरीय बनाए रखने के लिए सरकार ने प्रत्येक बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थियों की सीमा तय की है, जिससे बच्चों को प्रयोगात्मक (Practical) और व्यावहारिक ज्ञान बेहतर ढंग से मिल सके। इस वर्ष प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत प्रदेश भर में कुल 36,103 छात्र-छात्राओं को कौशल प्रशिक्षण देने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह जिम्मेदारी आगरा, बरेली, आजमगढ़, वाराणसी, ललितपुर, रामपुर, शाहजहांपुर, जालौन और सोनभद्र सहित विभिन्न जनपदों के राजकीय विद्यालयों में सूचीबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को सौंपी गई है।

कड़ा अल्टीमेटम: 15 जुलाई 2026 तक शुरू करनी होंगी कक्षाएं
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। सभी सूचीबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को केंद्र की स्थापना, पंजीकरण और बैच निर्माण की प्रक्रिया पूरी कर 15 जुलाई, 2026 तक हर हाल में कक्षाओं का संचालन शुरू करना होगा। इसके साथ ही, पाठ्यक्रम की अधिकतम अवधि 300 घंटे निर्धारित की गई है।

लापरवाही पर होगी विधिक कार्रवाई, पोर्टल पर रखनी होगी नजर
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया गया है कि बैच शुरू होने के 07 कार्य दिवसों के भीतर सभी छात्र-छात्राओं को पाठ्य सामग्री (Study Material) का वितरण करना होगा और उसकी तस्वीरें मिशन पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। मिशन निदेशक ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई प्रशिक्षण प्रदाता समय पर कार्य आरंभ नहीं करता है या जनपद स्तर से किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कानूनी व विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments