Monday, July 27, 2026
Google search engine
Homeविदेशथाईलैंड से भी कठिन मिशन: लाओस गुफा हादसे में अब भी दो...

थाईलैंड से भी कठिन मिशन: लाओस गुफा हादसे में अब भी दो खनिक लापता

नई दिल्ली

 घुप अंधेरा, जहरीली हवा, कीचड़ से भरी सुरंगें और ऐसा पानी जिसमें हाथ तक दिखाई न दे। लाओस के शायसोम्बौन प्रांत की एक खतरनाक गुफा में फंसे खनिकों को बचाने के लिए पिछले 11 दिनों से दुनिया के कई देशों के एक्सपर्ट गोताखोर मौत से मुकाबला कर रहे हैं।

यह ऑपरेशन अब 2018 के मशहूर थाईलैंड ‘थाम लुआंग’ गुफा बचाव अभियान से भी ज्यादा जोखिम भरा माना जा रहा है।

21 मई को सोना और अन्य कीमती खनिज तलाशने गए सात ग्रामीण खनिक अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण गुफा में फंस गए। लगातार बारिश से गुफा का प्रवेश द्वार बंद हो गया और बाहर निकलने के रास्ते पूरी तरह खत्म हो गए। सबसे अहम बात यह रही कि एक खनिक किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा और उसने प्रशासन को सूचना दी। यही घटना बाकी लोगों की जिंदगी बचाने की उम्मीद बनी।

'कॉफी' जैसा गंदा पानी और दम घोंटने वाली हवा
राहत अभियान में शामिल गोताखोरों के मुताबिक गुफा के भीतर का पानी इतना गंदा था कि दृश्यता लगभग शून्य थी। बचावकर्मियों ने इसे 'कॉफी-कलर्ड वॉटर' यानी कॉफी जैसा गाढ़ा और भूरा पानी बताया।

गुफा की कई सुरंगें केवल 60 सेंटीमीटर चौड़ी थीं। तुलना करें तो एक बड़ी पिज्जा का व्यास करीब 50 सेंटीमीटर होता है। ऐसे में गोताखोरों को ऑक्सीजन सिलेंडर उतारकर शरीर सिकोड़ते हुए अंदर बढ़ना पड़ा। इसके अलावा गुफा के भीतर चमगादड़ों की बीट से पैदा हुई हाइड्रोजन सल्फाइड गैस मौजूद थी, जिससे बेहोशी या दम घुटने का खतरा बना हुआ था।

दुनिया भर के एक्सपर्ट जुटे
शुरुआत में लाओस और थाईलैंड की टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में जापान, मलेशिया, इंडोनेशिया, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल हुए। टीम में फिनलैंड के मशहूर गुफा गोताखोर मिक्को पासी भी शामिल थे, जिन्होंने 2018 के थाई गुफा बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि पासी ने साफ कहा कि यह मिशन थाईलैंड ऑपरेशन से कहीं ज्यादा खतरनाक है।

उनके मुताबिक, यह प्राकृतिक गुफा नहीं बल्कि सालों से हाथों से खोदी गई अस्थिर खदान है। कई हिस्सों में मिट्टी कभी भी ढह सकती थी। संकरी सुरंगों में एक समय पर केवल एक गोताखोर ही निकल सकता था।

पांचवें दिन तक सिर्फ सवाल ही सवाल
शुरुआती दिनों में सबसे बड़ा सवाल था कि खनिक जीवित भी हैं या नहीं। अगर वे जिंदा हैं तो क्या उन्हें बाहर निकाला जा सकेगा? बचावकर्मियों को यह भी डर था कि जिन लोगों ने कभी डाइविंग उपकरण नहीं देखे, उन्हें ऑक्सीजन रेगुलेटर और सिलेंडर के सहारे बाढ़ भरी सुरंगों से कैसे निकाला जाएगा?

गुफा के बाहर परिवारों का जमावड़ा लगा रहा। महिलाएं और बच्चे लगातार प्रार्थना करते रहे।

छठे दिन मिली पहली बड़ी सफलता
27 मई को अभियान में बड़ी सफलता मिली। पांच खनिक गुफा के भीतर प्रवेश द्वार से करीब 300 मीटर दूर एक चट्टान पर बैठे मिले। वे भूखे, कमजोर और डिहाइड्रेटेड थे लेकिन होश में थे।

एक खनिक ने कहा कि मां-पिता चिंता मत करो। मैं अभी मजबूत हूं। मैं घर वापस आऊंगा। थाई गोताखोर नोरासेद पलासिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अब मदद पहुंच चुकी है। इसके बाद उन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स, खाना, पानी और थर्मल कंबल दिए गए।

हर सेकंड मौत का खतरा
खनिकों को बाहर निकालना सबसे मुश्किल हिस्सा था। गोताखोरों को पूरी तरह अंधे पानी में केवल स्पर्श के सहारे रास्ता तय करना पड़ा। कई जगह ऑक्सीजन टैंक निकालकर शरीर को धक्का देकर सुरंग पार करनी पड़ी। घबराहट और ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा।

इस बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश और तूफान की चेतावनी भी जारी कर दी थी। डर था कि दोबारा बारिश हुई तो गुफा पूरी तरह डूब सकती है।

आखिरकार बाहर निकले चार खनिक
पानी लगातार पंप करके बाहर निकाला गया। जलस्तर घटने के बाद चार खनिक खुद बाहर निकलने में सफल रहे। वे कीचड़ से लथपथ थे और बाहर आते ही जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें ऑक्सीजन दी गई और थर्मल फॉइल कंबलों से ढका गया।

ऑस्ट्रेलियाई गोताखोर जोश रिचर्ड्स ने कहा कि मैं अंदर जाने के लिए वेटसूट पहन ही रहा था कि तभी वे खुद बाहर निकल आए।

अभी भी दो खनिक लापता
अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। बचाव दल के मुताबिक दो खनिक अब भी लापता हैं। जीवित बचे लोगों ने बताया कि वे शायद गुफा में 500 मीटर और अंदर चले गए थे।

थाई रेस्क्यू ग्रुप ‘मेट्टा थाम रेस्क्यू कलासिन’ के प्रमुख केंगकाज बोंगकावोंग ने कहा कि टीम अब और गहराई वाले हिस्से में खोज करेगी, लेकिन वह इलाका बेहद ज्यादा पानी से भरा और बेहद खतरनाक है।

थाईलैंड और लाओस मिशन में बड़ा अंतर
    लाओस मिशन                          थाईलैंड मिशन (2018)
    7 खनिक फंसे                         13 बच्चे और कोच फंसे
    5 मिले, 2 अब भी लापता             सभी सुरक्षित निकाले गए
    अस्थिर सोने की खदान                प्राकृतिक गुफा
    60 सेंटीमीटर तक संकरी सुरंगें       अपेक्षाकृत चौड़े रास्ते
    जहरीली गैस का खतरा                गैस का बड़ा खतरा नहीं
    आंशिक रूप से खुद बाहर निकले    पूरी तरह गोताखोरों पर निर्भर बचाव
    प्रवेश द्वार से 300 मीटर दूर मिले    कई किलोमीटर अंदर फंसे थे

दुनिया की नजर इस मिशन पर
यह अभियान अब दुनिया के सबसे कठिन और खतरनाक गुफा बचाव अभियानों में गिना जा रहा है।
हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और खतरा दोनों बढ़ रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजर उन दो लापता खनिकों पर टिकी है, जिन तक पहुंचना शायद अब तक का सबसे मुश्किल चरण साबित हो सकता है।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments